‘‘कोई अबला न बने निर्भया’’ देश ने दोहराया यह संकल्प

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निर्भया के दोषियों को फांसी पर प्रतिक्रियाओं का दौर जारी…..

समाचार सच, हल्द्वानी। 20 मार्च शुक्रवार को तड़के निर्भया के चारों दोषियों को फांसी पर लटकाने के बाद सारे देश में इस बात को दोहराया है कि अब ऐसे काननू बनाने का वक्त आ गया है, जिससे अब कोई दोबारा केस न हो। इधर हल्द्वानी में भी इस फैसले का स्वागत किया गया। समाज की प्रबुद्ध महिलाओं ने ऐसी घटनाओं पर त्वरित न्याय की मांग की। वहीं शिक्षा में भी नैतिकता के समावेश की बात की। इस बारे में समाचार सच बेव पोर्टल के संपादक अजय चौहान और सहायक संपादक धीरज भट्ट ने समाज से जुड़ी विभिन्न महिलाओं से बातचीत की प्रस्तुत है उनके विचार एवं प्रतिक्रिया……

डॉ0 रश्मि पन्त (अस्टिेंट प्रोफेसर, मनोविज्ञान। एमबीपीजी, हल्द्वानी)

इस फैसले से महिलाओं के आत्मबल को मजबूती मिलेगी और महिला सशक्तिकरण में सहायक होगा। सरकार को नियमों में सुधार लाना पड़ेगा। निश्चत ही यह फैसला सराहनीय है। इसके साथ स्कूलों व कॉलेजों में नैतिक शिक्षा का समावेश होना चाहिए।

पार्वती किरौला (अवकाश प्राप्त अध्यापिका, खालसा नेशनल गर्ल्स इन्टर कालेज, हल्द्वानी)

निर्भया के दोषियों को फांसी देने से समाज में ऐसे अपराधियों को सबक मिलेगा। समाज में बेटियों नारियों को सम्मान मिलना चाहिए। बेटों के साथ बेटियों को भी नैतिकता की शिक्षा मिलनी चाहिए।

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इन्दिरा फर्त्याल (राज्य आन्दोलनकारी)

ऐसे मामलों में त्वरित न्याय मिलना चाहिए। अपने बच्चों को बताना चाहिए कि गलत काम के नतीजे बुरे होते हैं। हॉलाकि न्याय देरी से हुआ, लेकिन यह सराहनीय फैसला है।

दीप्ती खर्कवाल (समाजसेवी)

यह फैसला देरी से हुआ इसलिए इन मामलों में देर से फैसला नहीं होना चाहिए। बच्चों को नैतिकता का पाठ पढ़ाना चाहिए। महिलाओं की इज्जत करनी चाहिए। यह हमारे समाज की भी जिम्मेदारी है।

कविता जोशी (ग्राफिक डिजाइनर)

देर आयत, दुरूस्त आयता। इस फैसले से निर्भया को न्याय मिला है। समय भले ही ज्यादा हो गया है, लेकिन यह सराहनीय कदम है। युवाओं में नशे को रोकना चाहिए। बच्चों में अच्छे संस्कार डालने चाहिए।

कल्पना रावत, (प्रचार सचिव, पुर्नवा महिला समिति, हल्द्वानी)

इस मामले में देरी हुई है। सरकार को इस मामले में कानूनों में सुधार करना चाहिए, जिससे ऐसी घटनाओं पर रोक लगे। ऐसे मामले में दरिंदों को फांसी तुरन्त मिलनी चाहिए।

गौरी मिश्रा (अन्तर्राष्ट्रीय कवयित्री)

इस फैसले से एक उम्मीद जरूर नजर आ रही है। हमारे कानून में बदलाव आ रहा है। महिलाओं को पूजने वाले देश में लोगों को भी देवता बनना पड़ेगा। कानूनों को भी और मजबूत बनाने की आवश्यकता है।

मधु बिष्ट (इंचार्ज, इन्द्रा अम्मा भोजनालय, सरस मार्केट, हल्द्वानी)

न्याय देने में विलम्ब हुआ है, लेकिन देर से ही सही, न्याय तो मिला। ऐसे मामले में अपराधियों का तुरन्त न्याय मिलना चाहिए। इसके लिए सरकार व समाज को आगे आना होगा।

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जानकी रैंगाई (निदेशिका, पारदर्शिता ट्रस्ट)

निश्चय ही यह दिन स्वागत योग्य है। आज के दिन को निर्भया के प्रति समर्पित करना चाहिए। इस फैसले से आने वाली पीढ़ी के लिए भी एक शिक्षा होगी। निर्भया को न्याय दिलाने में उसके वकील सीमा कुशवाह की भूमिका भी सराहनीय है।

एकता पौढ़ियाल (छात्रा, एमए मनोविज्ञान, एबीपीजी हल्द्वानी)

समाज में सुधार होना चाहिए, जिससे नकारात्मक व महिलाओं के प्रति कुत्सित सोचों का दमन हो। युवाओं का मानसिक स्वास्थ्य का परीक्षण करना चाहिए, जिससे उनके अन्दर आ रही बुराइयों का निदान हो सके।

भावना बिष्ट (छात्रा, एमए राजनीति शास्त्र, एबीपीजी हल्द्वानी)

निर्भया के दरिन्दों को फांसी होने से यहां की मातृशक्ति को न्याय मिला है। न्याय भले ही देर में हुआ है, लेकिन फैसला संतोषजनक है।

डौली भट्ट (छात्रा)

महिलाओं के प्रति हमारी सोच आज भी संकुचित है। भले ही हम कागजों पर सशक्त है। लेकिन धरातल पर अभी काफी कुछ किये जाने की जरूरत है। इस फैसले से निर्भया की आत्मा को संतोष मिलेगा।

ममता देवाल (छात्रा, बीए फाइलन, एबीपीजी हल्द्वानी)

इस फैसले से लड़कियों को इंसाफ मिला है। यह हमारे लिए अच्छी बात है। मैं खुशी महसूस कर रही हूं।

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