अब एक साल तक करा सकेंगे विवाह पंजीकरण, यूसीसी कानून में होने जा रहा बड़ा बदलाव

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समाचार सच, देहरादून। उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता (यूसीसी) कानून में पहला बड़ा संशोधन होने जा रहा है। व्यावहारिक परेशानियों को ध्यान में रखते हुए विवाह पंजीकरण की समय सीमा को छह माह से बढ़ाकर एक साल करने की तैयारी है। इस संबंध में गृह विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर विधि विभाग को भेज दिया है। अगर सब कुछ योजना के अनुसार चला, तो यह प्रस्ताव अगस्त में होने वाले विधानसभा मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है।

गौरतलब है कि यूसीसी कानून के तहत 26 मार्च 2010 से लेकर 27 जनवरी 2025 तक हुए विवाहों का पंजीकरण छह माह के भीतर कराना अनिवार्य किया गया था। अब यह अवधि 12 महीने तक बढ़ाई जा सकती है। इससे पहले के विवाहों को पंजीकरण के लिए छूट दी गई है। सूत्रों की मानें तो यूसीसी कानून में करीब 15 से 20 संशोधनों की आवश्यकता महसूस की गई है। लेकिन फिलहाल सरकार का फोकस विवाह पंजीकरण की समयसीमा में संशोधन पर है। प्रस्ताव को उच्च स्तर से मंजूरी मिलने के बाद विधि विभाग को भेजा गया, जहां से हरी झंडी मिलते ही यह विधानसभा में रखा जाएगा।

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विवाह पंजीकरण को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कानून के जानकारों के अनुसार, पंजीकरण अनिवार्य जरूर है, लेकिन अगर तय समयसीमा में पंजीकरण नहीं होता, तो विवाह अमान्य नहीं माना जाएगा। जुर्माना अदा कर पंजीकरण कराया जा सकता है। राज्य सरकार ने 27 जनवरी 2025 को देश में पहली बार यूसीसी लागू कर ऐतिहासिक कदम उठाया था। तब से लेकर अब तक 2,55,443 विवाह यूसीसी पोर्टल पर पंजीकृत किए जा चुके हैं।

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आने वाले संशोधन

  • ट्रांसजेंडर और समलैंगिक विवाह पंजीकरण के प्रावधान जोड़े जा सकते हैं।
  • विदेशी नागरिक से विवाह की स्थिति में आधार कार्ड की अनिवार्यता बाधा बन रही है, इसे लेकर निर्णय संभावित।
  • जातीय भेदों को लेकर संशोधन जैसे सामान्य जाति और अनुसूचित जनजाति, या उत्तराखंड एससी व अन्य राज्यों की एसटी के बीच विवाह की पंजीकरण व्यवस्था पर भी सरकार विचार कर रही है।
  • सरकार का यह कदम यूसीसी को और अधिक व्यावहारिक और समावेशी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
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