आंवला ही नहीं इसकी गुठली के भी हैं कई फायदे, पानी के साथ पीसकर लेने से दूर होता है महिलाओं का ये रोग

खबर शेयर करें

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। आयुर्वेद में आंवले को एक दिव्य औषधि माना गया है। विटामिन-सी से भरपूर आंवले के फल के साथ-साथ उसका बीज भी काफी फायदेमंद होता है। यह लगभग 20 बीमारियों से बचाव में मददगार है।

Ad

जिस तरह बीमारियों से लड़ने के लिए रोजाना एक सेब खाने की सलाह दी जाती है। उसी तरह आयुर्वेद में भी रोजाना एक आंवले के सेवन से 20 से ज्यादा बीमारियों में बचाव की बात कही गई है। आंवला में विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट की भरपूर मात्रा होती है। इसके अलावा इसमें पोटैशियम, कैल्शियम, कैरोटीन, कार्बाेहाइड्रेट, आयरन, फाइबर, प्रोटीन, विटामिन एबी कॉम्प्लेक्स, मैग्नीशियम, मिनरल्स, पॉलीफेनोल और डाययूरटिक एसिड पाए जाते हैं।

आंवले के फल, फूल, बीज, पत्ते, छाल और जड़ों का इस्तेमाल औषधीय रूप में किया जाता है। यह आंखों, बालों और त्वचा के लिए काफी फायदेमंद है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं आंवले के बीज (गुठली) किन-किन बीमारियों में फायदेमंद हैं।

नाक से खून बहने या नकसीर में फायेदमंद
नाक से खून बहने यानी नकसीर फूटने पर बहते खून को रोकने के लिए आंवले के बीजों को घी में तल लें। फिर इसे थोड़े से पानी के साथ पीस लें। इस पेस्ट को माथे पर लेप की तरह लगाएं।

यह भी पढ़ें -   हल्द्वानी में पुलिस ने 2 लाख 80 हजार की अवैध देसी शराब जब्त की, एक गिरफ्तार

आंखों की समस्या में देता है आराम
आंवले के बीजों का इस्तेमाल आंखों की समस्या दूर करने के लिए भी किया जाता है। आंखों में खुजली, जलन, लालिमा की शिकायत होने पर आंवले के बीज को पीसकर आंखों के ऊपर और नीचे लगाने से फायदा मिलता है। इसके अलावा एक- दो बूंद आंवले का रस आंख में डालने से आंख के दर्द में भी आराम मिलता है।

पित्त की पथरी की समस्या में कारगर
‘एशियन पेसिफिक जर्नल ऑफ ट्रॉपिकल डिजीज’ द्वारा किए गए एक रघ्सिर्च के मुताबघ्कि, पित्त, किडनी (गुर्दे) और मूत्राशय में पथरी की समस्या होने पर आंवले के बीज का चूर्ण का सेवन करना फायदेमंद होता है। यूरीनेशन में पथरी के कारण होने वाली जलन को कम करने में भी इसके बीज का चूर्ण का सेवन, आंवला जूस पीने और आंवला खाने से फायदा मिलता है।

यह भी पढ़ें -   डीआईजी भरणे ने मासिक अपराध गोष्ठी के दौरान दिये यह निर्देश…

ल्यूकोरिया की समस्या से दिलाता है छुटकारा
आचार्य बालकृष्ण के अनुसार, ल्यूकोरिया को ठीक करने के लिए इसके सूखे बीजों को कुचलकर बनाया गया चूर्ण सप्ताह में दो बार लेने से काफी फायदा मिलता है। इसके अलावा 3 आंवले के बीज लेकर उसे 6 ग्राम पानी के साथ पीस लें। फिर इसे एक गिलास पानी में अच्छी तरह मिला लें। अब इसे छानकर इसमें 1 छोटा चम्मच शहद और थोड़ी-सी मिश्री मिलाएं। इसे दिन में एक बार पिएं। कुछ ही दिनों में श्वेतप्रदर यानी ल्यूकोरिया की समस्या से छुटकारा मिल जाता है।

त्वचा संबंधी समस्याओं में फायदेमंद
आंवले की गुठली के चूर्ण के प्रयोग से दाद-खाज या खुजली की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। आंवले की गुठली का पाउडर बनाकर इसमें नारियल तेल मिलाकर रख लें। शरीर के जिस हिस्से में इंफेक्शन हो, वहां इसे लगाएं, कुछ ही दिनों में समस्या दूर हो जाएगी। दूसरा तरीका है- आंवले के बीज को जलाकर भस्म बना लें। अब इस पाउडर में शुद्ध नारियल तेल मिलाकर शीशी में भर लें। गीली या सूखी किसी भी प्रकार की खुजली पर लगाने से काफी आराम मिलता है।

यह भी पढ़ें -   14 जनवरी को उत्तराखण्ड में कोरोना अपडेट्स, जानिए किस जिले में कितने केस आये…

धातु रोग में मिलता है बेहतर फायदा
आंवले के बीज वीर्यवर्द्धक होते हैं। आंवले के 10 ग्राम बीज को धूप में सुखा लें। फिर इसे पीसकर चूर्ण बना लें। अब इसमें 20 ग्राम मिश्री पाउडर मिलाकर रख लें। सुबह खाली पेट 1 गिलास पानी में एक चम्मच पाउडर मिलाकर 15 दिन तक लगातार सेवन करें। इससे स्वप्नदोष, शुक्रमेह जैसी बेहतर फायदा मिलते है।

बुखार और पित्त को दूर करने में है मददगार
आयुर्वेद के अनुसार, आंवले के बीज बुखार और पित्त को दूर करने में कारगर हैं। इसमें प्यास को शांत करने के गुण होते हैं। यह खांसी में भी काफी फायदा पहुंचाता है और शरीर में पानी को दूर करके ठंडक देता है। इसमें मौजूद तत्व हमारी इम्यूनिटी को बढ़ाने के साथ फेफड़ों को प्रदूषण से बचाने में भी मदद करते हैं।

Ad

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *