पांच जुलाई को पड़ने वाले चन्द्रग्रहण की भारत में दृश्यता नहीं

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समाचार सच, हल्द्वानी। पांच जुलाई को पड़ने वाला ग्रहण वर्ष 2020 का चौथा ग्रहण होगा। यह चंद्रग्रहण उपच्छाया ग्रहण के रूप में दक्षिणी व उत्तरी अमेरिका, अफ्रीका, ग्रीनलैण्ड, यूरोप, आस्ट्रेलिया में दिखाई देगा। जबकि भारत में इस ग्रहण की दृश्यता नहीं होगी। इस कारण धर्मशास्त्रानुसार भारत में किसी भी प्रकार का सूतक मान्य नहीं होगा। देवपूजा भी सामान्य दिनों की तरह रहकर होगी। गुरूपूर्णिमा के पावन अवसर पर गुरूपूजा प्रातःकाल से की जा सकेगी।
अमेरिका में चंद्रग्रहण चार जुलाई को रात्रिकाल 08.50 बजे से प्रारम्भ होकर 10.52 मिनट तक धनुर्धारी रूप मे दृश्यत होगा। परंतु भारत में पांच जुलाई की प्रातः बेला 08.38 मिनट से प्रारम्भ होकर 11.21 मिनट तक रहकर अदृश्य अवस्था में होगा। इस बार यह चंद्रग्रहण धनु राशि मे रहेगा, जबकि सूर्य मिथुन राशि में रहेगा। भारत में चंद्रग्रहण की अदृश्यता होने के कारण भारत पर कोई प्रभाव नहीं होगा। मगर अगले एक माह तक ग्रह नक्छ्त्रों के भारी उलट फेर देखने को मिलेगा। जिसके कारण विश्व में प्राकृतिक आपदा व जनहानि की सम्भावना बनती दिखाई दे रही है। भूकम्पीय घटनायें भी सम्भावित हैं. क्योंकि जब भी एक पक्ष (शुक्ल पक्ष या कृष्ण पक्ष) मे दो ग्रहण होते हैं, तब ये विपदाकारक ही सिद्ध होते हैं। गांवो मे एक कहावत प्रचलित है,
एक पक्ष में दो ग्रहना, राजा मरे या सेना।
चीन के साथ अमेरिका व अन्य देशों के राजनीतिक व आर्थिक सम्बन्ध बिगड़ते जायेंगे।

-अशोक वार्ष्णेय
अंकशास्त्र ज्योतिषी

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