हरदा ने कहा- हमारा निर्णय थोड़ा भी गड़बड़ाया तो उत्तराखंड और उत्तराखंडियत दोनों सपने हो जाएंगे चकनाचूर

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समाचार सच, लालकुआं। पूर्व सीएम हरदा ने अपील करते हुए कहा है कि यह उत्तराखंड के लिए परीक्षा का समय है। यदि हम जरा सा चूके और हमारा निर्णय थोड़ा भी गड़बड़ाया तो उत्तराखंड और उत्तराखंडियत दोनों सपने चकनाचूर हो जाएंगे। यह उत्तराखंड के लिए परीक्षा का समय है। यदि हम जरा सा चूके और हमारा निर्णय थोड़ा भी गड़बड़ाया तो उत्तराखंड और उत्तराखंडियत दोनों सपने चकनाचूर हो जाएंगे। यह चुनाव उत्तराखंड को 21वीं सदी आगे बढ़ाने का चुनाव है। यह चुनाव उत्तराखंडियत के समावेश और उत्तराखंड की संस्कृति की ध्वज पताका को फहराने का चुनाव है। दूसरी पार्टियों के पास उत्तराखंड की समझ नहीं है। वह जुमले दे सकते हैं मगर एक रोडमैप नहीं दे सकते हैं। मैं आपसे वादा करता हूं कांग्रेस के पास एक स्पष्ट रोड मैप है।

उन्होंने बताया कि हमारा घोषणा पत्र उत्तराखंड की परंपरागत संस्कृति की रक्षा की बात करता है। एक नई उत्तराखंडी संस्कृति के उद्भव की बात करता है। वह एक नई सोच को आगे बढ़ाने की बात करता है। मेरा वादा है कि आप सब से हम अर्थव्यवस्था के पैरामीटर को सुधारेंगे। जब मैं 2013 में ध्वस्त अर्थव्यवस्था के ऊपर नव निर्माण की नीव डाल सकता हूं। उसे आगे बढ़ाने का काम कर सकता हूं। अर्थव्यवस्था को सुधार सकता हूं। तो यह काम आज पहले के चुनौतीपूर्ण समय से सरल है। वह दौर कितना कठिन था मगर आप सबके सहयोग से हम उस दौर से बाहर निकले। आर्थिक रूप से संपन्न उत्तराखंड की नीव पड़ी।

