श्राद्ध का मतलब अपने पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करना

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क (डॉ0 आचार्य सुशांत राज) । डॉक्टर आचार्य सुशांत राज ने जानकारी देते हुये बताया की श्राद्ध का मतलब अपने सभी कुल देवताओं और पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करना है। वैसे तो प्रत्येक महीने की अमावस्या तिथि को पितरों की शांति के लिए पिंड दान या फिर श्राद्ध कर्म किये जाते हैं। लेकिन पितृ पक्ष में श्राद्ध करने का विशेष महत्व माना जाता है। इस साल श्राद्ध 20 सितंबर से शुरू हो रहे हैं और 6 अक्टूबर को खत्म होंगे। मान्यता है इस दौरान पिंडदान, तर्पण कर्म और ब्राह्मण को भोजन कराने से पूर्वज प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं।
कब होता है पितृपक्ष- हिंदू पंचांग अनुसार आश्विन माह के कृष्ण पक्ष को पितृपक्ष कहा जाता है। पितृपक्ष भाद्रपद मास की पूर्णिमा से शुरु होकर आश्विन मास की अमावस्या तक चलते हैं। भाद्रपद पूर्णिमा के दिन सिर्फ उन लोगों का श्राद्ध किया जाता है जिनका निधन पूर्णिमा तिथि के दिन ही हुआ हो। शास्त्रों अनुसार जिस व्यक्ति की मृत्यु किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष की या कृष्ण पक्ष की जिस तिथि को होती है उसका श्राद्ध कर्म पितृपक्ष की उसी तिथि को ही किया जाता है।
शास्त्रों में यह भी विधान दिया गया है कि यदि किसी व्यक्ति को अपने पूर्वजों के देहांत की तिथि ज्ञात नहीं है तो ऐसे में इन पूर्वजों का श्राद्ध कर्म आश्विन अमावस्या को किया जा सकता है। इसके अलावा अकाल मृत्यु या किसी दुर्घटना का शिकार हुए परिजन का श्राद्ध चतुर्दशी तिथि को किया जाता है।
श्राद्ध सारिणी –
पूर्णिमा श्राद्ध 20 सितंबर 2021
प्रतिपदा का श्राद्ध 21 सितंबर 2021
द्वितीया का श्राद्ध 22 सितंबर 2021
तृतीया का श्राद्ध 23 सितंबर 2021
चतुर्थी का श्राद्ध 24 सितंबर 2021
पंचमी का श्राद्ध 25 सितंबर 2021
षष्ठी का श्राद्ध 26 सितंबर 2021
सप्तमी का श्राद्ध 27 सितंबर 2021
अष्टमी का श्राद्ध 28 सितंबर 2021
नवमी का श्राद्ध 29 सितंबर 2021
दशमी का श्राद्ध 30 सितंबर 2021
एकादशी का श्राद्ध 01 अक्टूबर 2021
द्वादशी का श्राद्ध 02 अक्टूबर 2021
त्रयोदशी का श्राद्ध 03 अक्टूबर 2021
चतुर्दशी का श्राद्ध 04 अक्टूबर 2021
सर्वपितृ श्राद्ध 05 अक्टूबर 2021

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