अरमान बिटिया के…

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काश मैं बिटिया के अरमानों को पूरा कर पाता,
पापा ये होता, वो होता, ऐसा होता, वैसा होता।
बिटिया के ख्वाहिशों को पंख लगा पाता,
काश मैं बिटिया के अरमानों को पूरा कर पाता।
झूठी आशा देकर मैं थकता जा रहा हूं।
बिटिया से नजर नहीं मिला पा रहा हूं,
कल-कल कर मैं झूठा बन चुका हूं।
उसके अरमानों का मैं खून कर चुका हूं।
काश मैं उसके अरमानों को पूरा कर पाता।
धीरज भट्ट
हल्द्वानी।

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