करवाचौथ व्रत का प्राप्त होगा विशेष फल: डॉ. आचार्य सुशांत राज

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। करवाचौथ की तैयारियों को लेकर दून के बाजारो मे आज खासी भीड़ देखी गई। श्रृंगार, व्रत एवं पूजा सामग्री की खरीददारी के लिए बाजार में महिलाओं की भीड़ दिन भर उमड़ी रही। हिंदू धर्म में करवाचौथ का व्रत बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन सुहागिन स्त्रियां 16 श्रृंगार कर हाथों में मेंहदी लगाती हैं। बाजार में मेंहदी लगवाने के लिए स्टॉलों पर महिलाओं की काफी भीड़ देखने को मिली। इनमें अरेबियन, मारवाड़ी, जोधपुरी डिजाइन हमेशा की तरह महिलाओं की डिमांड में हैं। इस बार मेंहदी 50 रुपये से 500 रुपये तक के लगाई जा रही मेंहदी। आधुनिक दौर में मैटल, पीतल, सोने और प्लास्टिक की चूडिय़ां बाजार में अपनी जगह बना रही हैं। लेकिन आज भी सुहागिनों की पहली पसंद कांच की चूडिय़ां ही हैं। कांच की चूडिय़ों को बेहद शुभ माना जाता है। बाजार में इन दिनों वेलवेट और नल्की वाली चूडिय़ों का ट्रेंड चल रहा है। कांच की चूड़ी पर वेलवेट को सुंदर ढंग से सजाया जाता है। वहीं, नल्की की चूड़ियों में नग से की गई सुंदर सजावट आकर्षक लगती है। यह 50 रुपये से 100 रुपये तक की रेंज में मौजूद हैं।
अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु की कामना के लिए किया जाने वाला सुहागनों का पर्व करवाचौथ इस बार बुधवार 4 नवम्बर को होगा। डॉ. आचार्य सुशांत राज के अनुसार करवाचौथ पर व्रत का विशेष फल प्राप्त होगा। करवा चौथ हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। यह भारत के पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान का पर्व है। यह कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। यह पर्व सौभाग्यवती (सुहागिन) स्त्रियाँ मनाती हैं। यह व्रत सुबह सूर्याेदय से पहले करीब ४ बजे के बाद शुरू होकर रात में चंद्रमा दर्शन के बाद संपूर्ण होता है। ग्रामीण स्त्रियों से लेकर आधुनिक महिलाओं तक सभी नारियाँ करवाचौथ का व्रत बडी़ श्रद्धा एवं उत्साह के साथ रखती हैं। शास्त्रों के अनुसार यह व्रत कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की चन्द्रोदय व्यापिनी चतुर्थी के दिन करना चाहिए। पति की दीर्घायु एवं अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए इस दिन भालचन्द्र गणेश जी की अर्चना की जाती है। करवाचौथ में भी संकष्टीगणेश चतुर्थी की तरह दिन भर उपवास रखकर रात में चन्द्रमा को अर्घ्य देने के उपरांत ही भोजन करने का विधान है। वर्तमान समय में करवाचौथ व्रतोत्सव ज्यादातर महिलाएं अपने परिवार में प्रचलित प्रथा के अनुसार ही मनाती हैं लेकिन अधिकतर स्त्रियां निराहार रहकर चन्द्रोदय की प्रतीक्षा करती हैं। कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करकचतुर्थी (करवा-चौथ) व्रत करने का विधान है। इस व्रत की विशेषता यह है कि केवल सौभाग्यवती स्त्रियों को ही यह व्रत करने का अधिकार है। स्त्री