समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। सुहागिन महिलाओं के लिए श्रृंगार का खास महत्व होता है। श्रृंगार ना सिर्फ महिलाओं की खूबसूरती बढ़ाता है बल्कि ये सौभाग्य का प्रतीक भी माना जाता है। महिलाओं के हर श्रृंगार की अपनी एक विशेषता है। आइए जानते हैं इनके बारे में।
सिन्दूर और बिंदी
सिन्दूर को सुहाग का सर्वाेच्च प्रतीक मना जाता है, बिना सिन्दूर के वैवाहिक जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। सिन्दूर-बिंदी का प्रयोग करने से सौभाग्य बना रहता है तथा पति पत्नी के बीच प्रेम सम्बन्ध बढ़ता है। वैज्ञानिक नियमों के अनुसार, सिन्दूर मस्तक के बीचों बीच लगाने से शरीर की विद्युत ऊर्जा नियंत्रित होती है साथ ही महिलाओं के धैर्य में वृद्धि होती है। अगर कुंडली में मंगल कमजोर हो तो सिन्दूर और अगर सूर्य कमजोर हो तो कुमकुम लगाना अच्छा होता है। सिन्दूर और बिंदी हमेशा स्नान के बाद लगानी चाहिए और पहले मां गौरी को समर्पित करना चाहिए प्रयास करना चाहिए की शुद्ध सिन्दूर या अच्छी बिंदी ही लगायी जाय न कि रसायन से बना हुआ कोई पदार्थ।
मंगल सूत्र
वैवाहिक जीवन में दूसरा सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक मंगलसूत्र होता है। यह काली मोतियों का बना होता है जिसको कि पीले धागे में पिरोया जाता है। पीला रंग बृहस्पति का प्रतीक है जिससे वैवाहिक जीवन सुखमय होता है और काली मोतियां नकारात्मक ऊर्जा से विवाहिता की रक्षा करते हैं। अगर मंगलसूत्र में सोने अथवा पीतल का लाकेट लगा हुआ हो तो महिलाओं का स्वास्थ्य उत्तम होता है और उन्हें धन का अभाव कभी नहीं होता। मंगलसूत्र में चौकोर लाकेट लगा होने से बृहस्पति मजबूत होता है तथा पति-पत्नी के बीच प्रेम सम्बन्ध मजबूत होता है। मंगलसूत्र को बार-बार उतारना नहीं चाहिए क्योंकि ऐसा करने से उसकी ऊर्जा नष्ट होगी और उसका लाभ प्राप्त नहीं हो पायेगा।
चूड़ियां
शरीर में कफ,वात और पित्त को नियंत्रित करने के लिए महिलाएं, सुहाग के इस प्रतीक का प्रयोग करती हैं. कांच की चूड़ियां सर्वाेत्तम होती हैं। इसके साथ सोने अथवा चांदी की चूड़ियां पहनी जा सकती हैं। चूड़ियों को कभी भी मंगलवार या शनिवार को न खरीदें, साथ ही पहनने से पहले मां गौरी को अर्पित करें। काले रंग की चूड़ियों से परहेज करना चाहिए। उस व्यक्ति को चूड़ियां उपहार में न दें, जिससे आपका प्रेम सम्बन्ध न हो। चूड़ियों में अगर सफेद रंग के नग लगे हों तो इससे शुक्र मजबूत होगा और बिना बात के झगड़े नहीं होंगे।
पायल
पायल को सम्पूर्ण रूप से सौभाग्य का प्रतीक नहीं माना जाता है फिर भी यह महिलाओं का अत्यंत प्रिय आभूषण है। पायल को पैरों में धारण करते हैं ताकि शरीर में अतिरिक्त चर्बी इकठ्ठा न हो और रक्त का प्रवाह ठीक बना रहे। पायल हालांकि चांदी की सर्वश्रेष्ठ होती है परन्तु कुछ महिलाएं सोने की पायल भी पहनती हैं। पायल में घुंघरू लगे होने चाहिए ताकि उसकी आवाज घर में आती रहे. ऐसा करने से बुध मजबूत होगा और घर में क्लेश नहीं होगा। मान्यताओं के अनुसार सोने की पायल धारण नहीं करना चाहिए, ऐसा करना शुभ नहीं माना जाता है।
बिछिया
बिछिया सौभाग्य की बड़ी महत्वपूर्ण चीज मानी जाती है। हर सौभाग्यवती स्त्री को बिछिया जरूर धारण करना चाहिए। बिछिया धारण करने से महिलाओं की भावनाएं संतुलित और नियंत्रित रहती हैं। अगर बिछिया थोड़ी मोटी बनी हुई हो और चांदी की हो, तो इसका लाभ ज्यादा मिलता है। अविवाहित लडकियां और जो महिलाएँ वैधव्य में हों, को बिछिया धारण नहीं करना चाहिए। यह शुक्र को अत्यधिक मजबूत कर देता है, इसलिए बिना विवाह के बिछिया बिलकुल न पहनें।



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