अभाकिम के जिला सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा किसान मोदी सरकार को उखाड़ने में बड़ी भूमिका निभाएंगे

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समाचार सच, लालकुआं / बिन्दुखत्ता। अखिल भारतीय किसान महासभा जिला नैनीताल का तीसरा जिला सम्मेलन दूध डेरी चौराहा, पुराना खत्ता, बिन्दुखत्ता में सम्पन्न हुआ. सम्मेलन के द्वार को बिन्दुखत्ता में राशनकार्ड आंदोलन से लेकर तमाम आंदोलनों में सक्रिय रहे कामरेड दीपक बोस के नाम पर दीपक बोस द्वार व बिन्दुखत्ता के भूमि संघर्ष से लेकर जीवनपर्यंत बिन्दुखत्ता के हर आंदोलन में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने वाले कामरेड मान सिंह पाल के नाम पर सम्मेलन के मंच का नाम रखा गया।
मुख्य अतिथि के रूप में किसान महासभा के नैनीताल जिला सम्मेलन को संबोधित करते हुए भाकपा (माले) के उत्तराखंड राज्य सचिव राजा बहुगुणा ने कहा कि, वनवासी और आदिवासी मोदी सरकार के निशाने पर हैं इस सरकार ने वनाधिकार को तो सही तरीके से लागू नहीं किया लेकिन वनों में रहने वाले लोगों को बेदखल करने के लिए एक कानून का प्रस्ताव कर दिया है। यह प्रस्ताव और कुछ नहीं अडानी अम्बानी जैसे बड़े कॉरपोरट के हित साधने का दस्तावेज है। इसलिये इस सरकार से छुटकारा पाए बिना किसानों पशुपालकों वनवासियों का भला होने वाला नहीं है।
उन्होंने कहा कि देश में अभी इस सरकार के खिलाफ एक सकारात्मक माहौल दिख रहा है। जगह जगह सड़कों पर इस सरकार के खिलाफ जनता का गुस्सा दिख रहा है। किसानों को चाहिए कि किसान विरोधी मोदी सरकार को उखाड़ने में जनता की व्यापक लड़ाई में बड़ी भूमिका निभाएं।
राजा बहुगुणा ने कहा कि धामी सरकार ने किसानों के सवालों पर कोई कदम नहीं उठा रही है। आवारा पशुओं की समस्या से लेकर खत्तावासियों की परेशानियों का कोई हल करने की दिशा में इस सरकार ने कुछ भी नहीं किया. लेकिन सरकारी नौकरियों में भाई भतीजावाद और घोटाले में भाजपा की उत्तराखंड सरकार ने सारे रिकार्ड तोड़ दिये। केंद्र सरकार के प्रधानमंत्री मोदी जी आंखें बंद करके इस महाघोटाले की अनदेखी कर रहे हैं. यह परोक्ष रूप से इस घोटाले को राजनीतिक संरक्षण देने जैसा है. ऐसे में इस राज्य के युवाओं और नागरिकों की जिम्मेदारी है कि राज्य की इस घोटालेबाजों की सरकार और इसकी चहेती नौकरशाही के खिलाफ लामबंद हों।

अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष आनंद सिंह नेगी ने कहा कि, अखिल भारतीय किसान महासभा ने उत्तराखंड सरकार को पांचवीं विधानसभा के प्रथम और द्वितीय सत्र में किसानों को जल जंगल जमीन खेती किसानी पशुपालन से बेदखल करने वाले सभी जनविरोधी कानूनों को रद्द करने का प्रस्ताव लाने की मांग मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर की थी जिसकी प्रतिलिपियां क्षेत्रीय विधायकों को भी विधानसभा में पेश करने के लिए दी गई थी । परन्तु हमारी निर्वाचित सरकार और हमारे निर्वाचित विधायकों ने इन जनपक्षीय मांगों को नजर अंदाज कर दिया । इसलिए अब हमें संकल्प लेकर बड़ी जनगोलबन्दी के साथ राज्यव्यापी किसान आंदोलन की ओर बढ़ना होगा।

