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परमात्मा के प्रति दृढ़ विश्वास ही हमें भय व चिंताओं से मुक्त करा सकता है : श्री हरि चैतन्य महाप्रभु

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गढ़ीनेगी पधारने पर हुआ श्री हरिचैतन्य महाप्रभु का भव्य स्वागत

समाचार सच, गढीनेगी। प्रेमावतार युगद्रष्टा श्री हरि कृपा पीठाधीश्वर एवं भारत के महान सुप्रसिद्ध युवा संत श्री श्री 1008 स्वामी श्री हरि चैतन्य पुरी जी महाराज ने कहा कि हमें परमात्मा के प्रति विश्वास ही नहीं बल्कि दृढ़ विश्वास होना चाहिए। ईश्वर के प्रति मन में यदि संशय आ जाता है, तो उसके प्रति होने वाली भक्ति स्वतः ही नष्ट हो जाती है तथा ईश्वर के प्रति प्रेम भी नष्ट हो जाता है ऐसा तब होता है जब निज हित में चिंतन किया जाता है। प्यार की ना तो कोई परिभाषा होती है और न ही प्यार को किसी बंधन में बाधा जा सकता है। स्वार्थ के रहते आसक्ति को प्यार नहीं कहा जा सकता है।
महाराज जी गुरूवार को यहाँ श्री हरि कृपा धाम आश्रम में उपस्थित विशाल भक़्त समुदाय को संबोधित कर रहे थे। अपने दिव्य व ओजस्वी प्रवचनों में उन्होंने कहा कि हम स्वंय इतनी चिंता नहीं कर सकते जितना की प्रभु का चिंतन दृढ़ विश्वास पूर्वक करने पर स्वयं परमात्मा हमारी चिंता करेंगे व ध्यान रखेंगे। संसार में सभी लोग अधिकांशतरू किसी न किसी स्वार्थवश ही संबंध रखते हैं यदि उनके हित में बाधा पहुँचेगी व हमारे अंदर उन्हें देने के लिए कुछ भी शेष ना रहेगा (रूप, बल, वाणी, प्रतिष्ठा, धन इत्यादी के माध्यम से) तो प्यार समाप्त हो जाएगा। बिना किसी स्वार्थ के संबंध बनाए रखने वाले अपवाद स्वरूप कुछ ही लोग मिलेंगे। जीव मात्र से बिना किसी स्वार्थ के हित चाहने व प्रेम करने वाले तो एक मात्र संत, गुरु व परमात्मा ही हैं।

उन्होंने कहा कि बिना विचारे कोई क़र्म न करें ,तथा न ही कुछ बोलें, ना किसी से संबंध बनाए व न ही किसी से कोई व्यवहार करें। विचारशील प्राणी कुछ भी बोलने से, व्यवहार करने, संबंध बनाने या कर्म करने से पहले विचार करता है। जिससे उसे गिलानी पश्चाताप व उपहास का सामना नहीं करना पड़ता। संत, गुरू व परमात्मा का दर दाता का दर है ना कि भिखारी का। आज के तथाकथित संत, गुरू, ब्राह्मण व शिक्षिकों ने अपने सम्मान व गरिमा को स्वयं खोया है। संत व गुरू हमारी संपत्ति नहीं अपितु संतति चाहते हैं। संपत्ति चाहने वाला लालची, लोभी व्यक्ति गुरू या संत कदापि नहीं हो सकता। सच्चा भाव ही सच्ची उपासना है। सच्चे हृदय से प्रेम व श्रद्धापूर्वक की गई प्रार्थना को परमात्मा अवश्य सुनते हैं चाहे व्यक्ति को वेद, शास्त्र, पुराणों का ज्ञान हो या न हो भाषा शैली भी विशेष हो या न हों चाहे हम शिक्षित हों या अशिक्षित हों, शुद्ध हार्दिक भावनाओं से किसी प्रकार भी प्रार्थना की जाए परमात्मा उसे नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा कि आज हमारी, हमारे परिवार, देश, समाज की जो दुर्दशा हो रही है। विभिन्न प्रयास करने के बावजूद जिससे हम उबर नहीं पा रहे हैं प्रयास करने के साथ साथ प्रभु से उनकी कृपा याचना से परिपूर्ण भाव सहित प्रार्थनाएँ अवश्य करनी चाहिए। परमात्मा हमारी वस्तुओं, पदार्थों, मान सम्मान इत्यादि का नहीं वह तो हमारी प्रेम व भावनाओं का भूखा है। भिलनी के खट्टे मीठे झूठे बेर में उसे जो स्वाद आता है ऐसा तो अयोध्या व जनकपुर के विभिन्न व्यंजनों में भी नहीं आता ।

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महाराज श्री ने कहा कि मात्र मानव शरीर पाकर ही हम सच्चे अर्थों में मानव या इंसान कहलाने का अधिकारी नहीं बन जाते हैं, स्वयं को सुसंस्कारित करके समाज के लिए उपयोगी बनाएँ। सदाचार पूर्ण जीवन बिताएँ राष्ट्रीयता, नैतिकता व चरित्र को भी जीवन में महत्व दें। महाराज श्री के दर्शनार्थ व दिव्य प्रवचनों को सुनने के लिए स्थानीय क्षेत्रीय व दूर दराज से काफी संख्या में भक्तजन पहुंचे अपने दिव्य प्रवचनों से उन्होंने सभी भक्तों को मंत्र मधु व भाव विभोर कर दिया सारा वातावरण भक्तिमय में हो उठा व श्री गुरु महाराज कामां के कन्हैया व लाठी वाले भैय्या की जय जयकार से गूँज उठा।

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श्री हरिचैतन्य महाप्रभु के 59वे प्राकट्योत्सव पर विराट धर्म सम्मेलन काशीपुर गांधीनगर में: 9 जून से 12 जून तक श्री हरिचैतन्य महाप्रभु के 59वे प्राकट्योत्सव पर विराट धर्म सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें क्षेत्र, प्रदेश व देश के विभिन्न प्रांतों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेंगे। 12 जून को पावन जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में प्रात 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक आयोजित विराट धर्म सम्मेलन में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अनेक भजन गायक, अनेक प्रसिद्ध राजनेता व कलाकार भाग लेंगे। संपूर्ण कार्यक्रम का कई चैनलों पर सीधा प्रसारण किया जाएगा। विशाल भंडारे का भी आयोजन होगा। आयोजकों ने सभी धर्म प्रेमी जनता को सप्रेम आमंत्रित किया है।

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