समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। अश्विन मास की शुक्ल पक्ष की तिथि से नवमी तिथि तक शारदीय नवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा- अर्चना की जाती है। जिसके बाद महानवमी के दिन कन्या पूजन के साथ ही मां दुर्गा को विदा कर दिया जाता है। माना जाता है कि इन नौ दिनों में स्वंय मां दुर्गा धरती पर उपस्थित रहकर अपने भक्तों को आर्शीवाद देती हैं। यदि आप भी शारदीय नवारात्रि पर मां दुर्गा की आराधना करना चाहते हैं तो आपको शारदीय नवरात्रि 2020 में कब है, शारदीय नवरात्रि के घटस्थापना का शुभ मुहूर्त, शारदीय नवरात्रि का महत्व,शारदीय नवरात्रि की पूजा विधि और शारदीय नवरात्रि कथा के बारे में अवश्य जान लेना चाहिए। चैत्र मास की नवरात्रि के बाद अश्विन मास के शुक्ल पक्ष के नवरात्रों को विशेष महत्व दिया जाता है। शास्त्रों के अनुसार यदि कोई साधक पूरी श्रद्धा के साथ इन नौ दिनों में मां दुर्गा की आराधना करता है तो न केवल उसके जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं बल्कि उसे जीवन के सभी सुख भी प्राप्त होते हैं तो आइए जानते हैं शारदीय नवरात्रि 2020 में कब है, शारदीय नवरात्रि के घटस्थापना का शुभ मुहूर्त, शारदीय नवरात्रि का महत्व,शारदीय नवरात्रि की पूजा विधि और शारदीय नवरात्रि कथा 17 अक्टूबर 2020 शारदीय नवरात्रि 2020 घटस्थापना शुभ मुहूर्त घटस्थापना मुहूर्त – सुबह 6 बजकर 23 मिनट से सुबह 10 बजकर 12 मिनट तक घटस्थापना अभिजित मुहूर्त – सुबह 11बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ – रात 01 बजे से (17 अक्टूबर 2020 ) प्रतिपदा तिथि समाप्त – रात 09 बजकर 08 मिनट तक (17 अक्टूबर 2020) चित्रा नक्षत्र प्रारम्भ – दोपहर 02 बजकर 58 मिनट से (16 अक्टूबर 2020) चित्रा नक्षत्र समाप्त – अगले दिन सुबह 11 बजकर 52 मिनट तक (17 अक्टूबर 2020) शारदीय नवरात्रि का महत्व नवरात्रि साल में चार बार आती है। जिसमें से पहली नवरात्रि चौत्र मास में आती है तो दूसरी नवरात्रि अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है। इसके अलावा दो गुप्त नवरात्रियां होती है। लेकिन शास्त्रों के अनुसार चैत्र मास और अश्विन मास की नवरात्रि को ही विशेष माना जाता है। शारदीय मास की नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। इस समय में किया गया जप,तप और हवन साधक को विशेष लाभ पहुंचाता है।
शुभ या अशुभ शारदीय नवरात्रि के नवें दिन महानवमी का त्यौहार मनाया जाता है और मां दुर्गा को विदा कर दिया जाता है। इसके बाद महनवमी के अगले दिन विजयदशमी यानी दशहरे का त्योहार मनाया जाता है। शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की विधिवत पूजा – अर्चना और व्रत करने से न केवल जीवन की सभी समस्याएं समाप्त होती है। बल्कि जो लोग इन नवरात्रों में सिद्धियों के लिए मां दुर्गा की आराधना करते हैं उन्हें सिद्धियां भी प्राप्त होती है।
शारदीय नवरात्रि पूजन विधि
- शारदीय नवरात्रि के पूजा से एक दिन पहले ही आपको पूजा की सामग्री एकत्रित कर लेनी चाहिए।इसके बाद शारदीय नवरात्रि को स्नान करने के बाद लाल वस्त्र धारण करने चाहिए।
- इसके बाद एक चौकी पर गंगाजल छिड़क कर शुद्ध करके उस पर लाल कपड़ा बिछाएं और मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें और कलश की स्थापना करें।
- कलश की स्थापना करने के बाद मां दुर्गा को लाल वस्त्र,लाल फूल, लाल फूलों की माला और श्रृंगार आदि की वस्तुएं अर्पित करें और धूप व दीप जलाएं।
