शोध, नवाचार और पारदर्शिता के नए मानक स्थापित करेगा उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय : कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी
समाचार सच, हल्द्वानी। हल्द्वानी स्थित उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा शोध एवं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता, पारदर्शिता और उत्कृष्टता को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। आज यहां प्रेस वार्ता में कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नवीन दिशानिर्देशों के अनुरूप राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के माध्यम से राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (एनईटी) आधारित पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया 17 फरवरी 2026 से ऑनलाइन प्रारम्भ हो रही है, जो मार्च 2026 के द्वितीय सप्ताह तक संचालित रहेगी।
कुलपति ने बताया कि नेट विद जेआरएफ, नेट विद एलएस तथा नेट फॉर पीएचडी एडमिशन श्रेणी के अभ्यर्थी, जिनके पास मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से संबंधित विषय में स्नातकोत्तर उपाधि है, आवेदन के पात्र होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रवेश प्रक्रिया पूर्णतः पारदर्शी, गुणवत्तापरक एवं यूजीसी मानकों के अनुरूप संपन्न की जाएगी। काउंसलिंग की तिथियाँ विषय विशेषज्ञों की उपलब्धता के आधार पर निर्धारित कर विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित की जाएंगी।
उन्होंने जानकारी दी कि विश्वविद्यालय के अनुसंधान एवं नवाचार निदेशालय के निर्देशन में 17 से 19 फरवरी 2026 तक पीएचडी शोधार्थियों की छह माह की प्रगति समीक्षा हेतु तीन दिवसीय शोध कार्यशाला आयोजित की जा रही है। ऐसी समीक्षात्मक कार्यशालाएँ शोधार्थियों को सही दिशा में आगे बढ़ने तथा सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक अनुप्रयोगों से जोड़ने में सहायक होती हैं।
तीन दिवसीय कार्यशाला में शोधार्थी अपनी मध्यावधि प्रगति प्रस्तुत करेंगे, विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त करेंगे तथा शोध कार्यप्रणालियों को परिष्कृत करेंगे। विभिन्न सत्रों में शोध डिजाइन, आँकड़ा विश्लेषण, वैधता एवं विश्वसनीयता, प्रभावी साहित्य खोज, सैद्धांतिक ढाँचा निर्माण, एआई एवं सॉफ्टवेयर आधारित विश्लेषण, शोध नैतिकता, प्रकाशन रणनीतियाँ तथा डिजिटल मानविकी जैसे विषयों पर गहन चर्चा की जाएगी।
कार्यशाला में देश के विभिन्न संस्थानों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ सहभागिता कर रहे हैं, जिनमें प्रो. शिवानंद कनवी, प्रो. आर.पी. बहुगुणा, प्रो. नंद गोपाल साहू, प्रो. एस.एस. सामंत तथा डॉ. अभिषेक तोमर शामिल हैं।
कुलपति ने बताया कि शोध उत्कृष्टता को बढ़ावा देने हेतु बेस्ट रिसर्च पेपर अवार्ड, शोध प्रोत्साहन राशि, छात्रवृत्ति, लघु शोध परियोजनाएँ तथा अकादमिक सत्यनिष्ठा से संबंधित व्यवस्थाएँ लागू की जा रही हैं। विश्वविद्यालय में वर्तमान में 26 विषयों में पीएचडी कार्यक्रम संचालित हैं तथा शोध पाठ्यक्रम में एलएमएस एकीकरण, एसपीएसएस आधारित पाठ्यक्रम, शोध एवं प्रकाशन नैतिकता मॉड्यूल तथा प्लेजरिज़्म जाँच सॉफ्टवेयर जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के 4 शोधार्थियों को मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन छात्रवृत्ति तथा 9 शोधार्थियों को यूजीसी द्वारा जेआरएफ एवं एनएफएससी फेलोशिप प्राप्त हुई है। अब तक 44 शोधार्थियों को डॉक्टरेट उपाधि प्रदान की जा चुकी है, जबकि वर्तमान में 128 शोधार्थी पीएचडी कर रहे हैं। रिसर्च प्रमोशन फंड के अंतर्गत एक करोड़ रुपये से अधिक का वार्षिक प्रावधान किया गया है, जिससे शोध अनुदान, फेलोशिप, अकादमिक सत्यनिष्ठा तंत्र तथा पुस्तकालय उन्नयन जैसी योजनाएँ संचालित की जा रही हैं।
इस अवसर पर शोध एवं नवाचार निदेशालय के निदेशक प्रो. गिरिजा प्रसाद पांडेय एवं कुलसचिव खेमराज भट्ट भी उपस्थित रहे। कुलपति ने पात्र अभ्यर्थियों एवं शोधार्थियों से विश्वविद्यालय की पहलों का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।



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