समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। चैत्र पूर्णिमा बेहद शुभ तिथि मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु, शिव-पार्वती और चंद्र देव की पूजा होती है। कहते हैं इस पूर्णिमा का व्रत रखने से जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति होती है। यहां आप जानेंगे चैत्र पूर्णिमा की पूजा विधि और मुहूर्त।
1 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा का व्रत रखा जाएगा तो वहीं 2 अप्रैल को स्नान-दान का शुभ मुहूर्त रहेगा। ये पूर्णिमा इसलिए भी खास है क्योंकि इस दिन भगवान हनुमान का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है। कहते हैं पूर्णिमा तिथि पर चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है, ऐसे में इस दिन चंद्र देव की पूजा करने से विशेष शुभ फलों की प्राप्ति होती है। चलिए अब जानते हैं चैत्र पूर्णिमा की पूजा विधि और मुहूर्त क्या है।
चैत्र पूर्णिमा शुभ मुहूर्त 2026
चैत्र पूर्णिमा के दिन पहला शुभ मुहूर्त सुबह 06.11 से 09.18 बजे तक रहेगा। दूसरा शुभ मुहूर्त सुबह 10.52 से दोपहर 12.25 बजे तक, तीसरा मुहूर्त शाम 05.05 से 06.39 बजे तक और चौथा मुहूर्त रात 08.05 से 09.32 बजे तक रहेगा।
चैत्र पूर्णिमा पूजा विधि
- चैत्र पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान के बाद सबसे पहले हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लेना होता है।
- इसके बाद भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप की पूजा की जाती है।
- उन्हें पीले फूल, फल, पंचामृत और तुलसी दल जरूर करें।
- विधि विधान से पूजा करने के बाद भगवान सत्यनारायण की कथा भी जरूर सुनें।
- इसके बाद आरती करें और भोग लगाएं।
- इस दिन हनुमान जी की पूजा भी जरूर करनी चाहिए क्योंकि इस दिन हनुमान भगवान का जन्मोत्सव भी होता है। इसके लिए हनुमान जी को चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर चोला चढ़ाएं। साथ ही हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें।
- शाम में पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं।
- रात में जब चंद्रमा दिखने लगें तो दूध मिले जल से चंद्रमा को अर्घ्य दें और धूप दिखाएं। इसके बाद अपना व्रत खोल लें।
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