समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। 14 जनवरी को धर्म-कर्म के नजरिए से शुभ योग बन रहा है। इस दिन मकर संक्रांति और षट्तिला एकादशी (माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी) दोनों व्रत-पर्व हैं। पंचांग भेद की वजह से कुछ क्षेत्रों में 15 जनवरी को भी मकर संक्रांति मनाई जाएगी। सूर्य के मकर राशि में आने पर मकर संक्रांति पर्व मनाया जाता है। षट्तिला एकादशी पर भगवान विष्णु के लिए व्रत-पूजा की जाती है।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक मकर संक्रांति और एकादशी के योग में किए गए दान-पुण्य और पूजा-पाठ का अक्षय पुण्य मिलता है, ऐसा पुण्य जिसका असर जीवनभर बना रहता है।
मकर संक्रांति और एकादशी के योग में करें ये शुभ काम
- इस दिन सुबह जल्दी जागना चाहिए और स्नान के बाद सूर्य को जल चढ़ाना चाहिए। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरें, जल में कुमकुम, चावल, लाल फूल डालें। ऊँ सूर्याय नमरू मंत्र जप करते हुए सूर्य को जल चढ़ाएं।
- षट्तिला एकादशी पर तिल से जुड़े 6 शुभ काम करना चाहिए, तिल के 6 उपयोगों की वजह से इस व्रत को षट्तिला कहा जाता है। इस दिन पानी में तिल डालकर स्नान करना चाहिए। शरीर पर तिल का लेप लगाएं। पितरों को तिल मिला हुआ जल अर्पित करें। खाने में तिल का सेवन करें और तिल का दान देना। इस तिथि पर तिल से हवन भी किया जाता है।
- इस दिन गंगा, यमुना, नर्मदा और शिप्रा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है। अगर नदी में स्नान करना संभव न हो, तो घर पर ही पानी में गंगाजल और काले तिल डालकर स्नान कर सकते हैं।
- षट्तिला एकादशी पर भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की विशेष पूजा करनी चाहिए। भगवान को पीले फूल, फल और तिल के लड्डू का भोग लगाएं। पूजा में ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें।
- तिल, गुड़, घी, कंबल, गरम कपड़े, खिचड़ी का दान करें। जरूरतमंद लोगों को सामर्थ्य के अनुसार धन का भी दान करें।
- संक्रांति और एकादशी दोनों ही पितरों की तृप्ति के लिए श्रेष्ठ तिथियां हैं। तिल से किया गया तर्पण पितरों को मोक्ष दिलाता है। पितरों के निमित्त तिल का दान भी करना चाहिए।
- शाम के समय तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाएं और परिक्रमा करें।
मकर संक्रांति है सूर्य पूजा का पर्व
ज्योतिष में सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहते हैं। जब सूर्य मकर राशि में आता है, तो उसे मकर संक्रांति कहा जाता है। सूर्य पंचदेवों में शामिल हैं। सभी शुभ काम पंचदेवों की पूजा के साथ शुरू किए जाते हैं। सूर्य सिंह राशि का स्वामी है। सूर्यदेव की दो पत्नियां बताई गई हैं- संज्ञा और छाया। शनि, यमराज और यमुना इनकी संतानें हैं।
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