दूध के दाम नहीं बढ़े तो बंद हो सकता है दुग्ध उत्पादनः गौलापार के किसान

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समाचार सच, हल्द्वानी। गौलापार लक्षमपुर गांव के दुग्ध उत्पादक किसान महंगे पशुओं और दूध की कम कीमत से परेशान हैं। किसानों का कहना है कि उनकी लागत और मेहनत के मुकाबले उन्हें उचित लाभ नहीं मिल रहा, जिससे दुग्ध उत्पादन करने वाले किसानों की संख्या हर साल घटती जा रही है।

किसानों के अनुसार उनका पूरा परिवार दिन-रात पशुओं की देखभाल और चारे की व्यवस्था में लगा रहता है, फिर भी दूध उत्पादन से होने वाली आय पशुपालन में लगने वाले खर्च से कम पड़ जाती है। इसके अलावा, लावारिस पशु उनकी फसलों को बर्बाद कर देते हैं, जिससे उन्हें बाहर से महंगे दामों में चारा खरीदना पड़ता है।

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गौलापार में करीब 125 दुग्ध उत्पादक किसान हैं, जो रोजाना 28 दुग्ध समितियों के माध्यम से हजारों लीटर दूध बेचते हैं। लेकिन किसानों का कहना है कि 2004 में दूध की कीमत 20 रुपये प्रति लीटर थी, जो 20 साल बाद केवल 40-45 रुपये तक ही पहुंची है, जबकि दुधारू पशुओं की कीमत चार गुना बढ़ गई है। इस असंतुलन के कारण पशुपालन करना मुश्किल होता जा रहा है।

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स्थानीय उत्पादकों का यह भी कहना है कि उन्हें बाजार तक सही पहुंच नहीं मिल पा रही है, जिससे उनकी समस्याएं और बढ़ रही हैं। किसानों ने सरकार से मांग की है कि दूध के दाम बढ़ाए जाएं ताकि वे अपने पशुओं का पालन-पोषण करने के साथ परिवार का गुजारा भी कर सकें। उनका कहना है कि यदि हालात ऐसे ही बने रहे तो आने वाले चार वर्षों में गांवों में दुग्ध उत्पादन पूरी तरह बंद हो सकता है, और किसान पशुपालन छोड़ने को मजबूर हो जाएंगे।

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