अरमान बिटिया के…

खबर शेयर करें


काश मैं बिटिया के अरमानों को पूरा कर पाता,
पापा ये होता, वो होता, ऐसा होता, वैसा होता।
बिटिया के ख्वाहिशों को पंख लगा पाता,
काश मैं बिटिया के अरमानों को पूरा कर पाता।
झूठी आशा देकर मैं थकता जा रहा हूं।
बिटिया से नजर नहीं मिला पा रहा हूं,
कल-कल कर मैं झूठा बन चुका हूं।
उसके अरमानों का मैं खून कर चुका हूं।
काश मैं उसके अरमानों को पूरा कर पाता।
धीरज भट्ट
हल्द्वानी।

यह भी पढ़ें -   षट्तिला एकादशी पर भगवान विष्णु के लिए व्रत-पूजा की जाती है
Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad

सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -

👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें

👉 फेसबुक पर जुड़ने हेतु पेज़ लाइक करें

👉 यूट्यूब चैनल सबस्क्राइब करें

हमसे संपर्क करने/विज्ञापन देने हेतु संपर्क करें - +91 70170 85440