समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। रिसर्च की मानें तो 15 से 40 प्रतिशत लोग किसी भी क्षण वर्टिगो और डिजिनेस से पीड़ित होते है, जिसमें 70 प्रतिशत संख्या महिलाओं की होती है। यह समस्या ज्यादातर 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगो में देखने को मिलती है।
वर्टिगो अटैक के कारण जहां कुछ लोगों को चक्कर आते हैं तो वहीं कुछ मस्तिष्क में पीड़ा अनुभव करते हैं। आंखो के सामने अंधेरा छा जाता है और लगता है मानो सारी धरती घूम रही हो।
क्यों आता है वर्टिगो अटैक?
यह समस्या तब होती है जब व्यक्ति को कान, मस्तिष्क व तंत्रिका मार्ग में कोई बाधा रहती है। मेडिकल भाषा में इसे एक्रोफोबिया भा कहा जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, वर्टिगो अटैक लंबे समय तक रहता व थोड़ी देर भी रह सकता है।
वर्टिगो के प्रकार
वर्टिगो की दो श्रेणियां हैं : पेरिफेरल वर्टिगो और सेंट्रल वर्टिगो
- पेरिफेरल वर्टिगो आंतरिक कान या वेस्टिबुलर तंत्रिका की समस्या के परिणामस्वरूप होता है। वेस्टिबुलर तंत्रिका आंतरिक कान को मस्तिष्क से जोड़ती है।
- सेंट्रल वर्टिगो तब होता है जब दिमाग में कोई समस्या होती है। कारणों में स्ट्रोक, दर्दनाक मस्तिष्क की चोट, संक्रमण, ब्रेन ट्यूमर या मल्टीपल स्केलेरोसिस शामिल हो सकते हैं।
वर्टिगो अटैक के लक्षण
- अधिक आवाज आने से सिरदर्द
- चक्कर आना
- अधिक पसीना आना
- जी मचलना, उल्टी होना
- बहुत अधिक कमजोरी महसूस होना
- अस्थिर या असंतुलित महसूस होना
- कम सुनाई देना या कान से सीटी जैसी आवाज आना
- गिरने का एहसास होना
वर्टिगो का इलाज क्या है? - सामान्य वर्टिगो इलाज में इलाज की जरूरत नहीं पड़ती बल्कि रोगी खुद ब खुद ठीक हो जाता है. इस दौरान मरीज को आराम करने की सलाह दी जाती है. हालांकि अगर स्थिति गंभीर हो तो डॉक्टर कुछ एंटीबायोटिक दवाइयां देते हैं।
- सिकनेस, जी मिचलाने व सिरदर्द के लिए डॉक्टर एंटी-इमिटिक्स या एंटी-हिस्टामाइन जैसे दवाएं देते हैं।
- तनाव के कारण चक्कर आने की स्थिति में मरीज को चिकिस्तक मनोचिकित्सा थेरेपी दी जाती है.
किन लोगों को अधिक खतरा?
यह समस्या ज्यादातर 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगो में देखने को मिलती है लेकिन तनावभरी जिंदगी के कारण लोग कम उम्र में भी इसका शिकार हो रहे हैं। रिसर्च की मानें तो 15 से 40 प्रतिशत लोग किसी भी क्षण वर्टिगो और डिजिनेस से पीड़ित होते है, जिसमें 70 प्रतिशत संख्या महिलाओं की होती है।



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