चीन की दोहरी नीति से सावधान रहना होगा

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। इसे भारत वर्ष का दुर्भाय कहें या काल सर्प योग का दुष्परिणाम या जन्मपत्री में गुरू का छठे भाव में स्थित होना, मजबूत विरासत में जन्म लेकर धर्म को किसी देश में अपमानित होना पड़ रहा है। विदेशी षड्यंत्र जनमानस का भाषावाद, क्षेत्रवाद, जातिवाद में उलझकर स्वयं को हानि पहुंचाना आदि विषमताओं से राष्ट्र को निकलना पड़ रहा है एवं हानि उठानी पड़ रही है। एक ओर चीन की विस्तारवादी नीति तो दूसरी और पाकिस्तान की धोखा नीति से देश को दो-दो चार होना पड़ रहा है। हमने अपने पूर्व के लेखों में बराबर आगाह किया है कि देश को चीन की हरकतों से सावधान रहना होगा। जिन पिंग जीवन पर्यंत के लिये चीने के राष्ट्रपति बन गये हैं, वहीं भारत वर्ष के प्रधानमंत्री को विपक्ष पांच साल के लिये भी काम करने का मौका नहीं देना चाहता। यही फर्क है देश-विदेश की स्थितियों का। अधिकांश समय तक देश पर शासन करने वाली पार्टी किसी दूसरे दल को पांच वर्ष का भी मौका नहीं देना चाहती। यदि सही ढंग से कार्य सम्पन्न होते तो दूसरे दल को मौका ही न हीं मिलता? यह समझने का प्रयास अभी भी पार्टी नहीं कर पा रही है, अभी भी आरक्षण एवं तुष्टीकरण नीति के आधार पर वापस सत्ता में आना चाहती है, जो अन्य दलों की कूटनीति के कारण असम्भव या सिद्ध होता दिखलाई पड़ रहा है। दल उसके लिये भी तैयार है, हमेशा नेतृत्व करने के बाद नेतृत्व के पीछे-पीछे चलना भी मंजूर है, कर्नाटक में सत्ता में रहने के लिये लिगांयतों को हिन्दू धर्म से हटना भी मंजूर है, क्योंकि यह आरक्षण की ही श्रेणी में आता है।
वर्तमान समय में ग्रह स्थित मोदी जी के लिये विपरीत है। शनि की साढ़े साती का अंतिम चरण एवं गोचर में गुरू के विपरीत होने के कारण स्थितियां अनुकूल नहीं है। अनावश्यक के कारणों से सरकार एवं मोदी जी की छवि को धक्का लगेगा। इसके लिये मोदी जी को सोहम नीति त्याग कर लोकतान्त्रिक नीति से चलना लाभदायक रहेगा, क्योंकि भारत वर्ष शनि प्रधान देश है, जो लोकतान्त्रिक नीति पर विश्वास रखता है। अनरूथा समय के फेर में डालकर स्थित को विपरीत बनाने में कोई कसर नहीं उठा रखता है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का खामियाजा सरकार को उठाना पड़ रहा है। लोग वास्तविक घटनाओं से परिचित न होकर स्थिति के विपरीत सोचकर उकसाने का काम कर रहे हैं एवं हिंसा की ओर बढ़ रहे हैं। इसमें अन्य वर्ग समुदाय भी छिपकर हिस्सा लेने से नहीं चूक रहे हैं। यह सब शनि-मंगल की युति का परिणाम है।
मंगल के राशि परिवर्तन तक हिंसात्मक स्थिति के योग बनते रहेंगे। यह स्थिति लम्बे समय तक रहने के योग है। यही ग्रह स्थिति लोगों को छोटी सोच हमेशा-हमेशा के लिये पाकिस्तान – चीन से सावधान रहने को प्रेरित कर रही है। पाकिस्तान हमेशा के लिये चीन के नियंत्रण में आ चुका है। अब का समय युद्ध करके दूसरे देश पर कब्जा जमाने का नहीं है। उसकी आर्थिक स्थिति पर इतना बोझ लाद दिया जाये कि यह कर्जों से निकल ही न पाये आज पाकिस्तान की यही स्थिति बन गई है। पाकिस्तान में चीन इतना निवेश हो जायेगा की वह चीन ही उसकी आर्थिक स्थिति की समीक्षा कर उसका बजट आदि निर्धारण करेगा। उसके संसाधनों का भ्ज्ञरपूर दोहन कर उसे इतना कमजोर कर देगा कि वह चंगुल से निकल ही नहीं पायेगा। यह कार्य पाकिस्तान सिर्फ भारत वर्ष को नीचा दिखाने के लिये करता रहेगा। कारण द्वितीय भाव का राहू उसे सही सोचने ही नहीं देगा। चीन-नेपाल-मालदीप आदि पर लगभग – लगभग लगाम कस ही चुका है, अतः वह दक्षिण एशिया में भारत के वर्चस्व को पूर्ण चुनौती देगा। आंतरिक स्थिति पर दखलंदाजी कर परेशानियां पैदा करता रहेगा, अतः इस विषय पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता रहेगी। चीन के ग्रह पीठ में छूरा भोंकने वाले, विश्वासघाती हैं। उनमें भावुकता का आभाव रहेगा। पाकिस्तान के माध्यम से भारत वर्ष को घेरने का प्रयास करेगा। कारण पाकिस्तान का राहू, चीन का अष्टम शनि भारतवर्ष के लिए सदैव घातक रहेगा।
हमेशा विपरीत सोचने पर बाध्य होंगे। न चैन से सोयेंगे न सोने देंगे की परम्परा पर चहते रहेंगे।
चंद्रमा में गुरू की अंतर्दशा का समय भारत वर्ष की जन्मपत्री में प्रारम्भ होगा। गोचर में शनि अष्टम भाव में रहेगा। अतः यह समय देश को अत्यधिक सावधानी से व्यतीत करना होगा। जनमानस वास्तविकता को न समझते हुए पुनः उकसाने में आ जायेगा। अन्य वर्गों का इससे संबंध न होने के बावजूद छिपकर इसमें शामिल होकर आग में घी डालने का काम करेंगे तथा देश को अस्थिरता की ओर ले जाने का अथक प्रयास करेंगे, अतः सरकार को अत्यधिक सावधानीपूर्वक, पैनी नजर रखते हुए समय व्यतीत करना लाभदायक रहेगा। इसके दूरगामी परिणाम हितकर होंगे। अन्यथा चीन-पाकिस्तान का बेमेल गठजोड़ देश को बाहरी एवं आंतरिक रूप से परेशान करने में कसर नहीं उठा रखेगा।

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