समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। मां की पूजा नवरात्रि के चौथे दिन की जाती है, जो ऊर्जा और ज्ञान की देवी हैं। पूजा के लिए सुबह स्नान कर हरे या पीले रंग के वस्त्र पहनें, फिर मां को लाल फूल, कुमकुम, इत्र और धूप-दीप अर्पित करें. उन्हें प्रसाद के रूप में मालपुआ या हरे पेठे का भोग लगाएं. ऊँ ऐं हृीं क्लीं कुष्मांडायै नमःष् मंत्र का जाप और आरती करें।
मां कूष्मांडा पूजा विधि
स्नान और संकल्प
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र (प्राथमिकता पीले या हरे) पहनें। हाथों में फूल लेकर मां का ध्यान करें और व्रत/पूजा का संकल्प लें।
कलश पूजन – माता की मूर्ति या फोटो को स्थापित करें और गंगाजल से स्थान शुद्ध करें।
अर्पण –माता को लाल पुष्प, कुमकुम, अक्षत (चावल), धूप, दीप और गंध अर्पित करें। माता को विशेष रूप से कुम्हड़ा (पेठा) या लाल फूल बहुत प्रिय हैं।
भोग
मां कूष्मांडा को मालपुआ या मीठे भोग का प्रसाद चढ़ाएं।
मंत्र और आरती
ऊँ देवी कूष्मांडायै नमः या सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च। दधानाहस्तपद्माभ्यां कुष्मांडा शुभदास्तु मे।। मंत्र का 108 बार जाप करें. इसके बाद माता की आरती करें।
मां कूष्मांडा को प्रसन्न करने के उपाय
रंग – इस दिन हरे या पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
भोग – मालपुआ और हरा पेठा विशेष प्रसाद है।
मंत्र – ऊँ ऐं हृीं क्लीं कुष्मांडायै नमः।
पूजा के लाभ
इससे मानसिक परेशानियां दूर होती हैं, स्वास्थ्य में सुधार होता है और जीवन में यश-बल की वृद्धि होती है।
पूजा के अंत में क्षमा याचना करें और प्रसाद वितरित करें।
कैसा है मां कुष्मांडा का रूप
देवी कुष्मांडा की 8 भुजाएं हैं, जो शेर की सवारी करती हैं। अष्टभुजाओं वाली मां कुष्मांडा के सात हाथों में क्रमशः कमंडल, धनुष, बाण, कमल का फूल, अमृत से भरा कलश, चक्र और गदा हैं। जबकि, देवी के आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जाप माला है। मां कुष्मांडा सूर्यमंडल के मध्य में निवास करती हैं और सूर्य मंडल को अपने संकेतों से नियंत्रित करती हैं।
ऐसा माना जाता है कि मां कुष्मांडा का आराधना करने से साधक के जीवन से सभी प्रकार के कष्ट, रोग, शोक-संतापों का अंत होता है। मां कुष्मांडा की कृपा से व्यक्ति दीर्घायु होकर यश प्राप्त करता है। दुर्गा सप्तशती के अनुसार, देवी कुष्मांडा इस चराचार जगत की अधिष्ठात्री हैं। इसमें वर्णित है कि जब सृष्टि की रचना से पहले अंधकार का साम्राज्य हुआ करता था। देवी कुष्मांडा ने ब्रह्मांड की उत्पत्ति की, जिसके देवी दुर्गा की यह शक्ति कुष्मांडा के रूप में विख्यात हुईं।



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