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योगासन करते समय इन सावधानियों को जरूर बरतें वर्ना होगा नुकसान

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समाचार सच. स्वास्थ्य डेस्क। पिछले कुछ समय से पूरी दुनिया में योग का डंका बज रहा है। आज लोग गंभीर से गंभीर बीमारियों का इलाज योग के जरिए तलाश रहे हैं। योग न सिर्फ बीमारियों के इलाज में सार्थक भूमिका निभा रहा है, अपितु हेल्दी लाइफ जीने में भी मददगार साबित हो रहा है। लेकिन यह सब तभी संभव है, जब योगासनों का अभ्यास सही तरह से किया जाए। अक्सर लोग योगासन करते समय कुछ महत्वपूर्ण गलतियां कर बैठते हैं, जिसके कारण उन्हें फायदा कम और नुकसान ज्यादा भुगतना पड़ता है। तो चलिए जानते हैं ऐसी ही कुछ गलतियों के बारे में.
झटके से आसन का अभ्यास
अक्सर देखने में आता है कि जब भी व्यक्ति किसी योगासन का अभ्यास करता है तो उसे एकदम झटके से करता है। मसलन, अधिकतर आसनों में व्यक्ति झटके से उठता, बैठता व लेटता है। ऐसा करने से शरीर में झटका आने की संभावना अधिक रहती है। इसके अतिरिक्त कई बार चोट भी लग सकती है।
नजरअंदाज न करें होल्डिंग
किसी भी आसन की रिपीटेशन से ज्यादा जरूरी होता है, उस पाश्चर को लंबे समय तक बरकरार रखना। जब किसी भी योगासन पाश्चर में शरीर को होल्ड किया जाता है तो उससे संबंधित भाग मजबूत बनता है और बेहतर रिजल्ट देखने को मिलते हैं। जबकि बार.बार और जल्दी.जल्दी रिपीटेशन करने से लाभ के स्थान पर हानि होती है।
कपड़ों पर ध्यान
योग के दौरान जितना महत्व पाश्चर के सही होने का है, उतना ही जरूरी है कि आप योगाभ्यास के दौरान अपने कपड़ों पर भी ध्यान दें। अगर योगासन करते समय आपके कपड़े आरामदायक नहीं होंगे तो इससे आसनों के अभ्यास में तो परेशानी होगी ही, साथ ही शरीर के विभिन्न भागों में दर्द की शिकायत भी हो सकती है।
कठिन आसनों का अभ्यास
कुछ लोग बेहतर रिजल्ट पाने के चक्कर में शुरूआती दौर में कठिन आसनों का अभ्यास करना शुरू कर देते हैं। जबकि वास्तव में ऐसा नहीं करना चाहिए। अगर आपने अभी.अभी योगाभ्यास शुरू किया है, तो शुरूआत में आसान आसन ही करें। जब धीरे.धीरे बॉडी फ्लेक्सिबल हो जाए तो कठिन आसन करना शुरू करें। इसके अतिरिक्त प्रांरभ में किसी योग विशेषज्ञ की देख.रेख में ही अभ्यास करें। इससे लाभ भी अधिक होगा और चोटिल होने की संभावना भी न के बराबर होगी। एक बात का हमेशा ध्यान रखें कि किसी भी योगासन का अभ्यास करते समय ब्रीदिंग व पाश्चर पर खासतौर पर ध्यान दें। अन्यथा आपकी सारी मेहनत यूं ही बेकार चली जाएगी।

