कर्मचारियों पर महामारी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज

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समाचार सच, देहरादून (एजेन्सी)। बिना आरक्षण पदोन्नति बहाली को लेकर आंदोलित जनरल ओबीसी कर्मचारियों पर महामारी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया। यह मुकदमा जिला क्रीड़ा अधिकारी की तहरीर और जिलाधिकारी के आदेश ओर डालनवाला कोतवाली में दर्ज हुआ है। महामारी एक्ट के तहत यह प्रदेश का पहला मुकदमा है। आंदोलित कर्मचारियों पर बीते 24 घंटे के भीतर तीन मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला क्रीड़ा अधिकारी देहरादून ने थाना डालनवाला में विगत 16 मार्च को लिखित तहरीर देते हुये बताया की परेड ग्राउंड स्थित खेल परिसर में कुछ अज्ञात व्यक्तियों द्वारा वहां पर तैनात पीआरडी स्वयंसेवक के मना करने के बावजूद भी जल संस्थान की चार दीवारी को फांदकर खेल परिसर में प्रवेश किया तथा सरकारी कार्य में बाधा डाली गई। जिस संबंध में 16 मार्च को थाना डालनवाला में तहरीर दी गई थी, परंतु आज पुनः 100-150 अज्ञात पुरुषों व महिलाओं द्वारा खेल विभाग के पार्किंग स्थल पर तैनात पीआरडी जवान के मना करने के उपरांत भी जबरदस्ती बिना अनुमति के प्रवेश कर प्रदर्शन किया गया। जिससे राजकार्य में बाधा उत्पन्न हुई तथा लोकहित प्रभावित हुआ। वर्तमान में कोरोना बीमारी के कारण लोगों को समूह के रूप में एकत्रित होने हेतु प्रतिबंधित किया गया है। इसके बावजूद भी इन लोगों द्वारा बिना अनुमति के एकत्रित होकर प्रदर्शन किया जा रहा है। जिससे आम जनमानस में एकत्र हुई भीड़ से कोरोना संक्रमण को लेकर भय का वातावरण उत्पन्न हो रहा है। जिलाधिकारी देहरादून द्वारा कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर किसी एक स्थान पर 50 से अधिक व्यक्तियों के जमा होने पर पाबंदी लगाए जाने संबंधी आदेश पारित किए किये गए है। जिसके दृष्टिगत थाना डालनवाला पर जिला क्रीड़ा अधिकारी की लिखित तहरीर के आधार पर धारा 147/148/353/447 भादवी, धारा-7 क्रिमिनल लॉ एक्ट तथा Epidemic Diseases Act 1897 की धारा 3 का अभियोग पंजीकृत किया गया है।

क्या है महामारी एक्ट

ये कानून आज से 123 साल पहले साल 1897 में बनाया गया था, जब भारत पर अंग्रेजों का शासन था। तब बॉम्बे अब मुम्बई में ब्यूबॉनिक प्लेग नामक महामारी फैली थी। जिस पर काबू पाने के उद्देश्य से अंग्रेजों ने ये कानून बनाया। इसके तहत अधिकारियों को कुछ विशेष अधिकार दिए थे।

महामारी कानून की खास बातें या है महामारी एक्ट
ये कानून आज से 123 साल पहले साल 1897 में बनाया गया था, जब भारत पर अंग्रेजों का शासन था। तब बॉम्बे अब मुम्बई में ब्यूबॉनिक प्लेग नामक महामारी फैली थी। जिस पर काबू पाने के उद्देश्य से अंग्रेजों ने ये कानून बनाया। इसके तहत अधिकारियों को कुछ विशेष अधिकार दिए थे।

महामारी कानून की खास बातें

  • ये कानून भारत के सबसे छोटे कानूनों में से एक है। इसमें सिर्फ चार सेक्शन बनाए गए हैं।
  • पहले सेक्शन में कानून और अन्य पहलुओं को समझाया गया है।
  • दूसरे सेक्शन में सभी विशेष अधिकारों का जिक्र किया गया है जो महामारी के समय में केंद्र व राज्य सरकारों को मिल जाते हैं।
  • तीसरा सेक्शन कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत मिलने वाले दंड/जुर्माने का जिक्र करता है।
  • चौथा और आखिरी सेक्शन कानून के प्रावधानों का क्रियान्वयन करने वाले अधिकारियों को कानूनी संरक्षण देता है।

क्या कहता है Epidemic Act Section 2 :-
इसमें महामारी के दौरान सरकार को मिलने वाले विशेषाधिकारों का जिक्र किया गया है। इसके अनुसार, सरकार जरूरत महसूस होने पर अधिकारियों को सामान्य प्रावधानों से अलग अन्य जरूरी कदम उठाने के लिए कह सकती है।
सरकार के पास रेलवे या अन्य साधनों से यात्रा कर रहे लोगों की जांच करने/करवाने का अधिकार है। जांच कर रहे अधिकारी को अगर किसी व्यक्ति के संक्रमित होने का शक भी होता है, तो वह उसे भीड़ से अलग किसी अस्पताल या अन्य व्यवस्था में रख सकता है। सरकार किसी बंदरगाह से आ रहे जहाज या अन्य चीजों की पूरी जांच कर सकती है, उसे डिटेन भी कर सकती है।

उल्लंघन पर क्या लगेगा जुर्माना:-
महामारी कानून के सेक्शन 3 के तहत इसका जिक्र किया गया है। इसके अनुसार, कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करने / न मानने पर दोषी को 6 महीने तक की कैद या 1000 रुपये जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है।

वहीं दूसरी तरफ कर्मचारियों के खिलाफ एक और मुकदमा डालनवाला कोतवाली में दर्ज हुआ। यह मुकदमा सहायक कोषाधिकारी की ओर से दर्ज कराया गया है। उनका आरोप है कि कर्मचारियों का एक हुजूम दफ्तर में आया और उनके साथ न केवल मारपीट की, बल्कि उन्हें बंधक भी बनाया। मामले में डालनवाला कोतवाली पुलिस ने अज्ञात कर्मचारियों के खिलाफ अभियोग दर्ज कर लिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार अरविंद कुमार सैनी सहायक कोषाधिकारी साइबर ट्रेजरी द्वारा लिखित तहरीर दी कि कोषागार पेंशन एवं हकदारी उत्तराखंड 23 लक्ष्मी रोड डालनवाला कार्यालय के परिसर में उत्तराखंड जनरल-ओबीसी संघ के कर्मचारियों द्वारा उनके साथ मारपीट की गई। उक्त आंदोलनकारियों द्वारा उन्हें जबरदस्ती उनकी मर्जी के विरुद्ध अपने साथ ले जाया गया तथा वहां बंधक बनाकर रखा गया तथा कार्यालय में दोबारा दिखाई देने पर परिवार सहित जान से मारने की धमकी दी गयी। अरविंद कुमार सैनी सहायक कोषाधिकारी साइबर ट्रेजरी द्वारा दी गई लिखित तहरीर के आधार पर थाना डालनवाला में धारा 147/ 327/ 332/ 342/ 353/ 506 भादवी का अभियोग पंजीकृत किया गया हैं।

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