समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सही मंत्रों का जाप करने से कालसर्प दोष का प्रभाव कम होता है। जीवन के संकट दूर होते हैं और परिवार में शांति बनी रहती है। श्रद्धापूर्वक किया गया जाप कई परेशानियों से मुक्ति दिलाता है।
नाग पूजन मूल मंत्र का जाप
नाग पंचमी के दिन सबसे सरल और प्रभावशाली मंत्र है –
ओम नमः नागाय
स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर शांत मन से इस मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें। यह नाग देवता का बीज मंत्र माना जाता है। इसके जाप से समर्पण भाव बढ़ता है। हर तरह के रोग और कष्ट दूर होने में सहायता मिलती है। नियमित जाप करने से मन में शांति आती है और नाग देवता की कृपा प्राप्त होती है। इस मंत्र को सुबह या पूजा के समय जपना अधिक फलदायी रहता है।
नाग गायत्री मंत्र
ओम फणिनायकाय विद्महे विषदन्ताय धीमहि तन्नो सर्पः प्रचोदयात्।
इस मंत्र का जप करने से मानसिक शांति मिलती है। मनोकामनाओं की पूर्ति में नाग देवता सहायता करते हैं। कम से कम 108 बार जप करने की सलाह दी जाती है। राहु-केतु से जुड़े बुरे प्रभाव भी कम हो सकते हैं। कालसर्प दोष से पीड़ित जातकों के लिए यह मंत्र विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। शुद्ध उच्चारण और श्रद्धा के साथ जप करने से प्रभाव बढ़ता है।
अष्टनाग स्तुति मंत्र का पाठ
अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।
शङ्खपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा।।
इस मंत्र के माध्यम से आठ प्रमुख नाग देवताओं अनंत, वासुकि, शेष, पद्मनाभ, कंबल, शंखपाल, धृतराष्ट्र और तक्षक की वंदना की जाती है। नाग पंचमी पर इसका 11 या 21 बार पाठ करने से पूरे परिवार को सर्प भय से मुक्ति मिलती है। घर में सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। श्रद्धापूर्वक पाठ करने से भय और अनिश्चितता कम होती है।
कालसर्प दोष निवारण मंत्र
ॐ क्रौं नमो अस्तु सर्पेभ्यो कालसर्प शांति कुरु कुरु स्वाहा।
ॐ नमोस्तु सर्पेभ्यो ये के च पृथिवीमनु ये अन्तरिक्षे ये दिवि तेभ्यः सर्पेभ्यो नमः।।
जिनकी कुंडली में कालसर्प दोष का साया है, उन्हें नाग पंचमी के दिन इस मंत्र का जप अवश्य करना चाहिए। इससे कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। करियर के क्षेत्र में भी उन्नति के योग बनते हैं। इस मंत्र का जप करने से कई कष्टों से राहत मिलता है। नियमित जाप से मानसिक बोझ हल्का होता है।
शिव नागेंद्रहाराय मंत्र का जाप
ॐ नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांगरागाय महेश्वराय।
नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मै नकाराय नमः शिवाय।।
नाग पंचमी के पावन दिन इस मंत्र का जप करने से हर प्रकार के रोग-दोष से मुक्ति मिल सकती है। भोलेनाथ और नाग देवता दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह मंत्र शिव और नाग दोनों की संयुक्त कृपा का प्रतीक है। शुद्ध भाव से जप करने पर जीवन में शांति और सुरक्षा का अनुभव होता है। परिवार के कल्याण की प्रार्थना के साथ जप करें।
नाग पंचमी पर इन 5 शक्तिशाली मंत्रों का जाप कालसर्प दोष से राहत दिलाता है। शुद्ध मन और श्रद्धा के साथ किए गए जप से कई परेशानियां दूर होती हैं और घर में सुख-शांति का वास होता है।

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