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सम्मेलन से उत्तराखंड में छोटी जोत वाले निम्न मध्यम, लघु सीमांत किसानों के साथ ही भूमिहीन व बटाईदार किसानों, वन ग्रामों में रहने वाले किसानों, खत्तावासियों, पशुपालकों को संगठित कर किसानों की समस्याओं, मूलभूत सुविधाओं, नागरिक अधिकारों और शासक वर्ग की किसान – जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए संकल्प लिया गया।
खासतौर पर किसानों पशुपालकों के हितों की रक्षा के लिये गौरक्षा कानून की समाप्ति के लिए आंदोलनात्मक पहलकदमी, बिन्दुखत्ता को राजस्व गांव बनाए जाने के संघर्ष को तेज करने, खत्तावासियों व गुर्जरों को मूलभूत सुविधाएं और नागरिक अधिकारों को उपलब्ध कराने, बिन्दुखत्ता में बिजली कनेक्शन के लिए दोहरा मापदंड अपनाने के खिलाफ और सभी को बिजली पोल की व्यवस्था के लिए, गौला नदी पर स्थायी तटबंध के लिए, सेंचुरी पेपर मिल के प्रदूषण से जनता को निजात दिलाने के लिए संघर्ष किसान महासभा की मुख्य प्राथमिकता रहेगी।
सम्मेलन के दूसरे सत्र में किसान महासभा की नयी जिला कमेटी का चुनाव किया गया जिसने सर्वसम्मति से जिलाध्यक्ष विमला रौथाण, पांच उपाध्यक्ष बशीर, नैन सिंह कोरंगा, पान सिंह, गुलाम मुस्तफा, मोहम्मद शफी, जिला सचिव कामरेड भुवन जोशी, उपसचिव चंदन राम, कोषाध्यक्ष निर्मला शाही व कार्यकारिणी सदस्य के रूप में आनंद सिंह सिजवाली, ओमप्रकाश, पान सिंह बिष्ट, प्रताप राम, दीवान राम को चुना गया।
कार्यकारिणी सदस्यों व पदाधिकारियों के अतिरिक्त 51 सदस्यीय जिला कमेटी में वरिष्ठ नेता बहादुर सिंह जंगी, गुलाम नबी, गणेश दत्त पाठक, नीमा मेहरा, हयात राम, बचन सिंह, नवीन मेहरा, बिशन दत्त जोशी, यासीन, मोहम्मद शरीफ, सुशीला, इमाम, मोहम्मद यूसुफ, हरीश भंडारी, शमशेर अली, प्रेम सिंह राणा, प्रताप राम, वजीर अली, ललित जोशी, पुष्कर दुबड़िया, हसन, कमल जोशी, इनाम अली, नारायण सिंह, प्रमोद कुमार, इरफान, त्रिलोक राम, आनंद सिंह दानू को चुना गया.

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इनके अलावा सम्मेलन में डॉ कैलाश पांडेय, ललित मटियाली, किशन बघरी, मदन धामी,किशन सिंह जग्गी, आनंद गोपाल बिष्ट, आलमगीर, धीरज कुमार, दीप पाठक, चन्द्रशेखर जोशी, पार्वती जग्गी, गंगा सिंह, सरिता जंगी, नीमा कोरंगा, मनोज जोशी, मनोहर शाह, शिव सिंह, चंदन सिंह, सरस्वती जीना, मनोज शाह, गुलाम रसूल, दीपक सिंह, बीना जग्गी, जानकी, देवकी, राजेन्द्र शाह, भावना, दुर्गा, राजेन्द्र सिंह, नंदी देवी, प्रीति, दीपा, आशीष, धन सिंह, हिमांशु बिष्ट, राहुल बिष्ट, मधु, चंद्रकला, आनंद लोटिया, नीरज, हीरा सिंह, जगत सिंह, जगदीश सिंह आदि बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे।
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