समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। शरद पूर्णिमा का पर्व इस साल 25 अक्टूबर 2026, रविवार को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं में इस तिथि का विशेष महत्व है, लेकिन इस बार ग्रहों की स्थिति भी ज्योतिषीय चर्चा का विषय बनी हुई है। पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, शरद पूर्णिमा पर बुध और शुक्र वक्री रहेंगे। वहीं, शनि और चंद्रमा की स्थिति से विषयोग का प्रभाव भी देखा जा रहा है। हालांकि, गुरु की मजबूत स्थिति को राहत देने वाला संकेत माना जा रहा है। ऐसे में सवाल है कि ग्रहों का यह संयोग जनमानस पर कैसा प्रभाव डाल सकता है और शरद पूर्णिमा की तिथि 25 अक्टूबर को ही क्यों रखी गई है?
25 अक्टूबर को क्यों मनाई जाएगी शरद पूर्णिमा?
पंचांग के अनुसार, आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर शुरू होगी और 26 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 41 मिनट पर समाप्त होगी। शरद पूर्णिमा जैसे चंद्रमा से जुड़े पर्व में रात्रि के समय पूर्णिमा तिथि का होना विशेष महत्व रखता है। इसी आधार पर इस साल शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस रात चंद्रमा की पूजा, अर्घ्य और खीर रखने की परंपरा निभाई जाएगी।
बुध और शुक्र वक्री
पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, शरद पूर्णिमा के आसपास बुध और शुक्र की वक्री स्थिति बनी रहेगी। ज्योतिषीय मान्यताओं में बुध को बुद्धि, संवाद और निर्णय क्षमता से जोड़ा जाता है, जबकि शुक्र प्रेम, संबंधों, सुख-सुविधाओं और आर्थिक मामलों का कारक माना जाता है। बुध 24 अक्टूबर से वक्री होंगे, जबकि शुक्र की वक्री चाल अक्टूबर की शुरुआत से जारी है। दोनों ग्रहों का एक साथ वक्री होना लोगों के मन में अस्थिरता पैदा कर सकता है। इसलिए इस दिन बड़े फैसले लेने से पहले सोच-समझकर कदम उठाना बेहतर रहेगा।
शनि-चंद्रमा का विषयोग बढ़ा सकता है चिंता?
ज्योतिष में शनि और चंद्रमा के संयोग को विषयोग कहा जाता है। पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, इस बार शनि की वक्री स्थिति के कारण इस योग का अप्रत्यक्ष प्रभाव माना जा रहा है। ज्योतिषीय व्याख्याओं में चंद्रमा को मन और भावनाओं से, जबकि शनि को अनुशासन, जिम्मेदारी और संघर्ष से जोड़ा जाता है। इनका संबंध बनने पर मानसिक दबाव, चिंता या कामकाज में देरी जैसी स्थितियों की आशंका जताई जाती है। हालांकि, यह पूर्ण विष योग नहीं है, क्योंकि शनि वक्री हैं। फिर भी मन को शांत रखने और अनावश्यक तनाव से बचने की सलाह दी जाती है।
गुरु की मजबूत स्थिति से मिलेगी राहत?
ग्रहों की स्थिति में गुरु उच्च स्थान पर बैठे हैं। गुरु जब मजबूत स्थिति में होता है तो ज्ञान, आशा और संरक्षण का भाव बढ़ता है। इस शुभता के कारण पूरी स्थिति मध्यम कही जा सकती है। गुरु की अच्छी स्थिति लोगों को सही मार्गदर्शन और धैर्य प्रदान कर सकती है। शरद पूर्णिमा के शुभ अवसर पर गुरु का प्रभाव सकारात्मक काम कर सकता है। पूजा और दान जैसे शुभ कार्य करने से इस शुभता का लाभ और बढ़ जाता है।
शरद पूर्णिमा पर कैसा रहेगा ग्रहों का प्रभाव?
पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, बुध-शुक्र की वक्री चाल और शनि-चंद्रमा से जुड़े विषयोग के कारण शरद पूर्णिमा के आसपास ग्रहों की स्थिति सामान्य से मध्यम मानी जा रही है। गुरु की मजबूत स्थिति इसमें शुभता का पक्ष जोड़ती है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, ऐसे समय में जल्दबाजी से बचना, सोच-समझकर निर्णय लेना और रिश्तों में संवाद बनाए रखना उपयोगी माना जाता है। शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की पूजा और अपनी परंपरा के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान किए जा सकते हैं।
25 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा पर भले ही ग्रहों की स्थिति थोड़ी चिंताजनक दिख रही हो, लेकिन उच्च के गुरु की कृपा और मां लक्ष्मी-भगवान शिव की आराधना से इस अवधि को शुभ और फलदायी बनाया जा सकता है। ग्रहों के इन संकेतों को ज्योतिषीय आकलन के रूप में देखना चाहिए, ना कि हर व्यक्ति के लिए तय परिणाम के रूप में।

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