ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार, अलग-अलग प्रकार के चीजों से तिलक लगाने से अशुभ ग्रहों का असर दूर होता है

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According to astrology, applying tilak with different types of things removes the effect of inauspicious planets.

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। सनातन धर्म में तिलक लगाने का एक बहुत ही बड़ा महत्व बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि ललाट यानी माथे पर तिलक लगाने से व्यक्ति का आज्ञाचक्र जागृत होता है। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार, अलग-अलग प्रकार के चीजों से तिलक लगाने से अशुभ ग्रहों का असर दूर होता है। वैदिक परंपरा में तरह-तरह के सामग्रियों का उपयोग कर तिलक लगाने के लिए किया जाता है। लेकिन इस बात पर निर्भर करता है कि वह व्यक्ति किस अनुयायी की है। और आपका उद्देश्य क्या है। अगर आप गृहस्थ हैं तो तिलक अलग अलग प्रकार के लगाया जाता है, और सन्यासियों के लिए अलग प्रकार का तिलक होता है। तो आइए जानते हैं इस संबंध में विस्तार से जानते हैं।

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जानें किन चीजों से लगाया जाता है तिलक

शास्त्रों के अनुसार, तिलक लगाने के लिए कई प्रकार की सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है। तिलक लगाने के उद्देश्य देवी-देवताओं और भक्तों के उद्देश्य पर निर्भर करता है।

चंदन का तिलक

शास्त्रों में चंदन के तिलक लगाना सर्वाेत्तम माना गया है। लेकिन अलग-अलग देवताओं के लिए अलग रंग के चंदन का प्रयोग किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि मां भगवती की आराधना में लाल चंदन, विष्णु भगवान की आराधना के लिए पीले चंदन और भगवान शिव के आराधना के लिए श्वेद चंदन का प्रयोग किया जाता है।

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कुमकुम का तिलक

कुमकुम एक रोली जैसी ही एक पाउडर होता है। कुंकुम को सभी देवी-देवताओं की पूजा-पाठ के लिए किया जाता है। इसके साथ ही सामान्य पूजा-पाठ के लिए भी प्रयोग किया जाता है।

अष्टगंध का तिलक

अष्टगंध का तिल आठ अलग-अलग पदार्थों से मिलकर बना होता है। इसमें आमतौर पर चंदन, केसर, हल्दी, घी, दूध, गोबर, बिल्वपत्र और जटामांसी से बना होता है। इस तिलक का प्रयोग भगवान शिव और देवी के आराधक करते हैं।

तिलक के प्रकार

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अलग-अलग सम्प्रदायों के श्रद्धालु अलग-अलग तरह के तिलक लगाते हैं। जैसे की भगवान विष्णु के उपासक श्रीवत्स के आकार का तिलक लगाते हैं तो वहीं भगवान शिव के उपासक त्रिपुंड का तिलक लगाते हैं। इसके साथ ही देवी के उपासक ललाट पर गोल बिंदी लगाते हैं।

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