आयुर्वेद चिकित्सा: माइग्रेन दर्द

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समाचार सच. स्वास्थ्य डेस्क। आज के तनाव भरे जीवन में, भागमभाग और असंयमित जीवनशैली तथा असंमयित चिन्तन, दिनचर्या के कारण माइग्रेन या सिरदर्द को रोग होता है।
आयुर्वेद मतानुसार पित्त तथा वात दोष से प्रकुपित होने के कारण सिरदर्द (माइग्रेन) होता है इसे आमभाषा में आधाशीशी का दर्द भी कहते हैं। अनुचित आहार-विहार के कारण पाचन तंत्र प्रभावित होता है जिससे कब्ज, गैस, एसीडिटी आदि लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं जो वात दोष को प्रकुपित करके आधे सिर में या पूरे सिर में वेदना उत्पन्न करता है, कभी – कभी दर्द के साथ-साथ उल्टी (वमन) के लक्षण भी पाए जाते हैं। इसे माइग्रेन या सिरदर्द कहते हैं।
आयुर्वेद उपचार से यह रोग समूल नष्ट हो जाता है। इसके लिए रोगी को अपनी जीवनशैली, आहार-विहार एवं चेष्टा को बदलने की नितांत आवश्यकता है।

  1. आहार – विहार एवं दिनचर्या में प्रातःकाल सूर्योदय से पहले जग जाएं। आलस्य त्याग दें। प्रातः उठकर 8 अंजुली जल बैठकर पीना चाहिए। इसके बाद दैनिक कर्म करें। पेट साफ होना चाहिए कब्ज नहीं रहतनी चाहिए। सुबह टहलने जाएं। स्नान से पहले सरसों के तेल की मालिश करें। सरसों का तेल पांच बूद दोनों नाक में डालकर ऊपर खींचे या बादाम का तेल 5 बूंद दोनों नाक के छिद्रों द्वारा से ऊपर खींचकर नस्य लें यह नस्य कर्म 40 दिन सुबह व रात नियमित करें। स्नान के बाद दैनिक पूजा पाठ प्राणायाम, योग, ध्यान योग 30 मिनट तक नियमित आजीवन करें।
  2. सुबह के नाश्ते में अंकुरित मंग की दाल, किशमिश मिलाकर खाएं। कोई फल अमरूद, सेब, चीकू लें। एक कटोरी हरी सब्जी – बथुआ, मेथी, पालक, धनिया, लौकी आदि लें। दलिया, साबूदाना, भुने चने, बादाम 5, पिस्ता 5 अखरोट 5 लें। गाय का दूध एक गिलास, आधा चम्मच हल्दी डालकर लें। यदि आपको पित्त (एसीडिटी) उल्टी की शिकायत हो तो आपको 1 गिलास फ्रिज का रखा बिल्कुल ठंडा दूध सुबह खाली पेट लेना चाहिए।
  3. नाश्ता व खाना निश्चित समय पर करें। भोजन करने के 30 मिनट पहले और भोजन के 30 मिनट बाद खूब पानी पीना चाहिए। भोजन में दाल, रोटी, सब्जी, सलाद, सूप, मट्ठा का सेवन करें। मांसाहार या अण्डा कभी नहीं खाना चाहिए। सायंकाल 4-5 बजे, फल, दूध, सूप, भुने चने आदि का सेवन करें। रात का भोजन हल्का सु पाच्य और कम से कम खाना चाहिए। यदि आपको मोटापा है तो रात का भोजन त्याग दो। 1 गिलास गरम दूध पीना चाहिए।
  4. मानसिक स्वास्थ्य के लिए मन – सरल स्वाभाव, तनाव रहित, संयमित चिन्तन हो। योग, ध्यान, प्राणायाम करें। शरीर के लिए सादा भोजन करें, साद रहन – सहन हो और संयमित दिनचर्या होनी चाहिए रात देर तक न जागें, जल्दी सोएं और सूर्योदय से पहले उठ जाएं।
  5. मानसिक स्वास्थ्य के लिए मन – सरल स्वाभाव, तनाव रहित, संयमित चिन्तन हो। योग, ध्यान, प्राणायाम करें। शरीर के लिए सादा भोजन करें, सादा रहन – सहन हो और संयमित दिनचर्या होनी चाहिए रात देर तक न जागें, जल्दी सोएं और सूर्योदय से पहले उठ जाएं।
  6. सर्वप्रथम गोदन्ती भस्म से 3 से 5 ग्राम की एकमात्रा सुबह खाली पेट शहद में मिलाकर सेवन करें।
  7. सुबह एवं रात में नाक में बादाम का तेल या सरसों का तेल अथवा देसी घी 5 – 5 बूंद डालें।
    आयुर्वेद की शास्त्रोक्त औषधी
    शिरशूलादि वज्ररस की 2-2 गोली एवं आमलकी रसायन 5 ग्राम तथा अग्नितुण्डी वटी 2 गोली मिलाकर पानी से 2 गोली मिलाकर पानी से 2 बार नियमित 40 दिन से तीन माह तक सेवन किया जाए तो माइग्रेन या सिरदर्द जड़मूल से समाप्त हो जाता है। यह सिद्ध किया हुआ रामबाण नुस्खा है।
    जीवनशैली बदले, तनाव रहित मन रखने का प्रयास करें, पेट ठीक रखें और औषधी का सेवन करें, रोग से मुक्ति पाएं।
    माइग्रेन नाशक
    षड़बिन्दु घृत: मुलैठी, वायविडंग, भृंगराज, सौंठ प्रत्येक 30 ग्राम लेकर पानी के साथ पीसकर क्वाथ बना लें। गोघृत 500 ग्राम, बकरी का दूध 2 लीटर लें। सब द्रव्यों को एक कलईदार कढ़ाही में डालकर मन्द आंच पर पकायं। जब घी मात्र शेष रह जाये तो उतारकर छानकर रखना। इसकी नस्य लेने से हर प्रकार का सिरदर्द दूर होता है।
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