‘यत्र नार्यस्तुत पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता’’
समाचार सच, हल्द्वानी। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं की उपलब्धियों और नारी सम्मान के तौर पर मनाया जाता है। पुराणों में भी नारी को गुरूतर मानते हुए यह कहा गया है कि ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्त तत्र देवता’’ अर्थात् जहां नारियों की पूजा की जाती है, महिलाओं को सम्मान मिलता है। नारी को सृजन की शक्ति मानकर समूचे विश्व में 8 मार्च को अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है।
पहला अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस सबसे पहले अमेरिका में सोशालिष्ट पार्टी के आहवान पर 28 फरवरी 1909 को मनाया गया था। महिला दिवस की महत्ता तब और अधिक बढ़ गई जब रूस की महिलाओं से रोटी और कपड़े के लिए वहां की तत्कालीन सरकार के लिए आन्दोलन छेड़ दिया। जब यह आन्दोलन प्रारंभ हुआ उस समय वहां जुलियन कैलेंडर के मुताबिक 28 फरवरी, रविवार का दिन था। लेकिन ग्रेगेरियन कैलेंडर के मुताबिक यह दिन 8 मार्च को पड़ता था इसलिए कालांतर में अंतर्राष्ट्रीय 28 फरवरी को ना मनाकर 8 मार्च को मनाया जाता है। भारत में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं की उपलब्धियों और नारी सम्मान के तौर पर मनाया जाता है। भारत की आजादी में रानी लक्ष्मीबाई जैसी ना जाने कितनी वीरांगनाओं ने अपने प्राणों की आहुति दी।
उत्तराखण्ड के संदर्भ में महिलाओं के योगदान की बात करें तो सड़क से लेकर संसद तक उनका अहम रोल रहा है। राज्य निर्माण के दौरान जहां उन्होंने अपना बलिदान दिया वहीं राज्य की आर्थिकी, सांस्कृतिक, साहित्य, पर्यावरण, नौकरशाही आदि में भी उसका योगदान रहा है। भारत की प्रथम महिला एवरेस्ट विजेता बचेन्द्री पाल, शराब विरोधी आन्दोलन की अगुवा रही टिंचरी माई, चिपको आन्दोलन की प्रणेता गौरा देवी, धर्मशालाओं का निर्माण करने वाली जसुली शौक्याण, मेजर जनरल माया टम्टा, लेखिका शिवानी पत्रकार, मृणाल पाण्डे से लेकर तमाम महिलाओं ने अपनी सार्थकता सिद्ध की है। यहां पहाड़ों में भी महिलाएं विपरीत परिस्थितियों में कार्य करती हैं। जंगल, खेतों में जहां संघर्ष करती हैं वही मैदानी क्षेत्रों में भी संघर्ष करती दिख जाती है।
अन्तरर्राष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) पर उत्तराखण्ड में जनप्रतिनिधियों कहना है कि अभी महिलाओं को वो मुकाम नहीं मिल पाया हैं जिस मुकाम की वो हकदार है। हालांकि इस बीच महिलाओं ने अपनी मौजूदगी मजबूती से दर्शायी है। आज प्रदेश से लेकर देश में उसकी गूंज सुनाई दे रही है। राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से लेकर सड़क तक ई-रिक्शा तक महिलायें चला रही है। इस संदर्भ में समाचार सच वेब पोर्टल के सम्पादक अजय चौहान एवं सहायक सम्पादक धीरज भट्ट ने हल्द्वानी की विभिन्न महिला जनप्रतिनिधियों, समाजसेवी व आम महिलाओं से बातचीत की। प्रस्तुत हैं उन महिलाओं के संदेश:-
शिक्षा से खुलेगा महिलाओं की प्रगति का रास्ता: चन्द्रा पन्त (विधायक, पिथौरागढ़)

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर मैं सभी महिलाओं को बधाई देना चाहती हूं। महिलाओं ने अपने अधिकार के लिए विगत में संघर्ष किया है। भारत में महिला प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति रह चुकी है। आज देश का कोई ऐसा गूंज न हीं है। अभी महिलाओं का प्रतिनिधित्व पहले से बढ़ा है। इसे अभी और बेहतर किये जाने की आवश्यकता है। महिलाओं को अधिक शिक्षित व जागरूक होने की आवश्यकता है। जिससे वे आगे बढ़ सके और देश को मजबूती दें।
देश की उन्नति में महिलाओं का योगदान अहम : बेला तोलिया (अध्यक्ष, जिला पंचायत नैनीताल)

