समाचार सच, हल्द्वानी। पिछले पांच वर्षों में दलितों, आदिवासियों के खिलाफ मोदी सरकार की भावना हमारे संविधान पर हमला है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार अधिनियम 1989 को कमजोर करना किसी गहरे पूर्वाग्रह का परिणाम है।
उक्त बात रविवार को यहां प्रदेश की नेता प्रतिपक्ष डॉ इंदिरा हृदयेश ने पत्रकारों के समक्ष रखी। उनका कहना था कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति अधिनियम को कमजोर करने की चाल को समझते हुए कांग्रेस ने भाजपा के गलत इरादों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि भाजपा शासित प्रदेश राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश ने कमजोर किये गये इस अधिनियम को लागू करने का प्रयास करते हुए इस अधिनियम को लागू न करने पर अधिकारियों को दंडात्मक कार्यवाही भुगतने की धमकी भी दी गई। जिसके फलस्वरूप इन तीनों राज्यों की जनता ने भाजपा को सत्ता से बाहर कर दिया। साथ ही इन राज्यों की नयी कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद इस अधिनियम को पुनः मजबूत किया। उन्होंने बताया कि इस मामले में पांच भाजपा सांसदों ने भी भाजपा शासन में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के प्रति हो रहे व्यवहार पर पत्र लिखकर अपनी पीड़ा व्यक्त की।
वार्ता में उन्होंने बताया कि राजनीतिक उदासीनता, सामाजिक उत्पीड़न, आर्थिक लापरवाही, कमजोर वर्ग के अधिकारों का उल्लंघन, अन्याय, सामाजिक विभाजन व शांति एवं सद्भाव को खत्म करना 5 वर्षों में केंद्र की भाजपा सरकार का ट्रेडमार्क रहा है। जिसके चलते भाजपा सरकार ने अनुसूचित जाति, जनजाति के सब प्लान को समाप्त कर दिया। साथ ही दलितों के लिए छात्रवृत्ति व नौकरियों के लिए आर्थिक सहायता वाली कांग्रेस द्वारा लागू की गई अम्ब्रेला स्कीम में भारी कटौती कर दी गई है। इस वित्तीय वर्ष के अनुमानित व्यय में इसे 30 प्रतिशत कम कर दिया गया है। दलित छात्रों के लिए उच्च शिक्षा में केंद्रीय छात्रवृत्ति के बजट में पिछले वर्ष की तुलना में कटौती की गई है। अनुसूचित जाति की सरकारी नौकरियों में 91 प्रतिशत तक की कमी आई है। अनुसूचित जाति की नौकरियों का बैकलॉग 31 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इस कारण देश की जनता भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों को खारिज कर रही है और अब जनता भाजपा की सरकार को सत्ता से बाहर करने का मन बना चुकी है।
वार्ता में मुख्य रूप से कांग्रेस जिलाध्यक्ष सतीश नैनवाल, शहर अध्यक्ष राहुल छिम्वाल, पूर्व पालिकाध्यक्ष हेमंत बगड्वाल, गोविन्द बिष्ट सहित आदि कांग्रेसजन मौजूद थे।



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