समाचार सच, नैनीताल डेस्क। स्विट्जरलैंड के रहने वाले बेंजामिन वियात्ते, जिन्हें दुनिया ‘वॉकिंग बाबा’ के नाम से जानती है, ने नैनीताल में अपनी 10 साल की पैदल यात्रा के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि किस तरह लगातार पैदल चलकर उन्होंने प्रकृति को करीब से समझने और उसके साथ जुड़ने का प्रयास किया। इस दौरान उन्होंने प्रकृति को मां के समान बताते हुए लोगों से पर्यावरण की रक्षा करने और स्वच्छता को जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की।
नैनीताल में शुक्रवार को हिमालयन इकोज के 11वें संस्करण का शुभारंभ हुआ। 30 और 31 अक्टूबर को एबॉट्सफोर्ड एस्टेट में आयोजित इस दो दिवसीय उत्सव में देश-विदेश के लेखक, कलाकार, विचारक और पर्यावरणविद हिस्सा ले रहे हैं। साहित्य, कला, हिमालयी संस्कृति और पर्यावरण से जुड़े विभिन्न विषयों पर आयोजित संवाद के बीच वॉकिंग बाबा का सत्र आकर्षण का केंद्र रहा।
बेंजामिन वियात्ते ने अपनी यात्रा के अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने करीब 10 साल पहले पैदल चलना शुरू किया था। इस यात्रा के माध्यम से उन्होंने प्रकृति को समझने और उसके करीब पहुंचने का प्रयास किया। इसी अनोखे सफर के कारण उन्हें वॉकिंग बाबा के नाम से पहचान मिली।
उन्होंने कहा कि जिस तरह हम दूसरे लोगों का सम्मान करते हैं, उसी तरह प्रकृति का सम्मान करना भी जरूरी है। प्रकृति केवल हमारे आसपास मौजूद पेड़-पौधों और पहाड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन का आधार है। इसलिए इसके संरक्षण की जिम्मेदारी प्रत्येक व्यक्ति को समझनी चाहिए।
वॉकिंग बाबा ने स्वच्छता का महत्व समझाते हुए कहा कि यदि हम अपने शरीर की साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखते, तो बीमार पड़ सकते हैं। ठीक इसी तरह जब हम अपने आसपास के वातावरण को गंदा करते हैं, तो इसका नुकसान पूरी दुनिया को उठाना पड़ता है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि खाने-पीने की वस्तुओं का इस्तेमाल करने के बाद कूड़ा इधर-उधर न फेंकें। छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाकर पर्यावरण को स्वच्छ और सुरक्षित बनाया जा सकता है।
बेंजामिन वियात्ते ने कहा कि प्रकृति हमारी मां के समान है और जिस तरह मां का सम्मान किया जाता है, उसी तरह प्रकृति की देखभाल करना भी हमारा कर्तव्य है। उन्होंने अपने देश स्विट्जरलैंड का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के लोगों ने स्वच्छता के महत्व को समझा है। यही वजह है कि देश की खूबसूरती और साफ-सफाई की दुनिया भर में पहचान है।
उन्होंने बताया कि अपनी लंबी यात्रा के दौरान उन्हें ऐसे लोग भी मिले, जो प्रकृति से बेहद प्यार करते हैं, जबकि कुछ लोग पर्यावरण से दूरी बनाए रखते हैं। आज दुनिया को ऐसे लोगों की अधिक जरूरत है, जो प्रकृति को समझें, उससे प्रेम करें और उसकी रक्षा के लिए आगे आएं।
वॉकिंग बाबा ने भारत और स्विट्जरलैंड की विशेषताओं का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में आध्यात्मिकता और प्रकृति से जुड़ाव की गहरी परंपरा है, जबकि स्विट्जरलैंड में स्वच्छता को विशेष महत्व दिया जाता है। दोनों देशों में अपनी-अपनी खूबियां हैं और कुछ ऐसे पहलू भी हैं, जिनसे एक-दूसरे को सीखने की जरूरत है।
हिमालयन इकोज के 11वें संस्करण में हिमालयी क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और पर्वतीय समुदायों की चुनौतियों पर चर्चा की जा रही है। इस आयोजन का उद्देश्य साहित्य और कला के माध्यम से हिमालय की पहचान, परंपराओं और पर्यावरणीय समस्याओं को व्यापक मंच प्रदान करना है।
दो दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे प्रतिभागी अपने विचार और अनुभव साझा कर रहे हैं। वॉकिंग बाबा का संदेश भी इसी उद्देश्य से जुड़ा रहा कि प्रकृति की रक्षा केवल सरकारों या पर्यावरणविदों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर व्यक्ति का कर्तव्य है।

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