जनता इंटर कॉलेज लालकुआं में पर्यावरण संरक्षण संगोष्ठी, पौधरोपण के साथ जल संरक्षण और पॉलीथीन प्रदूषण रोकने का दिया संदेश

समाचार सच, लालकुआं।
पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी केवल सरकार या सामाजिक संगठनों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें प्रत्येक नागरिक की भागीदारी जरूरी है। खासकर विद्यार्थियों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाकर भविष्य को सुरक्षित किया जा सकता है। इसी सोच के साथ पूर्व जिला आयुर्वेद अधिकारी एवं पर्यावरणविद् डॉ. आशुतोष पन्त ने पर्यावरण जागरूकता अभियान को स्कूलों और कॉलेजों तक पहुंचाने की पहल तेज करने का संकल्प लिया है।
इसी क्रम में जनता इंटर कॉलेज, लालकुआं में विद्यार्थियों के बीच पर्यावरण संरक्षण संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें बच्चों को पेड़-पौधों के महत्व, जल संरक्षण, प्लास्टिक एवं पॉलीथीन से होने वाले प्रदूषण और प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने के विषय में जागरूक किया गया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को घरों में लगाने के लिए अमरूद और नींबू के पौधे भी भेंट किए गए, ताकि पर्यावरण संरक्षण का संदेश केवल भाषणों तक सीमित न रहकर बच्चों के दैनिक जीवन का हिस्सा बन सके।
जुलाई से शुरू अभियान अब नए चरण में
डॉ. आशुतोष पन्त ने कहा कि जुलाई से लगातार चलाया जा रहा वृक्षारोपण अभियान अब समापन की ओर है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण की मुहिम आगे भी जारी रहेगी। उनका अगला लक्ष्य अधिक से अधिक विद्यालयों और महाविद्यालयों तक पहुंचकर विद्यार्थियों को प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।
उन्होंने कहा कि आज लगाए गए पौधे आने वाले वर्षों में छाया, स्वच्छ हवा और बेहतर पर्यावरण का आधार बनेंगे। लेकिन केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है, उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण भी उतना ही जरूरी है। यदि प्रत्येक विद्यार्थी अपने घर में एक पौधा लगाकर उसकी जिम्मेदारी ले, तो सामूहिक रूप से बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
डॉ. पन्त के अनुसार, बच्चे देश का भविष्य हैं। उनमें अभी से पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित की जाए, तो वे अपने परिवारों और आसपास के लोगों को भी जागरूक कर सकते हैं। इस प्रकार स्कूलों से शुरू होने वाली छोटी-छोटी पहल व्यापक जनजागरूकता का रूप ले सकती है।
जल संरक्षण और पॉलीथीन प्रदूषण पर भी जोर
संगोष्ठी में विद्यार्थियों को बताया गया कि पर्यावरण संरक्षण के लिए पेड़ लगाना जितना जरूरी है, उतना ही महत्वपूर्ण पानी की प्रत्येक बूंद को बचाना और प्लास्टिक प्रदूषण को कम करना भी है। जल का अनावश्यक उपयोग रोकने, वर्षा जल संरक्षण को बढ़ावा देने और सिंगल यूज प्लास्टिक व पॉलीथीन का इस्तेमाल कम करने जैसे कदम प्रकृति को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
डॉ. पन्त ने विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का संदेश दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पर्यावरण बचाने के लिए बड़े संसाधनों से ज्यादा जरूरी लोगों की जागरूकता, इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास हैं।
गणमान्य लोगों ने विद्यार्थियों से किया संवाद
कार्यक्रम में पूर्व अपर सचिव श्री जीवन चंद्र उप्रेती, पूर्व सैनिक कैप्टन सुंदर सिंह खनका, विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री हरीश दानू और दिव्यांग समिति के श्री संतोष कश्यप ने भी विद्यार्थियों से संवाद किया। वक्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए बच्चों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने और अपने स्तर पर सकारात्मक पहल करने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर विद्यार्थियों को अमरूद और नींबू के पौधे वितरित किए गए, जिन्हें वे अपने घरों में लगा सकें। पौधों की व्यवस्था में पूर्व अपर सचिव श्री जीवन चंद्र उप्रेती ने विशेष सहयोग दिया। इस पहल के माध्यम से बच्चों को पौधरोपण के साथ उनकी देखभाल करने की जिम्मेदारी का संदेश भी दिया गया।
सहयोगियों और शिक्षकों के प्रति जताया आभार
डॉ. आशुतोष पन्त ने कार्यक्रम में सहयोग देने वाले सभी अतिथियों, शिक्षकों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से श्री जीवन चंद्र उप्रेती द्वारा पौधे उपलब्ध कराने में दिए गए सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण अभियान को सफल बनाने के लिए समाज के हर वर्ग का सहयोग आवश्यक है।
उन्होंने विश्वास जताया कि विद्यार्थियों के बीच लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने से पर्यावरण संरक्षण की भावना मजबूत होगी और आने वाली पीढ़ियां प्रकृति के प्रति अधिक जिम्मेदार बनेंगी।

सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -
👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें
👉 फेसबुक पर जुड़ने हेतु पेज़ लाइक करें
👉 यूट्यूब चैनल सबस्क्राइब करें
हमसे संपर्क करने/विज्ञापन देने हेतु संपर्क करें - +91 70170 85440


