समाचार सच, नई दिल्ली डेस्क। कोरोना महामारी के चलते टली देश की जनगणना प्रक्रिया अब फिर शुरू होने जा रही है। सरकार ने ऐलान किया है कि यह प्रक्रिया अप्रैल 2026 से शुरू होकर फरवरी 2027 तक चलेगी। इस बार की जनगणना कई मायनों में खास होगी, क्योंकि इसे पूरी तरह डिजिटल तरीके से कराया जाएगा और नागरिकों को स्वयं जानकारी दर्ज करने का विकल्प भी मिलेगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़े, यदि अपने संबंध को स्थायी मानते हैं, तो उन्हें जनगणना में विवाहित श्रेणी में शामिल किया जा सकता है। यह निर्देश रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त की ओर से जारी किया गया है।
साथ ही, जनगणना के दौरान अधिकारियों के आचरण को लेकर भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। कहा गया है कि यदि कोई अधिकारी उत्तरदाताओं से आपत्तिजनक या अनुचित सवाल पूछता है, गलत जानकारी देता है या बिना अनुमति निजी जानकारी साझा करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर जुर्माना या तीन साल तक की सजा का प्रावधान है।
सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया है कि नागरिकों की सभी निजी जानकारियां पूरी तरह गोपनीय रहेंगी। इसके लिए जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 15 का हवाला दिया गया है, जिसके तहत किसी भी व्यक्ति की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती।
जनगणना दो चरणों में आयोजित होगी। पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 तक चलेगा, जिसमें मकानों और आवासीय सुविधाओं का विवरण जुटाया जाएगा। इस दौरान पानी, बिजली, शौचालय, ईंधन और इंटरनेट जैसी मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ टीवी, कंप्यूटर और वाहनों जैसी संपत्तियों की जानकारी भी ली जाएगी।
दूसरे चरण में, फरवरी 2027 में, जनसंख्या से जुड़ी विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। इसमें परिवार के सदस्यों की संख्या, नाम, उम्र, लिंग, वैवाहिक स्थिति, शिक्षा, धर्म, भाषा, रोजगार और अन्य सामाजिक पहलुओं से संबंधित प्रश्न शामिल होंगे। साथ ही महिलाओं और बच्चों से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जाएगी।
यह देश की 16वीं जनगणना होगी, जिसे अधिक पारदर्शी और आधुनिक बनाने पर सरकार जोर दे रही है।



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