समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। सुख और सम्पत्ति हर व्यक्ति की जरूरत है। हमारी सारी कोशिशें जीवन में सुख जुटाने के लिए होती हैं, कई बार बहुत कोशिशें करने के बाद भी किसी को सुख और वैभव नहीं मिलता और किसी को बिना प्रयास या कम कोशिशों के बाद भी बहुत सी सम्पत्ति मिल जाती है। ऐसा हमारी जन्म पत्रिका के चौथे घर के कारण होता है। जानिए ये क्यों होता है ?
जन्म पत्रिका का चतुर्थ स्थान माता एवं सुख दोनों का स्थान है। चतुर्थ स्थान में सूर्य गुरू, बुध, शुक्र व चंद्र अपनी शुभ स्थिति मित्र या स्वराशि में स्थित हों अथवा शुभ ग्रहों की दृष्टि से युक्त हों तो जातक को माता तथा अन्य भौतिक सुख आसानी से मिलते हैं।
इसी स्थान पर यदि अशुभ या क्रूर ग्रह हों तो जातक को मां एवं अन्य सुख नहीं मिलते।
सूर्य उच्च का होकर यदि चतुर्थ स्थान पर बैठा हो तो जातक को सुख के साथ माता की ओर से अतुल धन संपत्ति भी मिलती है। उसकी मां कोई ऊंचे ओहदे वाली महिला होती है।
गुरू उच्च का या मित्र राशि से युक्त चतुर्थ स्थान में हो तो जातक के वैभव में कमी नहीं आती तथा गुरू की महादशा लगने पर वह संसार के सारे आनंद का उपभोग करता है।
सुख बढ़ाने का क्या करें उपाय…
- रविवार को सफेद तिल पीपल पर चढ़ाये।
- शनि के दोष के कारण सुख में कमी हो तो बकरी का दूध पीने से दुखों का नाश होता है।
- शनिवार को रात को पीपल के पेड़ के नीचे दीपक लगाएं।
- शिव का पूजन सभी दुखों का नाश करने वाला है।



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