किसी भी आयु, जाति, वर्ण, संप्रदाय की हो, सबको इस व्रत को करने का अधिकार है। जो सौभाग्यवती (सुहागिन) स्त्रियाँ अपने पति की आयु, स्वास्थ्य व सौभाग्य की कामना करती हैं वे यह व्रत रखती हैं। यह व्रत 12 वर्ष तक अथवा 16 वर्ष तक लगातार हर वर्ष किया जाता है। अवधि पूरी होने के पश्चात इस व्रत का उद्यापन (उपसंहार) किया जाता है। जो सुहागिन स्त्रियाँ आजीवन रखना चाहें वे जीवनभर इस व्रत को कर सकती हैं। इस व्रत के समान सौभाग्यदायक व्रत अन्य कोई दूसरा नहीं है। अतः सुहागिन स्त्रियाँ अपने सुहाग की रक्षार्थ इस व्रत का सतत पालन करें।
कार्तिक कृष्ण पक्ष की चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी अर्थात उस चतुर्थी की रात्रि को जिसमें चंद्रमा दिखाई देने वाला है, उस दिन प्रातः स्नान करके अपने सुहाग (पति) की आयु, आरोग्य, सौभाग्य का संकल्प लेकर दिनभर निराहार रहें। उस दिन भगवान शिव-पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, गणेश एवं चंद्रमा का पूजन करें। पूजन करने के लिए बालू अथवा सफेद मिट्टी की वेदी बनाकर उपरोक्त वर्णित सभी देवों को स्थापित करें। शुद्ध घी में आटे को सेंककर उसमें शक्कर अथवा खांड मिलाकर मोदक (लड्डू) नैवेद्य हेतु बनाएँ। बालू अथवा सफेद मिट्टी की वेदी पर शिव-पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, गणेश एवं चंद्रमा की स्थापना करें। मूर्ति के अभाव में सुपारी पर नाड़ा बाँधकर देवता की भावना करके स्थापित करें। पश्चात यथाशक्ति देवों का पूजन करें।
करवा चौथ मुहूर्त
करवा चौथ तिथि- 04 नवंबर 2020 (बुधवार)
करवा चौथ पूजा मुहूर्त- शाम 5 बजकर 29 मिनट से शाम 6 बजकर 48 मिनट तक
चंद्रोदय- रात 8 बजकर 16 मिनट पर
चतुर्थी तिथि आरंभ- सुबह 3 बजकर 24 मिनट पर (04 नवंबर)
करवा चौथ व्रत में प्रयोग होने वाली सामग्री-
चंदन, शहद, अगरबत्ती, पुष्प, कच्चा दूध, शक्कर, शुद्ध घी, दही, मिठाई, गंगाजल, अक्षत चावल, सिंदूर, मेहंदी, महावर, कंघा, बिंदी, चुनरी, चूड़ी, बिछुआ, मिट्टी का टोंटीदार करवा व ढक्कन, दीपक, रुई, कपूर, गेहूं, शक्कर का बूरा, हल्दी, जल का लोटा, गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी, लकड़ी का आसन, चलनी, आठ पूरियों की अठावरी, हलुआ और दक्षिणा दान के लिए रुपये आदि।
करवा चौथ के दिन व्रती स्त्रियां सोलह श्रृंगार करती हैं। इस दिन लाल रंग के वस्त्र या साड़ी पहनना शुभ माना जाता है। डॉक्टर आचार्य सुशांत राज के अनुसार करवा चौथ पर व्रती स्त्रियों के राशि के हिसाब से भी वस्त्र धारण कर पूजन करने से उन्हें शुभ फल की प्राप्ति होती है। राशि के हिसाब से शुभ रंग –
मेष- गहरा लाल रंग की साड़ी
वृष- पीला रंग
मिथुन- हरा रंग
कर्क – गुलाबी रंग
सिंह- लाल रंग
कन्या – हरी धारियों वाली साड़ी
तुला – पीली साड़ी
वृश्चिक – प्लेन साड़ी
धनु – हल्के पीले रंग की साड़ी
मकर – कथई रंग की साड़ी
कुम्भ – मैरून रंग की साड़ी
मीन – पीली साड़ी

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