समाचार सच, देहरादून/हल्द्वानी। डॉ. आचार्य सुशांत राज ने जानकारी देते हुये बताया की आज से पुरुषोत्तम मास शुरू हो गया है। इस माह विवाह, यज्ञोपवीत संस्कार, गृह प्रवेश जैसे सकाम कर्म निषेध बताए गए हैं, जबकि यज्ञ, पूजा-पाठ, कथा आदि निष्काम उपासना के लिए पुरुषोत्तम मास को श्रेष्ठ बताया गया है। मान्यता है कि इस दौरान किए गए धार्मिक कार्यों का अन्य माह में किए गए पूजा-पाठ से 10 गुना अधिक फल मिलता है। असल में हर तीन साल में एक बार अतिरिक्त माह होता है। जिसे अधिकमास, मलमास या पुरुषोत्तम मास के नाम से जाना जाता है। आज से आरम्भ हुआ पुरुषोत्तम मास 16 अक्टूबर तक रहेगा। पुराणों के अनुसार पुरुषोत्तम मास के दौरान यज्ञ-हवन, श्रीमद् देवी भागवत, भागवत पुराण, विष्णु पुराण, भविष्योत्तर पुराण आदि का श्रवण, पठन, मनन विशेष रूप से फलदायी होता है। अधिकमास के अधिष्ठाता भगवान विष्णु हैं, इसीलिए इस पूरे समय में विष्णु मंत्रों का जाप विशेष लाभकारी होता है। ऐसा माना जाता है कि अधिक मास में विष्णु मंत्र का जाप करने वाले साधकों को भगवान विष्णु स्वयं आशीर्वाद देते हैं। ऐसी भी मान्यता है कि इस दौरान किए गए प्रयासों से समस्त कुंडली दोषों का भी निराकरण हो जाता है। अधिकमास के दौरान हिंदू धर्म के विशिष्ट व्यक्तिगत संस्कार जैसे नामकरण, यज्ञोपवीत, विवाह और सामान्य धार्मिक संस्कार जैसे गृह प्रवेश नहीं किया जाता है। हालांकि जो काम नियमित रूप से हो रहे हों उनको करने में कोई बंधन या दबाव नहीं है। नई चीजों की खरीदी इस माह में की जा सकती है। जातकर्म और अन्नप्राशन संस्कार किए जा सकते हैं। भारतीय हिंदू कैलेंडर सूर्य मास और चंद्र मास की गणना के अनुसार चलता है। अधिकमास चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त भाग है, जो हर 32 माह, 16 दिन और 10 घंटे के अंतर से आता है। यह सूर्य और चंद्र वर्ष के बीच के अंतर के संतुलन के लिए होता है। सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है, जबकि चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है, जो हर तीन वर्ष में लगभग एक मास के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को खत्म करने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास आता है, जिसे अतिरिक्त होने के कारण अधिकमास का नाम दिया गया है।
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