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सभी महिलाओं को बधाई देना चाहती हूं। महिलाओं के हर दिन महिला दिवस है। महिलाएं सभी क्षेत्रों में आगे आ रही है। रानी लक्ष्मीबाई व इन्दिरा गांधी जैसी महिलाओं का खासा योगदान है। भारत सरकार ने महिलाओं के लिए योजनाएं बनायी है। विधायक, ब्लॉक प्रमुख व अन्य पदों पर भी महिलाए ज्यादा हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष होने के नाते मैं महिलाओं से ज्ञान अर्जित करने और सकारात्मक दिशा के साथ सही दिशा में अपने रचनात्मक दिमाग का उपयोग करने का आग्रह करूंगी। उन्होंने कहा कि इस वर्ष हमारे प्रधान मंत्री ने ऐसी सराहनीय पहल की है जिसके तहत वह महिलाओं को इंस्पायरस के अपने व्यक्तिगत सोशल अकाउंट से अपनी प्रेरक कहानियां साझा करने को कह रहे हैं।
जागरूकता से होगा महिला सशक्तिकरण : रेनू अधिकारी (उपाध्यक्ष, कुमाऊं विकास निगम मण्डल)

कुमाऊँ मण्डल विकास निगम की उपाध्यक्ष रेनू अधिकारी का कहना है कि महिलाओं ने अपने अधिकार पाने के लिए लम्बा संघर्ष करना पड़ा। वर्तमान में जो भी महिलाएं यहां तक पहुंची ही उसके लिए उन्होंने अथक परिश्रम किया। वहीं जागरूकता के कारण ही आज महिलाएं अंतरिक्ष तक में पहुंच गयी है। वे कहती हैं कि महिलाओं को तकनीक से जोड़ना चाहिए। वह जो भी निर्णय ले, वह मजबूती से लें। दृढ़ इच्छाशक्ति होना भी महिलाओं की आगे बढ़ने के लिए उसके परिजनों का समर्थन जरूरी है। उनका कहना है कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयास जरूरी है। उनका कहना है कि महिला दिवस पर सभी महिलाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने अपनी योग्यता के अनुसार कार्य मिलना चाहिए। वे जो भी निर्णय लें वह मजबूती से लें।
आज महिलाएं शिक्षित हैं वे आगे बढ़े : कमलेश कैड़ा (प्रमुख, ब्लॉक ओखलकांडा)

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर मैं समस्त महिलाओं को बधाई देती है। मैं चाहती हूं कि महिलाएं समाज में वो मुकाम हासिल करें जो अभी तक नहीं मिला है। महिलाएं आज सभी क्षेत्रों में हावी हैं। महिलाएं कर्तव्यनिष्ठ है और उन्हें अपने अधिकारी व कर्तव्यों को पहचानना चाहिए। समाज को आगे बढ़ने के लिए महिलाओं को आगे आना पड़ेगा।
महिलाओं को देश के प्रति होना होगा जागरूक : लीला बिष्ट (ग्राम प्रधान, पश्चिमी खेड़ा, गौलापार)

8 मार्च की महिला दिवस की बधाई। महिलाओं को अपने व देश के प्रति जागरूक होना चाहिए। मैं अपने पति के कार्यों को आगे बढ़ा रही हूं। साथ में महिलाओं की मजबूती के लिए भी प्रयास कर रही हूं। उन्होंने कहा कि बेटा व बेटी में भेदभाव नहीं करना चाहिए।
जागरूकता से होगा महिला सशक्तिकरण : कनक चन्द्र (संचालिका, श्री आनन्द आश्रम (वृद्धाश्रम)

कनक चन्द्र ने महिला दिवस के अवसर पर कहा की महिला दिवस सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे समसामयिक मुद्दों पर जागरूकता पैदा करने तथा एक खास आंदोलन के साथ जुड़ने के उद्देश्य से दुनिया भर में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि जब हम अपने चारों ओर देखते हैं, तो हम उन महिलाओं की बहुत सी प्रेरक कहानियाँ पाते हैं, जो राजनीति, शिक्षा, अंतरिक्ष, समाजसेवी, फैशन आदि जैसे अपने-अपने क्षेत्र में असाधारण काम कर रही हैं। महिलाएं ताकत और सकारात्मक बदलाव के लिए जानी जाती हैं।
धरातल पर कार्य करने से होगा महिला सशक्तिकरण : रानी मसीह (उत्तराखण्ड राज्य की प्रथम महिला ई-रिक्शा चालक )

स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता की सीख हल्द्वानी निवासी रानी मसीह से ली जा सकती है। वे राज्य की प्रथम महिला ई-रिक्शा चालक हैं, जो महिलाओं को सुरक्षित यात्रा के साथ-साथ उन्हें ई-रिक्शा चलाने और ई-रिक्शा खरीदने में सहायता करती है। उनका कहना है कि विपरीत परिस्थितियों में भी व्यक्ति को हार नहीं माननी चाहिए। वे हल्द्वानी के अलावा रूद्रपुर, बाजपुर में ई-रिक्शा महिला चालकों को प्रशिक्षण दे चुकी हैं। उनका कहना है कि बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ नारे की सार्थकता तभी सिद्ध हो सकती हैं। जब इसे धरातल पर उतारा जाये। उनकी एक बेटी है जो नर्सिंग की शिक्षा हासिल कर वर्तमान में गाजियाबाद में सेवारत है।



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