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जिस दिन के लिए हम हैं वह दिन आज ही तो आया है…

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समाचार सच, हल्द्वानी। गार्डसमैन कृपाल दत्त का जन्म जनपद अल्मोड़ा के कोसी स्थित कनोली गांव में स्वर्गीय श्री कांति बल्लभ तथा श्रीमती मानुली देवी के यहां दिनांक 4 दिसंबर 1941 को हुआ। मेजर बी एस रौतेला ने बताया कि पारिवारिक स्थिति अच्छी ना होने के कारण उनकी शिक्षा-दीक्षा ठीक से नहीं हो पाई। कुछ समय बाद ही वे कुमाऊँ रेजीमेंट में भर्ती हो गए। बाद में उन्हें ब्रिगेड ऑफ गार्डस में स्थानांतरित कर दिया गया। नवंबर 1971 में गार्डसमैन कृपाल दत्त अवकाश पर घर आए ही हुए थे कि उन्हें पलटन से बुलावा आ गया। गांव के सभी लोगों ने उन्हें कुछ ना कुछ बहाना बनाकर इसे टालने की सलाह दी। लेकिन उन्होंने कहा कि “जिस दिन के लिए हम हैं वह दिन आज ही तो आया है।” उन्होंने अपनी पत्नी, परिवार को समझाया और दूसरे ही दिन वे पल्टन को चल दिए। उनकी वीर नारी सरस्वती देवी जी ने बताया कि जिस दिन उन्हें बुलावे का तार आया उस दिन वे पूरी रात सो नहीं सके और जल्दी रात खुलने, जल्दी जाने की बात करते रहे। शायद उन्हें एहसास हो गया था कि युद्ध क्षेत्र से अब वे वापस ना आ पाएं। अगले दिन सुबह वे चल पड़े और पूरा गांव उन्हें स्टेशन तक छोड़ने गया। कुछ ही दिनों बाद उनकी शहादत का तार भी आ गया। उस समय मेरी उम्र 21 वर्ष और बेटे की उम्र मात्र 2 वर्ष थी। सेना के जवान आए और उन्होंने मेरी सासूमाँ से कहा कि क्या आप आधी पेंशन लेंगे? तो उन्होंने कहा कि इसे ₹140 की पेंशन मिलेगी। यदि उसमें से भी आधी मैं ले लूंगी तो ये अपने बच्चों को कैसे पालेगी। उन्होंने पूरी पेंशन मेरे नाम करवा दी। श्रीमती सरस्वती देवी कहती हैं कि पिछले 35-36 वर्षों से हल्द्वानी में रह रहे हैं। सरकार द्वारा देय सभी सुविधाएं मिल रही हैं। बस पूरी जिंदगी ऐसे ही निकाल दी कहते-कहते रो पड़ी।

समाचार सच परिवार गार्डसमैन कृपाल दत्त की शहादत को सलाम करता है और उनको नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

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