समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। शलजम की जड़ मोटी होती है, जिसको पकाकर या कच्चा खाते हैं। इसकी पत्तियाँ भी साग के रूप में खाई जाती हैं। सेहत के लिए इसे बहुत ही मूल्यवान माना जाता है। इसमें ठोस पदार्थ 9 से 12 प्रतिशत और विटामिन बी और विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पायी जाती हैं। इसके अलाबा भी इसमें भरपूर मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते हैं। शलजम के सेवन से कई बीमारियों में लाभ भी मिलता है। शलजम मुख्य रूप से सफ़ेद, पीले और बैगनी रंग के पाए जाते हैं। सभी तरह के शलजम भारत में उगाये जाते हैं। आज मैं इस लेख में आपको शलजम के आठ फायदे बताने जा रहा हूँ। आइये जानते हैं उन फायदों के बारे में।
दमा में लाभकारी
शलगम को पानी में उबालकर उसके पानी को छानकर और उसमें चीनी मिलाकर पीने से दमा, खांसी और गला बैठने का रोग ठीक हो जाता है।
कैंसर की रोकथाम
शलजम में एंटीऑक्सिडेंट और फाइटोकेमिकल्स के उच्च स्तर के कारण यह कैंसर के खतरे को कम करने में मदद करता है। ग्लूकोसाइनोलेट्स की उपस्थिति के कारण यह कैंसर के प्रभाव को कम करने में मदद करता है। अपने दैनिक आहार में इस सब्जी का समावेश कर स्तन कैंसर के जोखिम के साथ-साथ मलाशय और ट्यूमर को भी कम कर सकते हैं।
मधुमेह में लाभदायक
मधुमेह के रोग में रोजाना शलगम की सब्जी खाना लाभदायक होता है। इसके पत्तों का रस पीना भी मधुमेह के रोगियों के लिए बहुत ही लाभदायक होता है।
हृदय स्वास्थ्य के लिए वरदान
शलजम में मौजूद विटामिन ‘ए’ के कारण यह एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होता है। यह गुण हार्ट अटैक, हार्ट स्ट्रोक और अन्य हृदय रोगों को रोकने में मदद करता है। शलजम फोलेट का भी एक बेहतरीन स्रोत है जो हृदय प्रणाली को बढ़ावा देने में मदद करता है।
अंगुलियों की सूजन
50 ग्राम शलगम को 1 लीटर पानी में उबालें। फिर उस पानी में हाथ-पैर डालकर रहने से अंगुलियों की सूजन खत्म हो जाती है।
हड्डियों के लिए महत्वपूर्ण
कैल्शियम और पोटेशियम का एक महत्वपूर्ण स्रोत होने के कारण शलजम स्वस्थ हड्डियों के विकास और रखरखाव के लिए महत्वपूर्ण होता हैं। शलजम का सेवन नियमित रूप से करने से हड्डियों के टूटने, ऑस्टियोपोरोसिस के खतरे और रुमेटी गठिया की समस्याओं को रोका जा सकता है।
पेशाब रुक-रुक कर आना
शलगम और कच्ची मूली को काटकर खाने से पेशाब का रुक-रुककर आने का रोग दूर हो जाता है।
फेफड़ों का स्वास्थ्य
सिगरेट के धुएं में पाया जाने वाला कार्सिनोजेन्स शरीर में विटामिन ‘ए’ की कमी के कारण नुकसान पहुंचाता है। जिसके परिणामस्वरूप फेफड़ों की सूजन, एम्फीसेमा और अन्य फेफड़े की समस्याएं हो सकती है। शलजम में निहित विटामिन ‘ए’ इस कमी को दूर करके फेफड़ों को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है।



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