…तो धरती डोलने से हो सकती है तबाही

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-वैज्ञानिक जता रहे है भूकम्प की आंशका
-जमीनी हलचलोें से मिल रहे हैं संकेत

समाचार सच, हल्द्वानी (धीरज भट्ट)। उत्तराखण्ड का प्राकृतिक आपदाओं से गहरा नाता रहा है। कभी पहाड़ों का दरकना और कभी चट्टानों का टूटना यहां की नियति रही है। इन सब में खतरनाक है- भूकंप – इतिहास गवाह रहा है कि भूकम्प से यहां अनके बार नुकसान हुआ है। इसमें जन-धन की भी पर्याप्त हानि हुई है।

इस विनाशकारी त्रासदी का मुख्य कारण धरती की आन्तरिक हलचल तो है। साथ ही पर्यावरण के साथ अंधाधुध छेड़छाड़ व प्रकृति का दोहन भी है। विगत दिनों उत्तराखण्ड में पिथौरागढ़ में भूकम्प आने से लोगों में दहशत छा गयी। इसके अलावा रूक-रूक कर आये दिन कहीं न कहीं भूकम्प के झटके महसूस किया जाना आम बात है। लोगों के जेहहन में 20 अक्टूबर 1991 को उत्तकाशी में और 29 मार्च 1999 को चमोली में आये विनाशकारी भूकम्प की याद ताजा हो यगी। माना जा रहा है कि भूकंप की इन घटनाओं के पीछे हिमालय की पट्टी में भूगर्भीय हलचलों का तेजी से होना है।

ज्ञात हो कि भूकम्पीय दृष्टि से उत्तराखण्ड सिस्मिक जोने 4 व 5 में आता है। इस दृष्टि से यहां पर कभी भी व्यापक रूप से तबाही हो सकती है। भूगर्भ विशेषज्ञों का आंकलन है कि यहां हिमालय पर्वत की प्लेटों में खिंचाव आज भी जारी है। इस कारण यहां की जमीन में कंपन आना स्वाभाविक है। इसके अलावा यहां पर हो रहे बेतरतीब निर्माण कार्य होने से भी प्रकृति का संतुलन बिगड़ता जा रहा है।

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देखने में आ रहा है कि पहाड़ों में सड़क, जलविद्युत व बांध निर्माण होते रहता है। इसमें कठोर जमीन व पत्थरों को तोड़ने के लिये अंधाधुंध बारूद का प्रयोग किया जाता है। जिससे जमीन की आंतरिक परतें दिन पर दिन कमजोर ही रही हैं। इससे भी भूकम्पों में इजाफा होते जा रहे है।

पर्यावरणविदों का मानना है कि जंगलों में अवैध कटान से भी प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है। गौरतलब है कि उत्तराखण्ड शुरू से ही प्राकृतिक रूप सये बेहद संवेदनशील रहा है। यहां प्रकृति का मानव ने बेरहम रूप से दोहन किया है। जिसका दंड भी यहां का जनजीवन भुगतने को मजबूर है।

वाडिया के वैज्ञानिक रखे हैं नजर
सेस्मोलॉजीकल सोसाइटी ऑफ यूएसए द्वारा मार्च 2020 में मैक्सिकों में भू वैज्ञानिकों के सम्मेलन में वाडिया इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक डॉ0 सुशील कुमार स्लो एंड फास्ट अर्थ क्वैक एशिया रीजन विषय के संयोजक चुने गए हैं। जहां वह स्लो अर्थक्वैक के बारे में दुनियाभर के वैज्ञानिकों के साथ चर्चा करेंगे। इस सम्मेलन मेें जापान के भू-वैज्ञानिक जिम मुरी भी हिस्सा लेंगे। जिन्होंने जापान में पहली बार स्लो अर्थ क्वैक को रिकार्ड करने में सफलता प्राप्त की है। उत्तराखण्ड में इस साल वाडिया के वैज्ञानिकों ने एक हजार से अधिक माइक्रो भूकम्प रिकार्ड किए हैं। हालांकि इसमें से सिर्फ छह भूंकप ही ऐसे रहे जिसका पता लोगों को चला और इसकी हलचल महसूस होने के कारण उन्हें घरों से बाहर निकलना पड़ा। वैज्ञानिकों का निष्कर्ष है कि माइक्रो भूकंप से हिमालयन बेल्ट की एनर्जी निकल रही है, इसके अलावा स्लो अवधि के भूकंप से भी एनर्जी बाहर निकल रही है। अब वैज्ञानिक बेहद धीमी अवधि वाले इन भूकंप के आंकड़ों का अध्ययन करने में जुटे हैं।

पांच सौ सालों में दुबारा आ सकता है भूकम्प
हल्द्वानी । वैज्ञानिक मान रहे हैं कि तराई क्षेत्र में व्यापक भूकम्प आ सकता है। इसके लिए रामनगर क्षेत्र में नंदपुर में वैज्ञानिक सर्वे में लगे हुए है। आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों का कहना है कि यहां पर 500 वर्ष पूर्व भूकम्प आया था। इसलिए फिर से ऐसे ही भूकम्प की आशंका जतायी जा रही हैं। इसका केन्द्र रामनगर -हल्द्वानी मार्ग पर नंदपुर में आसपास का क्षेत्र माना जा रहा है। यहां पर 15 फरवरी तक सर्वे किया जा रहा है। वैज्ञानिकों की टीम का नेतृत्व आईआईटी कानपुर में वैज्ञानिक प्रो0 जावेद मलिक कर रहे है।

राज्य में आये भूकम्पों की सूची
तिथि तीव्रता अधिकेंद्र
22 मई 1803 6.0 उमरकाशी
01 सितम्बर 1803 9.0 बद्रीनाथ
28 मई 1816 7.0 गंगोलीहाट
25 दिसम्बर 1831 6.0 लोहाघाट
02 जुलाई 1832 6.0 लोहाघाट
30 मई 1833 6.0 लोहाघाट
14 मई 1835 7.0 लोहाघाट
14 फरवरी 1851 5.0 नैनीताल
25 जुलाई 1869 6.0 नैनीताल
22 मई 1871 6.0 नैनीताल
22 मई 1871 6.0 लण्ढौरा
28 अक्टूबर 1916 7.5 धारचूला
05 मार्च 1935 6.0 धारचूला
02 अक्टूबर 1937 8.0 देहरादून
28 दिसम्बर 1958 7.5 धारचूला
24 दिसम्बर 1961 5.7 धारचूला
26 सितम्बर 1964 5.8 धारचूला
26 अक्टूबर 1964 5.3 धारचूला
27 जून 1966 5.7 धारचूला
16 दिसम्बर 1966 5.7 भारत नेपाल सीमा
28 अगस्त 1968 7.0 धारचूला
20 मई 1979 6.5 सेराघाट
21 मई 1980 6.5 धारचूला
20 अक्टूबर 1991 6.5 उत्तरकाशी
29 मार्च 1999 6.8 चमोली
14 अगस्त 2005 4.8 सम्पूर्ण उत्तराखण्ड
14 दिसम्बर 2005 5.2 जोशीमठ (चमोली)
02 सितम्बर 2009 4.8 सम्पूर्ण उत्तराखण्ड
04 अप्रैल 2011 5.7 भारत नेपाल सीमा
2017 एनए रूद्रप्रयाग

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