23 मई से 22 जून तक रहेगा ज्येष्ठ माह, भूलकर भी न करें ये काम

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। हिंदू पंचांग के अनुसार 23 मई से जेठ का महीना शुरू हो रहा है। इसे ज्येष्ठ या फिर जेठ भी कहा जाता है। सनातन परंपरा में जेठ के महीने का अधिक महत्व माना गया है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार साल की शुरुआत चौत्र महीने से होती है, जबकि साल का तीसरा महीना ज्येष्ठ का होता है। ज्येष्ठ का महीना 23 मई से प्रारंभ होकर 22 जून तक चलेगा। धार्मिक दृष्टि से ये महीना विशेष स्थान रखता है।

इस महीने में उत्तर भारत समेत तमाम क्षेत्रों में अधिक गर्मी पड़ती है और इस माह में कई तीज-त्योहार और पर्व आते हैं। इस माह में हर महीने में पड़ने वाली एकादशी, प्रदोष, पूर्णिमा, नारद जयंती, शीतलाष्टमी, वट सावित्री व्रत, गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी जैसे प्रमुख व्रत और त्योहार पड़ते हैं।

जेठ के इस महीने का पुण्य फल पाने के लिए व्यक्ति को इसमें क्या करना और क्या नहीं करना चाहिए। शास्त्रों के मुताबिक, ज्येष्ठ मास में ये काम करने से शारीरिक, मानसिक और आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

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बिल्कुल न करें ये काम

  • पंचांग के अनुसार जेठ महीने में दिन में नहीं सोना चाहिए। ऐसा करने वाले व्यक्ति को तमाम तरह के रोग घेरते हैं।
  • ज्येष्ठ के महीने मसालेदार चीज का सेवन नहीं करना चाहिए और दिन में एक बार भोजन करने का प्रयास करना चाहिए।
  • लहसुन, राई के अलावा गर्म चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए। क्योंकि इस माह में सबसे अधिक गर्मी होती है।
  • इस माह में बैंगन का सेवन करने से बचना चाहिए। क्योंकि इसका सेवन करने से संतान के लिए शुभ नहीं माना जाता है।
  • जेठ के महीने में कभी किसी प्यासे व्यक्ति को बगैर पानी पिलाए नहीं भेजना चाहिए।
  • हिंदू मान्यता के अनुसार जेठ के महीने में परिवार में बड़े पुत्र या फिर पुत्री का विवाह नहीं करना चाहिए।
  • ज्येष्ठ माह में गर्मी पड़ती है और शरीर में जल स्तर गिरने लगता है। इस माह जल का सही इस्तेमाल करना चाहिए और बेकार में जल का व्यर्थ करने से बचना चाहिए।

ज्येष्ठ मास सभी मास में शुभ
शास्त्रों में ज्येष्ठ मास को सभी मास में शुभ माना गया है। ज्येष्ठ के स्वामी मंगल है और मंगल ग्रह को ज्योतिष शास्त्र में साहस का प्रतीक माना गया है। सभी नवग्रहों में मंगल को सेनापति का दर्जा प्राप्त है। ज्येष्ठ मास भगवान विष्णु का प्रिय मास है। इस मास में भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। भगवान विष्णु और उनके चरणों से निकलने वाली मां गंगा और पवनपुत्र हनुमान की पूजा का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है। हिंदू धर्म में ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले मंगलवार को बड़ा मंगल या फिर बुढ़वा मंगल के नाम से जाना जाता है। ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले चार बड़ा मंगल की पूजा करने पर व्यक्ति को मनचाहा फल प्राप्त होता है।

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जल का दान सबसे श्रेष्ठ
ज्येष्ठ मास में सबसे ज्याद गर्मी पड़ती है। इस महीने में जल का दान पुण्यदान माना गया है। इस माह में न सिर्फ आम लोगों को बल्कि पशु-पक्षियों की प्यास बुझाने के लिए जल उपलब्ध कराना चाहिए। इससे भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। जीवन में आने वाले कष्ट दूर होते हैं। ज्येष्ठ मास में प्याऊ लगाना, नल लगवाना और पोखर, तलाबों का सरंक्षण करना विशेष फलदायी माना गया है।

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