समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। हिंदू धर्म में सूर्य को जीवन और ऊर्जा का स्रोत माना गया है। यही कारण है कि प्रतिदिन सूर्य को जल अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है। लेकिन जब सूर्य ग्रहण लगता है, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरूरी माना जाता है। सूर्य ग्रहण का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी बेहद खास होता है। एक ओर जहां खगोल विज्ञान से जुड़े लोग इस खगोलीय घटना का अध्ययन करते हैं, वहीं आस्था रखने वाले लोग परंपरागत नियमों का ध्यान रखते हैं।
साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण फरवरी महीने में पड़ने वाला है। इस दौरान कुछ कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण से पहले सूतक काल शुरू हो जाता है, जिसमें पूजा-पाठ और शुभ कार्यों को वर्जित माना जाता है। हालांकि इस ग्रहण में सूतक काल को लेकर स्थिति कुछ अलग रहने वाली है।
2026 का पहला सूर्य ग्रहण कब लगेगा?
वर्ष 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी, मंगलवार को लगेगा। यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसमें सूर्य पूरी तरह ढंका हुआ नजर नहीं आएगा, बल्कि उसके चारों ओर प्रकाश का एक छल्ला दिखाई देगा। यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसे अफ्रीका, अमेरिका के कुछ हिस्सों और अंटार्कटिका में देखा जा सकेगा। भारतीय समय के अनुसार यह ग्रहण सुबह 5रू31 बजे से 7रू57 बजे तक रहेगा। चूंकि यह भारत में दृश्य नहीं होगा, इसलिए सूतक काल मान्य नहीं होगा और पूजा-पाठ या मांगलिक कार्यों पर कोई रोक नहीं रहेगी।
सूर्य ग्रहण के दौरान किन बातों से बचें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण को बिना सुरक्षा के नंगी आंखों से देखना नुकसानदायक हो सकता है। ग्रहण काल में भोजन पकाने और खाने से परहेज करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा इस समय पूजा-पाठ करना भी वर्जित माना गया है। मान्यता यह भी है कि गर्भवती महिलाओं को सूर्य ग्रहण के दौरान घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए और विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।



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