हरीश रावत ने कभी किसी विकास के काम के लिए या किसी लोक कल्याण के काम के लिए संसाधनों का रोना नहीं रोया। कांग्रेस के पास संसाधन जुटाने का हुनर है। हम जानते हैं कि किस तरीके से संसाधन जुटाए जाते हैं। केंद्र सरकार से किस तरीके से योजनाओं को स्वीकृत कराया जाता है। मानक के अनुसार चलने का हुनर होना चाहिए। जो भारतीय जनता पार्टी में नहीं है। यही कारण है कि राज्य की भाजपा सरकार केंद्रीय योजनाओं को लाने में पूरी तरह असफल रही। मैं अपने कार्यकाल की एक बानगी बताना चाहता हूं कि हमने किस प्रकार प्रधानमंत्री सड़क योजना में उत्तराखंड के लिए सर्वाधिक योजनाएं मंजूर कराई। हम आगे भी हुनर दिखाते हुए राज्य की प्रति व्यक्ति औसत आय को अगले 5 साल में बढ़ाकर 4 लाख लोगों तक लेकर जाएंगे। सीमांत और मैदानी क्षेत्रों की आय में जो भारी अंतर है, उसे पाटने का काम करेंगे। कोई ऐसा सीमांत क्षेत्र नहीं रहेगा जहां की औसत आय साढे तीन लाख से कम हो। हम राजस्व संग्रह के नए क्षेत्रों को विकसित करेंगे। जब डूबती अर्थव्यवस्था में हरीश रावत की सरकार 19.30 प्रतिशत की वार्षिक राजस्व वृद्धि दर दर्ज कर सकती है तो अब यह काम आगे और सरल होगा। मैं सबसे विश्वास से कहना चाहता हूं कि हम विकास दर को हमेशा ऊंचा बनाकर रखेंगे। हमने 5 साल में अपनी विकास दर के लिए लक्ष्य 12ः वार्षिक का रखा है। यदि हम विकास दर को बढ़ाएंगे तो रोजगार के अवसर अपने आप विकसित होंगे। हमने 5 साल में चार लाख रोजगार जिसमें स्वरोजगार भी शामिल है सर्जित करने की बात कही है। हमने सरकारी विभागों में रिक्त पड़े पदों को न केवल भरने की बात कही है, बल्कि हर साल 10ः नए पद सृजित करने की भी बात कही है। सरकार के खजाने से यदि कहीं भी 50 करोड़ से अधिक खर्च होगा तो सचिव और मंत्रिमंडल को विश्वास देना पड़ेगा कि इससे कितने रोजगार उपलब्ध होंगे। हम रोजगार मूलक राज्य की अवधारणा के साथ आगे बढ़ेंगे। मेरी सरकार ने शिक्षा और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में बहुत काम किया। आईटीआई, पॉलिटेक्निक, तकनीकी संस्थान इस बात की बानगी हैं। आज उनसे निकला हुआ लड़का खाली हाथ है। ऐसे हुनर बंद नौजवान यदि खाली हाथ हैं तो हरीश रावत और कांग्रेस इसे अपनी चुनौती मानते हैं। दुनिया के अंदर आज तकनीकी और दक्ष युवाओं की जरूरत है। हम उन भाइयों को भी काम देंगे जो गांव में हैं। जिनके पास संसाधन नहीं हैं। हमने कहा है कि कोई भी उत्तराखंडी 5 साल में ऐसा नहीं रहेगा जिसके पास अपनी जमीन का टुकड़ा ना हो। क्यों मैं बिंदुखत्ता और अन्य खक्तों की बात करता हूं? क्योंकि यह उत्तराखंडी संस्कृति के प्रतीक हैं। वह संघर्ष यहां पहुंचे हैं और वह आज सपना देख रहे हैं अपने जमीन के मालिकाना हक का। वह सपना देख रहे हैं सरकारी शुख सुविधाओं का। हमारी सरकार इन सब के सपनों को साकार करेगी। हमारी राज्य के अंदर लगभग पौने दो लाख लोगों को हमने जमीनों का मालिकाना हक दिया था। लेकिन अभी भी बहुत सारे लोगों को मालिकाना हक मिलना बाकी है। जिसमें हमारे मलिन बस्तियों में रहने वाले और दूरदराज के क्षेत्र सम्मिलित हैं। मैं सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हम अपने 2016 के मालिकाना हक देने के एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम करेंगे। हम संसाधन इसी मिट्टी से पैदा करेंगे। हम एक जल शक्ति, पर्यावरण शक्ति, जंगल वृक्ष शक्ति, पशुधन शक्ति बनेंगे।

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उनका कहना था कि हरीश रावत की सरकार ने कई प्रकार की बोनस योजनाएं शुरू की थी। जिसमें दुग्ध बोनस योजना, गंगा गाय योजना, विधवा महिला बकरी पालन योजना शुरू की थी। हमने वृक्ष बोनस योजना, हॉर्टिकल्चर बोनस योजना शुरू की थी। भांग और बिच्छू घास हमें शक्ति के रूप में दिखाई दे। हमने मडवा बोनस, झुंगरा बोनस, चौलाई बोनस शुरू किये। हमने जल संवर्धन की नीतियों को बनाया। हम अशक्त व्यक्तियों को पेंशनर के सहारे सहारा देंगे। और सक्षम व्यक्तियों के लिए ऐसे अवसर पैदा करेंगे जो परिश्रम करके अच्छा मुनाफा कमा सकें। वह जो भी पैदा करें उसकी मार्केटिंग करने का काम सरकार करे। हमने मेरे गांव मेरी सड़क योजना प्रारंभ की थी उसे भाजपा सरकार ने बंद कर दिया। हमने किसानों को आगे बढ़ाते हुए गन्ना किसानों के लिए रेट बढ़ाने का काम किया दूसरी तरफ मड़ुवा और झुगरे के दाम बढ़ाकर खेती को बढ़ावा दिया। हमारे कई ऐसे काम है जिन्हें हम आगे बढ़ाने का काम करेंगे।

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