सावधान! पेरासिटामोल का उपयोग बढ़ा सकता है स्ट्रोक और हृदय रोग का खतरा

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समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। हाई ब्लड प्रेशर से ग्रस्त मरीजों के लिए लम्बे समय तक इस दर्द निवारक दवा का सेवन कितना सुरक्षित है, यह शोध इस पर एक बड़ा सवाल पैदा करता है। हाल ही में किए एक नए अध्ययन से पता चला है कि लंबे समय तक पेरासिटामोल के उपयोग से हाई ब्लड प्रेशर का शिकार लोगों में हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। गौरतलब है कि पेरासिटामोल, दुनिया की सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली दवा है जिसका उपयोग बुखार और दर्द के अल्पकालिक उपाय के रूप में दुनिया भर में किया जाता है।
हालांकि लम्बे समय तक इस दवा का उपयोग कितना फायदेमंद है, इसके बहुत कम सबूत मौजूद है। इसके बावजूद इस दवा का उपयोग पुराने दर्द को दूर करने के लिए व्यापक रूप से किया जा रहा है।

शोधकर्ताओं का कहना है डॉक्टरों को कई महीनों तक इस दवा को लेने वाले रोगियों पर इसके फायदे और जोखिमों के बारे में फिर से विचार करने की जरुरत है। ऐसे में सिरदर्द और बुखार के लिए लम्बे समय तक इस दर्द निवारक दवा का उपयोग कितना सुरक्षित है, यह शोध एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।

गौरतलब है कि अक्सर पेरासिटामोल को नॉन-स्टेरायडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (एनएसएआईडी) नामक दर्द निवारक दवाओं के एक सुरक्षित विकल्प के रूप में देखा जाता है। यह एनएसएआईडी दवाएं ब्लड प्रेशर और ह्रदय रोग के जोखिम को बढ़ाने के लिए जानी जाती हैं।

  • यह अध्ययन 110 मरीजों पर किया गया था, जिनमें से करीब दो-तिहाई पहले से हाई ब्लड प्रेशर का शिकार थे और उसकी दवाएं ले रहे थे। इन सभी को हर रोज दिन में चार बार एक ग्राम पेरासिटामोल की खुराक दी गई थी।
  • यह एक आम खुराक है जो पुराने दर्द से ग्रस्त मरीजों को दी जाती है। जबकि अगले दो सप्ताह तक उन मरीजों को दर्द के लिए कोई अन्य दवा या कम करने के अन्य उपाय किए गए थे। इनमें से जिन लोगों को नियमित पेरासिटामोल दी गई थी उनके ब्लड प्रेशर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई थी, जबकि अन्य इलाज लेने वाले मरीजों में ऐसा देखने को नहीं मिला था।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि यह वृद्धि एनएसएआईडी जितनी ही है। अनुमान है कि इसकी वजह से हृदय रोग या स्ट्रोक के जोखिम को लगभग 20 फीसदी का इजाफा हो सकता है।
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सिरदर्द या बुखार के लिए सुरक्षित है इसका थोड़े समय के लिए सेवन

वहीं इस बारे में शोध से जुड़े प्रमुख शोधकर्ता डॉ इयान मैकइंटायर का कहना है कि यह सिरदर्द या बुखार के रोगियों में थोड़े समय के लिए पेरासिटामोल लेने वालों के लिए नहीं है, उन मरीजों में इसका उपयोग निश्चित रूप से सही है। लेकिन जो मरीज आमतौर पर पुराने दर्द के लिए इसका इस्तेमाल लम्बे समय तक नियमित रूप से करते हैं, यह उनके लिए खतरा बन सकती है।

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वहीं इस बारे में एडिनबर्ग विश्वविद्यालय से जुड़े क्लिनिकल फार्माकोलॉजी के प्रोफेसर जेम्स डियर का कहना है कि, श्यह अध्ययन स्पष्ट रूप से दिखाता है कि पैरासिटामोल, जोकि दुनिया की सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली दवा है वो ब्लड प्रेशर को बढाती है, जोकि दिल के दौरे और स्ट्रोक के सबसे बड़े जोखिम कारकों में से हैं। ऐसे में डॉक्टर और रोगियों विशेष रूप से जो ह्रदय रोग से ग्रस्त हैं उन्हें इसके लम्बे समय तक उपयोग के फायदों और जोखिमों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

शोधकर्ताओं का मानना है कि मरीजों को नुस्खे में लम्बे समय तक पेरासिटामोल लिखने से पहले उनके स्वास्थ्य की भी समीक्षा की जानी चाहिए। विशेष रूप से उच्च रक्तचाप, हृदय रोग या स्ट्रोक से ग्रस्त मरीजों के लिए तो यह ध्यान में रखना अत्यंत जरुरी है। एडिनबर्ग विश्वविद्यालय द्वारा किया यह अध्ययन जर्नल सर्कुलेशन में प्रकाशित हुआ है।

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