समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। शिव का पवित्र महीना सावन शुरू हो गया है। इस बार सावन 4 जुलाई से शुरू होकर 31 अगस्त तक रहेगा। यानी शिव भक्तों को पूरे 59 दिन तक भोलेनाथ की पूजा-उपासना करने का मौका मिलेगा। सावन के सोमवार व्रत रखने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। साथ ही, इस पवित्र महीने में शिवजी की पूजा से अशुभ योग या दुर्याेगों का भी नाश होता है। आइए जानते हैं कि सावन में शिवजी की पूजा से कौन से दुर्याेग नष्ट होते हैं।
केमद्रुम योग
यह चंद्रमा से बनने वाला सबसे भयंकर दुर्याेग है। चंद्रमा के दोनों तरफ कोई ग्रह न हो और उस पर किसी ग्रह की दृष्टि न हो तो केमद्रुम योग बनता है। यह योग होने पर मानसिक बीमारी, अवसाद या तनाव जैसी स्थितियां बनती हैं। व्यक्ति को कभी कभी घोर दरिद्रता का सामना भी करना पड़ता है। कुंडली में बृहस्पति के मजबूत होने पर ये दुर्याेग काफी हद तक कमजोर हो जाता है।
केमद्रुम योग को समाप्त करने के उपाय
सावन में भगवान शिव का दुग्ध से अभिषेक करवाएं। शिव सहस्त्रनाम का पाठ करें। गले में चांदी की चेन धारण करें. अपनी माता और स्त्रियों का सम्मान करें।
विष योग
ज्योतिष का सबसे रहस्यमयी और नकारात्मक योग है- विष योग। शनि-चंद्रमा या शनि-राहु के संबंध से यह योग बनता है। इस योग के होने पर व्यक्ति नशे का आदी, दुश्चरित्र और अनैतिक हो जाता है। कभी-कभी गंभीर दुर्घटना का शिकार भी होता है। आमतौर पर बड़ा अपराधी भी बन जाता है।
विष योग को भंग करने के उपाय
नित्य प्रातः सूर्य को जल अर्पित करें। तुलसी दल का सेवन करें। पूरे सावन भर रुद्राष्टक का पाठ करें. शिवजी को भांग और धतूरा अर्पित करें। रुद्राक्ष की माला धारण करें।
ग्रहण योग
सूर्य या चंद्रमा से राहु का संयोग होने पर ग्रहण योग बनता है। यह अशुभ योग सुख को नष्ट कर देता है। इसके होने पर व्यक्ति की खुशियों को ग्रहण लग जाता है। कुंडली के शुभ योग काम नहीं करते हैं।
ग्रहण योग को भंग करने के उपाय
सावन के हर सोमवार को उपवास रखें। शिवलिंग का केवल जलाभिषेक करें। पूरे सावन शिव पंचाक्षरी स्तोत्र का प्रातः और सायंकाल पाठ करें।
राहु केतु से बनने वाले दुर्याेग
राहु-केतु की खराब स्थिति कुंडली को बहुत तरीके से प्रभावित करती है। इसको कालसर्प दोष या पितृदोष भी कहते हैं। इनकी वजह से जीवन में बड़ा उतार-चढ़ाव आता है. तरक्की के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं.
राहु केतु के प्रभाव से बचने के उपाय
सर्प की मुद्रिका धारण करें। कच्चे दूध में दूर्वा डालकर शिवलिंग पर अर्पित करें। पूरे सावन भर नागिनी द्वादश नाम स्तोत्र का पाठ करें। (साभार)



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