मातृ दिवस पर अशोक चक्र विजेता शहीद मोहन नाथ गोस्वामी की माँ के आंखों से रूक नहीं रहे हैं आंसू ….

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-शहीद माँ से किये गये वायदों को सरकार ने नहीं किया पूरा

समाचार सच, हल्द्वानी। आज पूरे विश्व में एक तरफ जहां मदर्स डे मनाया जा रहा है वहीं दूसरी ओर हमारे देश के उत्तराखंड के नैनीताल जनपद ग्राम बिन्दुखत्ता में रहने वाली शहीद मोहन नाथ गोस्वामी की माँ के आंखों से आंसू रुक नहीं रहे हैं। उनकी माँ का रोते रोते ये कहना है कि मेरे जीते जी अगर उसके नाम से मिनी स्टेडियम बन जाता और एक स्कूल को नाम दे दिया जाता तो मेरे दिल को बहुत सुकून मिलता।
उनका ये भी कहना था कि मेरा दर्द ये है अब तो राह ही देखती रहती हूं कि कोई मेरे बेटे के बारे में दो बोल बोले। पहले तो शहीद दिवस पर कुछ लोग आ जाते थे, लेकिन अब तो कोई खैर-खबर तक लेने नहीं आता। गौरतलब है कि चार वर्ष पूर्व कांग्रेस शासित प्रदेश के मुखिया हरीश रावत द्वारा शहीद की माँ को घर पर आकर ये आश्वासन दिया गया था कि आपके शहीद बेटे के नाम पर आपके घर के नजदीक एक मिनी स्टेडियम बनाया जाएगा और एक स्कूल का नाम भी उनके बेटे के नाम पर रखा जाएगा।

समाचार सच आपको यह अवगत कराना चाहता है कि शासन ने मिनी स्टेडियम हेतु 12.5 एकड़ जमीन बिन्दुखत्ता ग्राम में चयनित कर ली है और इस भूमि पर मिनी स्टेडियम बनाने के लिये वन विभाग के नियमानुसार बागेश्वर में वृक्षारोपण भी कर दिया गया है। इसका शिलान्यास भी हो चुका था। साथ ही इस कार्य के लिए पहले चरण के 10 लाख रुपये स्वीकृत हो चुके हैं। राज्य में भाजपा सरकार काबिज होने के बाद ये मामला ठंडे बस्ते में चला गया है। वर्तमान में अब स्वीकृत मिनी स्टेडियम शासन-प्रशासन की उदासीनता के चलते हुए कूड़ा घर में तब्दील होने लगा है।

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शहीद माँ का दर्द: मैं हार्ट और शुगर की बीमारी से पीड़ित हूँ। अगर मेरे जीते जी सरकार द्वारा किये गए वायदे पूरे हो जाते तो मेरी आत्मा को तृप्ति मिल जाती। उनका मानना है कि अगर उक्त वायदे पूरे हो जाते तो यह एक प्रेरणादायक कार्य होता।

शंभूनाथ गोस्वामी (शहीद का बड़ा भाई): शंभू नाथ ने भाई के बारे में बताते हुए कहा कि उनके भाई की शहादत वो कभी भूल नहीं सकते। आने वाली पीढ़ियों को भी उनकी वीरता की कहानी सुनाते रहेंगे। शहीद अनुज मुझे और मेरे परिवार को हमेशा याद रहेंगे।

शांति काल का सबसे बड़ा वीरता पुरस्कार “अशोक चक्र” जीतने वाला लालकुआं का लाल…
अशोक चक्र विजेता लांस नायक मोहन नाथ गोस्वामी का जन्म लालकुआं के इंदिरा नगर गांव में हुआ । उनके पिताजी ने भी फौज में रहकर देश की सेवा की थी । उनकी प्रारंभिक शिक्षा लालकुआं के ही विभिन्न स्कूलों से हुई । उनके भाई श्री संभू नाथ गोस्वामी ने बताया कि उनके अंदर फौज में भर्ती होने का जबरदस्त जुनून और जज्बा था । इस दौरान वे भर्ती में कई बार असफल हुए । इस कठिन वक़्त में भी उनकी माता जी ने उन्हें न केवल ढाढस बंधाया बल्कि उन्हें निरंतर प्रयास करने के लिए भी प्रेरित किया । अंततः उनकी मेहनत कामयाब हुई और वे सेना की 9th पैरा स्पेशल फ़ोर्स में भर्ती हो गए ।

एक कमांडो जिसने 11 दिनों में 10 आतंकियों का किया सफाया…
2-3 सितंबर 2015 की रात सेना की एक टुकड़ी ने कुपवाड़ा के हंदवाड़ा के जंगल में आतंकियों को घेरा । आतंकियों और जवानों के बीच जबरदस्त मुठभेड़ हुई । कमांडो गोस्वामी आतंकियों पर टूट पड़े और उन्होंने 2 आतंकियों को तुरंत ढेर कर दिया । इसी बीच उनके तीन साथियों को भी गोली लगी । उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बगैर तीनों साथियों को सुरक्षित बाहर निकाला । इसके बाद उनके साथियों ने 2 और आतंकियों को मार गिराया । एक गोली उनकी जाँघ में और एक गोली उनके पीठ पर लगी और 3 सितंबर 2015 को वे वीरगति को प्राप्त हुए । उन्होंने 11 दिनों में 10 आतंकियों का सफाया करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । इस असाधारण वीरता और अदम्य साहस के लिए उन्हें मरणोपरांत भारत सरकार द्वारा अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।

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जानिए क्यों मौत भी काँपती है पैरा कमाण्डो को देखकर…

भारतीय सेना की सबसे खतरनाक यूनिट्स में से एक।
मोटो – “Men apart, every men an emperor”
विश्व की सबसे लंबी और सबसे मुश्किल चुनाव प्रक्रिया। 90-95% सैनिक बीच में ही छोड़ देते हैं ट्रेनिंग।
केवल पैरा कमांडोज़ को ही होती है दाढ़ी रखने की इजाज़त।
“रेड डेविल्स’’ और “दाढ़ी वाले फौजी” के नाम से मशहूर हैं देश के दुश्मनों के बीच। जिससे वे आसानी से आम जनता के बीच में रहकर भी अपने ऑपरेशन्स को दे सकते हैं अंजाम।
केवल पैरा कमांडोज़ ही पहन सकते हैं बलिदान बैज।
कांच चबाकर खाने के बाद ही मिलती है मैरून बैरेट।
कई युद्धों में लिया है भाग और बहुत से स्पेशल ऑपरेशन्स को किया है सफलतापूर्वक पूरा – 1971 भारत-पाक युद्ध, 1999 कारगिल युद्ध, ऑपेरशन ब्लू स्टार, ऑपेरेशन खुखरी।
158 अतंकियों को म्यांमार में घुस के 40 मिनट में किया था बर्बाद।
29 सितम्बर 2016 को पाकिस्तान में घुसकर की थी सर्जीकल स्ट्राइक।

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