नियमित योग से पाएं ये 6 बेहतरीन लाभ

  1. नियमित योग करने से शरीर के सभी अंग सुचारु रूप से कार्य करते हैं।
  2. योग के विभिन्न आसनों से शरीर के अलग-अलग हिस्सों को फायदा पहुंचता है। योग में शरीर के हर छोटे से छोटे अंग का व्यायाम होता है। और आपका शरीर लचीला बनता है या कह लें कि शरीर की फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है।
    मनोयोग से कीजिए योग
  3. छोटे बच्चे से लेकर बुजुर्ग व्यक्ति तक कोई भी योग के आसन कर सकता है। जब तक नियमित योग करेंगे, तब तक इसके लाभ मिलते रहेंगे। किसी कारणवश जब नहीं भी कर पाएं तब भी इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं होते हैं। आपको केवल इतना ध्यान रखना है कि आपको यदि शरीर के किसी हिस्से में पहले से कोई परेशानी है, तब ऐसा कोई आसन न करें, जो कि किसी भी प्रकार से परेशानी वाले हिस्से को प्रभावित करता हो।
  4. योग के कई आसन ऐसे भी हैं, जो किसी परेशानीग्रस्त हिस्से को ठीक कर देते हैं, लेकिन ऐसे आसन आप योग विशेषज्ञ की सलाह व देखरेख में ही करें।
  5. योग आपको तन के अलावा मन की भी शांति देता है। योग के कई आसन व ध्यान आपके विचारों को नियंत्रित कर संतुलित कर देते हैं जिससे मन शांत रहने लगता है।
    योग से खत्म होती है मनुष्य के अन्दर की नकारात्मकता
  6. सफल जीवन जीने के लिए शरीर को सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शक्ति की जरूरत होती है, जो हमें योग से ही मिलती है।
    योग क्या है, योग के लाभ, नियम, प्रकार और आसन
    योग क्या है?
    योग सही तरह से जीने का विज्ञान है और इस लिए इसे दैनिक जीवन में शामिल किया जाना चाहिए। यह हमारे जीवन से जुड़े भौतिक, मानसिक, भावनात्मक, आत्मिक और आध्यात्मिक, आदि सभी पहलुओं पर काम करता है। योग का अर्थ एकता या बांधना है। इस शब्द की जड़ है संस्कृत शब्द युज, जिसका मतलब है जुड़ना। आध्यात्मिक स्तर पर इस जुड़ने का अर्थ है सार्वभौमिक चेतना के साथ व्यक्तिगत चेतना का एक होना। व्यावहारिक स्तर पर, योग शरीर, मन और भावनाओं को संतुलित करने और तालमेल बनाने का एक साधन है। यह योग या एकता आसन, प्राणायाम, मुद्रा, बँध, षट्कर्म और ध्यान के अभ्यास के माध्यम से प्राप्त होती है। तो योग जीने का एक तरीका भी है और अपने आप में परम उद्देश्य भी।
    योग सबसे पहले लाभ पहुँचाता है बाहरी शरीर ;फिज़िकल बाडीद्ध को, जो ज्यादातर लोगों के लिए एक व्यावहारिक और परिचित शुरुआती जगह है। जब इस स्तर पर असंतुलन का अनुभव होता है, तो अंग, मांसपेशियां और नसें सद्भाव में काम नहीं करते हैं, बल्कि वे एक-दूसरे के विरोध में कार्य करते हैं।
    बाहरी शरीर ;फिज़िकल बाडीद्ध के बाद योग मानसिक और भावनात्मक स्तरों पर काम करता है। रोज़मर्रा की जिंदगी के तनाव और बातचीत के परिणामस्वरूप बहुत से लोग अनेक मानसिक परेशानियों से पीड़ित रहते हैं। योग इनका इलाज शायद तुरंत नहीं प्रदान करता लेकिन इनसे मुकाबला करने के लिए यह सि( विधि है।
    पिछली सदी में, हठ योग (जो की योग का सिर्फ़ एक प्रकार है) बहुत प्रसिद्ध और प्रचलित हो गया था। लेकिन योग के सही मतलब और संपूर्ण ज्ञान के बारे में जागरूकता अब लगातार बढ़ रही है।
    योग के लाभ
    शारीरिक और मानसिक उपचार योग के सबसे अधिक ज्ञात लाभों में से एक है। यह इतना शक्तिशाली और प्रभावी इसलिए है क्योंकि यह सद्भाव और एकीकरण के सि(ांतों पर काम करता है।
    योग अस्थमा, मधुमेह, रक्तचाप, गठिया, पाचन विकार और अन्य बीमारियों में चिकित्सा के एक सफल विकल्प है, ख़ास तौर से वहाँ जहाँ आधुनिक विज्ञान आजतक उपचार देने में सफल नहीं हुआ है। एचआईवी पर योग के प्रभावों पर अनुसंधान वर्तमान में आशाजनक परिणामों के साथ चल रहा है। चिकित्सा वैज्ञानिकों के अनुसार, योग चिकित्सा तंत्रिका और अंतःस्रावी तंत्र में बनाए गए संतुलन के कारण सफल होती है जो शरीर के अन्य सभी प्रणालियों और अंगों को सीधे प्रभावित करती है। अधिकांश लोगों के लिए, हालांकि, योग केवल तनावपूर्ण समाज में स्वास्थ्य बनाए रखने का मुख्य साधन हैं। योग बुरी आदतों के प्रभावों को उलट देता है, जैसे कि सारे दिन कुर्सी पर बैठे रहना, मोबाइल फोन को ज़्यादा इस्तेमाल करना, व्यायाम ना करना, ग़लत ख़ान-पान रखना इत्यादि।
    इनके अलावा योग के कई आध्यात्मिक लाभ भी हैं। इनका विवरण करना आसान नहीं है, क्योंकि यह आपको स्वयं योग अभ्यास करके हासिल और फिर महसूस करने पड़ेंगे। हर व्यक्ति को योग अलग रूप से लाभ पहुँचाता है। तो योग को अवश्य अपनायें और अपनी मानसिक, भौतिक, आत्मिक और अध्यात्मिक सेहत में सुधार लायें।
    योग के नियम
    अगर आप यह कुछ सरल नियमों का पालन करेंगे, तो अवश्य योग अभ्यास का पूरा लाभ पाएँगे
    किसी गुरु के निर्देशन में योग अभ्यास शुरू करें।
    सूर्याेदय या सूर्यास्त के वक्त योग का सही समय है।
    योग करने से पहले स्नान जरूर करें।
    योग खाली पेट करें। योग करने से 2 घंटे पहले कुछ ना खायें।
    आरामदायक सूती कपड़े पहनें।
    तन की तरह मन भी स्वच्छ होना चाहिए – योग करने से पहले सब बुरे ख्याल दिमाग से निकाल दें।
    किसी शांत वातावरण और साफ जगह में योग अभ्यास करें।
    अपना पूरा ध्यान अपने योग अभ्यास पर ही केंद्रित रखें।
    योग अभ्यास धैर्य और दृढ़ता से करें।
    अपने शरीर के साथ ज़बरदस्ती बिल्कुल ना करें।
    धीरज रखें। योग के लाभ महसूस होने मे वक्त लगता है।
    निरंतर योग अभ्यास जारी रखें।
    योग करने के 30 मिनिट बाद तक कुछ ना खायें। 1 घंटे तक न नहायें।
    प्राणायाम हमेशा आसन अभ्यास करने के बाद करें।
    अगर कोई मेडिकल तकलीफ हो तो पहले डाक्टर से ज़रूर सलाह करें।
    अगर तकलीफ़ बढ़ने लगे या कोई नई तकलीफ हो जाए तो तुरंत योग अभ्यास रोक दें।
    योगाभ्यास के अंत में हमेशा शवासन करें।

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