उत्तरायणी कौतिक मेला कमेटी की रामलीला में जीवंत अभिनय ने बांधा समां, पुतला दहन के साथ बुराई पर अच्छाई की जीत का दिया संदेश
समाचार सच, पंतनगर/नगला डेस्क।
उत्तरायणी कौतिक मेला कमेटी की ओर से आयोजित रामलीला का समापन रावण, कुंभकरण, मेघनाथ और अहिरावण वध के रोमांचक एवं भावपूर्ण प्रसंगों के साथ हुआ। रामलीला के अंतिम दिन मंच पर सजी युद्ध की विभीषिका, कलाकारों का दमदार अभिनय और जय श्रीराम के गगनभेदी जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। जैसे-जैसे युद्ध के प्रसंग आगे बढ़े, दर्शकों का उत्साह भी चरम पर पहुंचता गया। भगवान श्रीराम की विजय और चारों प्रमुख पात्रों के पुतला दहन के साथ रामलीला का विधिवत समापन किया गया।
इस वर्ष की रामलीला कई मायनों में खास रही। आयोजकों के अनुसार, पिछले 25 वर्षों में पहली बार रामलीला देखने के लिए इतनी बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे। दर्शकों की भारी भीड़ ने आयोजन की लोकप्रियता और धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति लोगों के जुड़ाव को प्रदर्शित किया। देर तक चले मंचन के दौरान दर्शक कलाकारों के अभिनय और युद्ध दृश्यों में पूरी तरह डूबे नजर आए।
कलाकारों के जीवंत अभिनय ने जीता दर्शकों का दिल
रामलीला में रावण की भूमिका में मोहन सिंह नयाल, मेघनाथ के रूप में राजेंद्र भट्ट, अहिरावण के किरदार में अनिल जोशी और कुंभकरण की भूमिका में शिव कुमार ने अपने अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया। इन कलाकारों ने अपने संवाद, हाव-भाव, वेशभूषा और प्रभावशाली मंच प्रस्तुति से पात्रों को जीवंत कर दिया।
वहीं, प्रभु श्रीराम की भूमिका में सीएम पपने, लक्ष्मण के रूप में कमल कर्नाटक और हनुमान की भूमिका में कैलाश भट्ट ने युद्ध के दृश्यों में प्रभावशाली अभिनय किया। भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और हनुमान द्वारा विभिन्न प्रसंगों में राक्षसों के वध का मंचन किया गया। अंत में रावण, कुंभकरण, मेघनाथ और अहिरावण के पुतलों का दहन किया गया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने जय श्रीराम के उद्घोष के साथ विजय का उत्सव मनाया।
रामलीला के समापन अवसर पर सभी कलाकारों को उनके योगदान के लिए पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान कलाकारों के अभिनय, मंच सज्जा और आयोजन को सफल बनाने में जुटे सभी सहयोगियों की सराहना की गई।
अतिथियों ने की रामलीला की सराहना
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व विधायक एवं भाजपा प्रदेश प्रवक्ता राजेश शुक्ला, संचार निदेशक डॉ. जेपी जायसवाल और नगला पालिका अध्यक्ष सचिन शुक्ला उपस्थित रहे। इसके अलावा पंतनगर भाजपा अध्यक्ष श्रीमती पिंकी डिमरी, कमेटी अध्यक्ष राजू रावत, सचिव हरीश भट्ट, दीपक अधिकारी, जितेंद्र बोरा, जगदीश भट्ट, यूसी तिवारी, जगत सिंह, सोम देव पपने, मनोज बेलवाल, तनीषा रावत, लक्ष्मी डिमरी, हिमांशु जोशी, धर्मेंद्र भट्ट, गोपाल तिवारी, गिरीश मेहरा और प्रमोद तिवारी सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
राजेश शुक्ला ने कहा—संस्कृति और संस्कारों की जीवंत पाठशाला है रामलीला
पूर्व विधायक एवं भाजपा प्रदेश प्रवक्ता राजेश शुक्ला ने कहा कि रामलीला हमारी समृद्ध भारतीय संस्कृति, आस्था और संस्कारों की जीवंत अभिव्यक्ति है। भगवान श्रीराम का जीवन हमें सत्य, मर्यादा, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं और आदर्शों से जुड़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी लोगों को सफल रामलीला के लिए बधाई दी।
सचिन शुक्ला बोले—जनसहभागिता ने आयोजन को बनाया यादगार
नगला पालिका अध्यक्ष सचिन शुक्ला ने कहा कि रामलीला जैसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं। इस वर्ष बड़ी संख्या में दर्शकों का पहुंचना उत्साहजनक है। इससे स्पष्ट होता है कि लोगों के मन में अपनी परंपराओं और धार्मिक आयोजनों के प्रति गहरा लगाव है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों को प्रोत्साहन मिलने से क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता को मजबूती मिलती है।
पिंकी डिमरी ने कहा—नई पीढ़ी तक पहुंचें रामायण के आदर्श
पंतनगर भाजपा अध्यक्ष श्रीमती पिंकी डिमरी ने कहा कि रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली प्रेरणादायक परंपरा है। भगवान श्रीराम का आदर्श जीवन हमें बड़ों का सम्मान करने, अपने कर्तव्यों का पालन करने और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की सीख देता है। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को ऐसे आयोजनों से जोड़ना आवश्यक है, ताकि हमारी सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचती रहे।
यादगार बना रामलीला का समापन
उत्तरायणी कौतिक मेला कमेटी की रामलीला का समापन श्रद्धा, उत्साह और उल्लास के वातावरण में हुआ। कलाकारों के शानदार अभिनय, दर्शकों की भारी मौजूदगी, अतिथियों की सहभागिता और पुतला दहन के साथ संपन्न हुए अंतिम प्रसंगों ने आयोजन को यादगार बना दिया। रामलीला ने एक बार फिर संदेश दिया कि अहंकार, अन्याय और अधर्म चाहे कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है।

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