समाचार सच, हल्द्वानी। कोरोना वायरस के दुनिया में फैलने के साथ-साथ एक शब्द हर किसी की जुबान पर चढ़ गया। वो शब्द है क्वारंटाइन। जिसका मतलब 40 दिन होता है। इसे प्लेग महामारी के समय से इस्तेमाल किया जा रहा है। आज हर कोई इसका इस्तेमाल कर रहा है। हालांकि कुछ लोग आज भी इसका अर्थ नहीं जानते हैं, लेकिन ये शब्द आज के समय में सबसे अधिक प्रचलित शब्दों में से एक बन चुका है। दुनिया के करोड़ों लोगों के लिए ये शब्द नया है। लेकिन इससे पहले हम आपको इसका अर्थ समझा देते हैं। क्वारंटाइन दरअसल उन लोगों पर लगाए गए उस प्रतिबंध को कहा जाता है जिनसे किसी बीमारी के फैलने का खतरा होता है। ऐसे में लोगों को एक जगह पर बंद कर दिया जाता है और इस दौरान उन्हें किसी से मिलने-जुलने, बाहर निकलने तक की इजाजत तक नहीं होती है।
इस तरह का प्रतिबंध अकसर उन बीमारियों से ग्रसित मरीजों पर लगाया जाता है जो कम्यूनिकेबल डिजीज होते हैं। इसका अर्थ होता है कि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में होने वाली बीमारी। इसको मेडिकल आइसोलेशन या कॉर्डन सेनिटायर भी कहा जाता है। कॉर्डन सेनिटायर का अर्थ लोगों को एक ही सीमा के अंदर रहने की इजाजत होती है। उसके बाहर वो नहीं निकल सकते हैं। यदि ऐसे लोगों को बाहर आम लोगों की तरह ही खुला छोड़ दिया जाए तो ये हजारों लोगों तक उस बीमारी का प्रसार कर सकते हैं। ऐसे में क्वारंटाइन एहतियात के तौर पर किसी मरीज पर लगाया गया प्रतिबंध भी है। और ये इंसान के अलावा जानवरों पर भी लागू होता है।
14 दिन के सेल्फ आइसोलेशन के पीछे यह है कैलकुलेशन
ऐसे हर व्यक्ति को जो कोरोना वायरस से प्रभावित इलाके में होकर आए हैं, या जिनका संपर्क इस वायरस से प्रभावित किसी शख्स से हुआ है, उन्हें पहले ही 14 दिनों के लिए सेल्फ आइसोलेशन में जाने के लिए कहा जाता रहा है। दुनियाभर में 14 दिन के क्वारंटाइन यानी एकांतवास के पीछे की कैलकुलेशन यह है कि इस बीमारी के लक्षण आने में ज्यादातर मामलों में 6 दिन लगते हैं और अगले 8 दिन तक संक्रमित व्यक्ति घातक स्तर पर संक्रमण फैला सकता है यानी बीमारी के लक्षण उजागर होने के पहले के 6 दिन और लक्षण उजागर होने के बाद के 8 दिन, मतलब 6$8=14 दिन।
किसी व्यक्ति में ब्वअपक-19 के लक्षण इस वायरस के उनकी बॉडी में एंट्री करने के 2 से 14 दिन के बीच नजर आते हैं। साथ ही यह भी देखा गया कि सिंप्टम्स आने के बाद 8 से 10 दिन तक व्यक्ति कॉन्टेजियस रहता है। इसके बाद उसके जरिए इंफेक्शन होने के चांस लगभग खत्म हो जाते हैं।
किसी व्यक्ति में 14वें दिन इस बीमारी के लक्षण नजर आए हैं और अगले 8 से 10 दिन वह व्यक्ति कॉन्टेजियस रहने वाला है तो कुल मिलाकर एक संक्रमित व्यक्ति 22 से 24 दिन तक इस बीमारी को फैलाने की क्षमता रखता है।



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