इन दिक्कतों को आने से बचाती है मुंह में बनने वाली लार

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समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। मुंह में बनने वाली लार हमारी सेहत के लिए कितनी फायदेमंद है इस बारे में हम कभी ध्यान ही नहीं देते लेकिन अगर शरीर में इसकी कमी हो जाए तो मुंह का स्वाद बरकरार रखने से लेकर कई बीमारियों और संक्रमणों का खतरा हो सकता है। आइए जानें, लार बनने के ऐसे 10 फायदे जो आपको स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बचाए रखने में मददगार है।

कैंसर से लड़ने में मदद करती है लार
जापान के वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में माना है कि मुंह में मौजूद लार कार्सिनोजेन में मौजूद सुपरऑक्साइड फ्री रेडिकल्स से लड़ते हैं जिससे कैंसर होने का रिस्क कम होता है।

भोजन को रोज 30 मिनट तक चबाकर खाने से मुंह में लार बनती है जो खाते वक्त ही कैर्सिनोजेनिक तत्वों को खत्म करने में मदद करती है।

कार्सिनोजेन डाइट के हानिकारक तत्वों के संक्रमण से लार न सिर्फ मुंह को साफ करती है बल्कि 30 मिनट तक पेट में भी यह प्रक्रिया चलती है।

दांतों की रक्षा करती है लार
लार में सोडियन, पोटैशियम, फॉस्फेट, कैल्शियम, प्रोटीन, ग्लूकोज जैसे तत्व होते हैं जो दांतों को मजबूत बनाते हैं। इसमें मौजूद एंटीबॉडीज दांतों को हानिकारक संक्रमणों से बचाते हैं जिससे दांत सड़ते नहीं। यह दांतों पर सुरक्षा कवच की तरह काम करती है।

पाचन में फायदेमंद
लार मुंह में भोजन के कणों को तोड़ने में मदद करती है जिससे खाने को पचाने में आसानी होती है। अगर शरीर में लार की कमी हो जाए तो भोजन निगलना मुश्किल हो जाता है और पाचन क्रिया प्रभावित होती है।

एंटी एजिंग
लार में श्सलाइवा पैरोटिड ग्लैंड हार्माेन (एसपीजीएच) पाया जाता है जो त्वचा से उम्र के प्रभावों को कम करते है और आप लंबे समय तक युवा दिख सकते हैं।

मसूड़े और गले के लिए फायदेमंद
लार में लाइसोजाइम नामक एंटीबैक्टीरियल तत्व और इम्यून प्रोटीन ए होते हैं जो मसूड़े और गले को कई प्रकार के हनिकारक संक्रमणों से बचाते हैं।

मुंह साफ रखती है लार
किसी भी स्वस्थ व्यक्ति के मुंह में प्रतिदिन 1000 से 1500 मिलीलटर लार बनती है जो मुंह में मौजूद कैविटी, हानिकारक बैक्टीरिया और बारीक भोजन के कणों को साफ करने में मदद करती है।

सेहत का राज बता सकती है लार
जिस तरह किसी शारारिक समस्या का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है, उसी तरह लार के टेस्ट से भी सेहत का हाल पता चल सकता है। खासतौर पर एचआईवी के इलाज में लार के टेस्ट का बहुत महत्व है। अब वैज्ञानिक डायबिटीज, दिल के रोग और कैंसर जैसे रोगों का लार से परीक्षण करने की कोशिश कर रहे हैं।

चोट में आराम पहुंचाती है
डच शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया है कि लार का मदद से किसी भी प्रकार की ब्लीडिंग या चोट से रिकवरी आसान होती है। यह मुंह में होने वाली ब्लीडिंग को रोकने में मदद करती है और चेट वाले भाग को संक्रमण से बचाती है। साथ ही, इसका इस्तेमाल चोट लगे हुए हिस्से की सफाई के लिए भी कर सकते हैं।

सांसों की बदबू से छुटकारा
कई बार मुंह में लार कम बनने से भी सांसों से बदबू की समस्या हो सकती है। मुंह में रह गए भोजन के कण और बैक्टीरिया कई बार इन्फेक्शन पैदा कर देते हैं जिससे भी सांसों से बदबू आती है। लार इन कणों और बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करती है।

बोलने में मदद करती है
लार बनने से मुंह और गले में नमीं बरकरार रहती है जिससे हमें बोलने में आसानी होती है। हां, बहुत अधिक लार बनने से जरूर बोलने में दिक्कत हो सकती है, इस बात से भी गुरेज नहीं किया जा सकता है।

लार से कई रोगों का इलाज

  • एक्जिमा में सुबह उठकर करीब 1 माह तक लार लगाने से फायदा होता है। इसके अलावा सोरायसिस में सुबह बासी मुंह की लार 6 माह से 1 वर्ष तक, जलने के निशान पर 1-2 माह व घाव पर 5-10 दिन तक लार लगाएं।
  • हाथ-पैरों की अंगुलियों के बीच होने वाले फंगल इंफेक्शन पर इसे रोजाना लगाएं।
  • आंख आने पर दो दिन तक व एलर्जी होने पर 2-3 माह तक आंखों में लार को काजल की तरह लगाएं।
  • पेट की समस्या या कीड़े होने पर सुबह उठकर बासी मुंह पानी पीएं।

इन वजहों से मुंह में लार की कमी
धूम्रपान से लार के दूषित होने या तंबाकू, खैनी, पान व जर्दा खाने से बार-बार थूकने की आदत से मुंह सूखने लगता है जिससे यह खत्म हो जाती है। ऐसे में जरूरत से ज्यादा लार बाहर निकल जाती है। दवाओं या ड्रग आदि के प्रयोग से भी मुंह सूख जाता है और लार न के बराबर रह जाती है।

अधिक बनना यानी पेट के रोगों की आशंका
कैंसर व स्ट्रोक का पता लगाने व डीएनए मैपिंग आदि लार के माध्यम से की जाती है। इसका अधिक बनना पेट, लिवर और पेट के कीड़े होने का संकेत होता है।

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