- यह सभी वस्तुएं अर्पित करने के बाद गोबर के उपले से अज्ञारी करें। जिसमें घी, लौंग, बताशे,कपूर आदि चीजों की आहूति दें।
- इसके बाद नवरात्रि की कथा पढ़ें और मां दुर्गा की धूप व दीप से आरती उतारें और उन्हें प्रसाद का भोग लगाएं। शारदीय नवरात्रि की कथा पौराणिक कथा के अनुसार एक समय महिषासुर ने देवलोक पर अपनाा अधिपत्य कर लिया था। वह सभी देवताओं का अंत करना चाहता था। महिषासुर को भैंसा दानव भी कहा जाता था। महिषासुर तीनों लोक पर अपना कब्जा करना चाहता था। कोई भी देवता उसका सामना नहीं कर सकता था। इसलिए सभी देवता ब्रह्मा जी के पास इस समस्या के समाधान के लिए गए। सभी देवताओं ने ब्रह्मा जी से यह आग्रह किया कि वह इस समस्या का कोई समाधान उन्हें बताएं।
नवरात्रि में ऐसे उगाएं जौ जिससे मां दुर्गा हो जाएं प्रसन्न, आप भी जानें इसके बाद सभी देवताओं ने अपनी शक्तियों का उपयोग करके देवी दुर्गा का निर्माण किया। मां दूर्गा की उत्पत्ति सभी देवताओं की शक्तियों से ही किया जा सकता था। जिससे महिषासुर का अंत किया जा सके। मां दुर्गा का रूप अत्ंयत ही सुंदर और मोहक था। मां के मुख से करुणा, दया, सौम्यता और स्नेह झलकता है। मां की दस भुजाएं हैं और सभी भुजाओं अलग- अलग अस्त्र से सुशोभित हैं। सभी देवताओं की और से उन्हें अस्त्र प्राप्त थे। भगवान शिव ने त्रिशुल, भगवान विष्घ्णु ने चक्र, भगवान वायु ने तीर आदि दिए हैं। जिससे वह पापियों का अंत कर सकें और धरती पर पुनरू धर्म की स्थापना कर सकें। मां शेर की सवारी करती हैं। यह शेर हिमावंत पर्वत से लाया गया था। महिषासुर को यह वरदान था कि वह किसी कुंवारी कन्या के हाथों ही मरेगा। जिस समय मां महिषासुर के सामने गई। वह मां के रूप पर अत्यंत मोहित हो गया और मां को अपने आधीन के लिए कहा। मां को उसकी इस बात पर अत्यंत क्रोध आया और मां ने उसका वध कर दिया। मां ने अपने शास्त्रों का प्रयोग करके उसे मार डाला तो मां के शेर ने भी उसके शरीर का रक्तपान किया। इसी वजह से हर साल नवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है और मां के नौ रूपों की पूजा की जाती है। जानिए सिद्ध कुंजिका मंत्र और जाप का तरीका ऐं हृीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ऊं ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं हृीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा।। अर्थात आप सिद्ध कुंजिका मंत्र का गुदगुदाकर जप करें। और आपकी अवाज दूर तक नहीं जानी चाहिए। सिद्ध कुंजिका मंत्र का जाप 15 मिनट तक करें। और इस तरह से इस अभ्यास को 41 दिन तक नियमित रूप से करें। इसके बाद आप देखेंगे कि सिद्ध कुंजिका मंत्र के चमत्कारी प्रभाव से आपकी मनोकामना जल्दी ही पूरी होगी। और इस तरह आश्चर्य जनक परिणाम देखकर आप चकित हो जाएंगे। शारदीय नवरात्रि अखंड ज्योत का महत्व शारदीय नवरात्रि पर अखंड ज्योत जलाना बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। जो पूरे नौ दिनों तक जलती ही रहनी चाहिए। माना जाता है कि नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा का वास घर में होता है और अखंड ज्योत जलाने से मां दुर्गा प्रसन्न होती है और उनका आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। इसलिए नवरात्रि पर अखंड ज्योत जलाना बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है।
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