समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। हमारे देश में आदि काल से मस्तक पर तिलक लगाने की प्रथा है। अतिथि का स्वागत हो या कोई धार्मिक कृत्य राज्याभिषेक हो या विवाहए माथे पर तिलक लगाना परंपरा रही है। तिलक की सामग्री उसका रंगए उसका आकार.प्रकार कुछ न कुछ विशिष्टता दर्शाता है।
आध्यात्मिक के साथ वैज्ञानिक नजरिये से देखें तो मस्तिष्क शरीर का सबसे संवेदनशील भाग हैए जो सूचनातंत्र का काम करता है। यहां पीयूष ग्रंथि होती हैए जो कई प्रकार के हार्माेन बनाती है। दोनों भृकुटियों के मध्य आज्ञा चक्र भी होता है। यहां से ही ज्ञान चेतना और कार्य चेतना का नियंत्रण होता है। भगवान शिव के चित्रों में इस भाग को तीसरे नेत्र के रूप में चित्रित किया जाता है। मान्यता है कि माथे पर चंदनए हल्दी जैसी चीजों का लेप व तिलक लगाने से विभिन्न रसायनों का स्राव संतुलित होता है और मन शांत होता है। ज्योतिष की लाल किताब में गुरु ग्रह को ठीक करने के उपायों में केसर का तिलक लगाने का सुझाव दिया गया है। जिनकी जन्म पत्री में बृहस्पति दूसरे या बारहवें भाव में स्थित हो उन्हें प्रतिदिन या 27 दिनों तक माथे पर केसर का टीका या लेप लगाना चाहिए। इससे स्मरण शक्ति और तेज बढ़ता है। इससे गुरु उच्च होता है जो विद्या ज्ञान बुद्धि का परिचायक है। माथे पर चंदन केसर के अलावा कस्तूरी अष्टगंध यज्ञ भस्म दही व चावल लाल रौली आदि का टीका भी लगाया जाता है।
यज्ञ भस्म माथे पर लगाना भी शुभ माना गया है। ज्योतिष में उपाय के तौर पर गायत्री हवन की भस्म को नियमित माथे पर लगाने का सुझाव दिया जाता है। वस्तुतः यह भस्म संक्रामक कीटाणुओं को समाप्त करने में सक्षम होती है। लाल चंदन या रौली का टीका प्रायः युद्ध में प्रस्थान करते समय लगाया जाता था। लाल रंग गर्म और ऊर्जाकारक होता है। यह जोश दिलाता है। जिन जातकों का मंगल ग्रह जन्म कुंडली में कमजोर हैए शारीरिक शक्ति का हृास हो रहा हो साहस बल जीवन शक्ति क्षीण हो चुकी होए ऐसे जातक यदि लाल चंदन का टीका लगाएं तो अवश्य लाभ होगा। इसके विपरीत यदि जन्मांग में मंगल ग्रह बहुत तेज होए उच्च बली या मूल त्रिकोण राशि में होए लग्न या आठवें भाव में होए उन्हें क्रोध कम करने के लिए सफेद चंदन अथवा दही चावल का टीका नियमित लगाना चाहिए। इसका आयुर्वेदिक कारण भी हैए ज्योतिषीय भी है और कलर थेरेपी का वैज्ञानिक कारण भी है।
किस दिन कौन सा तिलक लगाएंए इस विषय पर भी ज्योतिष मार्गदर्शन करता है
सोमवार: यह दिन भगवान शंकर का है और इस वार का स्वामी ग्रह है चंद्रमा। चंद्रमा मन का कारक ग्रह माना गया है। मन को काबू में रखकर मस्तिष्क को शीतल और शांत बनाए रखने के लिए आप सफेद चंदन का तिलक लगाएं। इस दिन विभूति या भस्म भी लगा सकते हैं।
मंगलवार: इसे हनुमानजी का दिन माना गया है। इस दिन का स्वामी ग्रह मंगल है। मंगल लाल रंग का प्रतिनिधित्व करता है। इस दिन लाल चंदन या चमेली के तेल में घुले हुए सिंदूर का तिलक लगाने से ऊर्जा और कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। इससे मन की उदासी और निराशा हट जाती है और दिन शुभ बनता है।
बुधवार: इसे मां दुर्गा और भगवान गणेश का दिन माना गया है। इस दिन का स्वामी ग्रह है बुध। इस दिन सूखे सिंदूर (जिसमें कोई तेल न मिला हो) का तिलक लगाना चाहिए। इस तिलक से बौद्धिक क्षमता तेज होती है और दिन शुभ रहता है।
गुरुवार: इस दिन के खास देवता हैं ब्रह्मा और स्वामी ग्रह है बृहस्पतिए जिन्हें देवताओं का गुरु माना गया है। गुरु को पीला या सफेद मिश्रित पीला रंग प्रिय है। इस दिन सफेद चंदन की लकड़ी को पत्थर पर घिसकर उसमें केसर मिलाकर लेप या टीका माथे पर लगाना चाहिए। हल्दी का तिलक भी लगा सकते हैं। इससे मन में
पवित्र और सकारात्मक विचार का उद्भव होगाए जिससे दिन भी शुभ रहेगा और आर्थिक परेशानी का हल भी निकलेगा।
शुक्रवार: यह दिन भगवान विष्णु की पत्नी लक्ष्मीजी का है। इस दिन का स्वामी ग्रह शुक्र है। इस ग्रह को दैत्यराज भी कहा जाता है। दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य थे। इस दिन लाल चंदन लगाने से जहां तनाव दूर रहता हैए वहीं भौतिक सुख.सुविधाओं में भी वृद्धि होती है। इस दिन सिंदूर का टीका भी लगा सकते हैं।
शनिवार: इसे भैरव शनि और यमराज का दिन माना जाता है। इस दिन का स्वामी ग्रह शनि है। इस दिन विभूतए भस्म या लाल चंदन लगाना चाहिएए जिससे भैरव महाराज प्रसन्न रहते हैं और किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होने देते।
रविवार: यह भगवान विष्णु और सूर्य का दिन है। इसका स्वामी है ग्रहों के राजा सूर्य। इस दिन लाल चंदन या हरि चंदन का तिलक लगाएं। भगवान विष्णु की कृपा रहने से जहां मान.सम्मान बढ़ता हैए वहीं निर्भयता भी आती है।
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