हल्द्वानी के तीन परिवारों में पसरा मातम, दोस्त से मिलने निकला बेटा अब कभी घर नहीं लौटेगा, तीनपानी हादसे ने छीन ली तीन जिंदगियां

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समाचार सच, हल्द्वानी डेस्क।
उम्र महज 16 से 17 साल, आंखों में सुनहरे भविष्य के सपने और जिंदगी में आगे बढ़ने की तमन्ना। कोई इंजीनियर बनकर अपने परिवार का नाम रोशन करना चाहता था, तो किसी के घरवालों ने उसकी कामयाबी के लिए कई उम्मीदें संजो रखी थीं। लेकिन किसे पता था कि दोस्तों के साथ बिताया जाने वाला एक सफर तीन परिवारों की जिंदगी में कभी न भरने वाला खालीपन छोड़ जाएगा। हल्द्वानी के तीनपानी फ्लाईओवर पर शुक्रवार को हुए भीषण सड़क हादसे में जान गंवाने वाले तीन किशोरों की मौत से शहर में शोक का माहौल है। हादसे में घायल चौथी किशोरी का उपचार जारी है।

यह दुर्घटना केवल एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि उन परिवारों की उम्मीदों के टूटने की दर्दनाक कहानी है, जिन्होंने अपने बच्चों के भविष्य के लिए सपने देखे थे। शुक्रवार, 23 अक्टूबर को दोपहर करीब 3:25 बजे तीनपानी फ्लाईओवर पर एक फोर्ड फिगो कार अनियंत्रित होकर कई बार पलटी और डिवाइडर से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे में उत्कर्ष धपोला (16) और सिद्धांत पाठक (16) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल प्रांजल मावड़ी (17) ने शनिवार को उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। कार में सवार भाविका (16) गंभीर रूप से घायल है और अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है।

दोस्त से मिलने निकला था सिद्धांत, घर में रह गईं उसकी यादें
इस हादसे से जुड़ी सबसे भावुक बात यह है कि सिद्धांत पाठक शुक्रवार को अपनी मां पुष्पलता पाठक से दोस्त उत्कर्ष धपोला से मिलने जाने की बात कहकर घर से निकला था। मां को क्या मालूम था कि बेटे के साथ हुई वह बातचीत उसकी जिंदगी की आखिरी यादों में से एक बन जाएगी। जिस बेटे के लौटने का इंतजार था, उसके बजाय घर में दुख और सन्नाटा छा गया।

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सिद्धांत और उत्कर्ष साथ में कोचिंग करते थे। दोनों का सपना जेईई परीक्षा पास कर इंजीनियर बनने का था। पढ़ाई और भविष्य की तैयारियों के बीच उनकी दोस्ती प्रांजल और भाविका से हुई। चारों किशोरों के बीच दोस्ती थी और जिंदगी में आगे बढ़ने की उम्मीदें भी। लेकिन तीनपानी फ्लाईओवर पर हुआ हादसा तीन परिवारों के लिए ऐसा दर्द छोड़ गया, जिसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं है।

बेटे के बेहतर भविष्य के लिए हल्द्वानी आया था परिवार
उत्कर्ष धपोला के परिवार ने भी बेटे के भविष्य को लेकर कई सपने संजोए थे। उसके पिता शैलेंद्र ने हाल ही में नई कार खरीदी थी। करीब एक साल पहले बागेश्वर से हल्द्वानी आकर बसे इस परिवार को उम्मीद थी कि यहां रहकर बेटा पढ़ाई करेगा और जीवन में आगे बढ़ेगा। मगर परिवार की खुशियों के बीच अचानक ऐसा दुख आ गया, जिसने सब कुछ बदल दिया।

वहीं, प्रांजल मावड़ी के परिवार की उम्मीदें भी उससे जुड़ी थीं। उसके पिता भीमताल में प्रोफेसर हैं, जबकि बड़ा भाई भारतीय वायुसेना में सेवाएं दे रहा है। परिवार को प्रांजल से भी भविष्य में बड़ी उपलब्धियों की आस थी। शनिवार को इलाज के दौरान उसकी मौत की खबर ने इन उम्मीदों को भी गहरे सदमे में बदल दिया।

तेज रफ्तार और एक गलत ओवरटेक बना हादसे की वजह
पुलिस के अनुसार, कार बाईपास रोड पर गोलापुल की ओर से लालकुआं की तरफ जा रही थी। तीनपानी फ्लाईओवर पर चालक ने तेज गति में दूसरी कार को ओवरटेक करने का प्रयास किया। इसी दौरान वाहन से नियंत्रण खो गया। कार कई बार पलटने के बाद डिवाइडर से जा टकराई और उसमें सवार किशोर गंभीर रूप से घायल हो गए।

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हादसे की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने अस्पताल पहुंचकर घायलों के उपचार की जानकारी ली और उनका हाल जाना। पुलिस मामले में वैधानिक कार्रवाई कर रही है। एसएसपी ने वाहन चालकों से निर्धारित गति सीमा का पालन करने, जल्दबाजी में ओवरटेक करने से बचने और सड़क पर सावधानी बरतने की अपील की है।

तीनपानी फ्लाईओवर पर पहले भी उजड़ चुके हैं कई परिवार
हल्द्वानी के तीनपानी क्षेत्र में हुआ यह हादसा सड़क सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करता है। इसी ओवरब्रिज पर 11 जुलाई को भी एक दर्दनाक दुर्घटना हुई थी। उस दौरान चार युवक सड़क किनारे स्कूटी खड़ी कर आपस में बातचीत कर रहे थे, तभी एक स्कॉर्पियो ने उन्हें टक्कर मार दी थी। उस हादसे में चारों युवकों की मौत हो गई थी।

लगातार सामने आ रहे ऐसे हादसे बताते हैं कि सड़क पर की गई छोटी-सी लापरवाही भी कई परिवारों की जिंदगी बदल सकती है। तीनपानी फ्लाईओवर पर तीन किशोरों की मौत ने एक बार फिर याद दिलाया है कि तेज रफ्तार और जोखिम भरे ओवरटेक का खामियाजा केवल वाहन चलाने वाले को ही नहीं, बल्कि उसके साथ सफर कर रहे लोगों और उनके पूरे परिवार को भुगतना पड़ सकता है।

जिन बच्चों को अभी अपने सपनों की उड़ान भरनी थी, वे हमेशा के लिए परिवारों की यादों में सिमट गए। तीन घरों में अब उन कदमों की आहट नहीं लौटेगी, जिनका इंतजार हर शाम किया जाता था। इस दर्दनाक हादसे के बाद एक संदेश बेहद जरूरी है—सड़क पर कुछ मिनट बचाने की जल्दबाजी, जिंदगी भर का पछतावा बन सकती है।

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