25 जुलाई होगी नागपंचमी, जानिए कैसे करें पूजा

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हल्द्वानी (धार्मिक डेस्क)। श्रावण मास भगवान शिव की कृपा के साथ-साथ प्रकृति प्रेम, रक्षा, श्रंगार व धरती पर विचरण करने वाले जीवों के प्रति दयाभाव रख कर भी शिव आराधना का फल प्राप्त होता है। इन्हीं प्राणियों मे नागों को भी पूज्य माना गया है। नाग केवल शिव के गले का हार ही नहीं, वह भगवान विष्णु की शय्या के रूप में विराजमान हैं। कृष्ण और कालिया नाग की कथा से हम सभी परिचित हैं। लोकजीवन में नागों से मानव का गहरा नाता है. भविष्योन्तर पुराण में नागों के बारे में वर्णित है —
वासुकिः तक्षकच्ष्येव कालियो मणिभद्रकः,
ऐरावतो धृतराष्ट्रः कार्काेटकधनंजयो,
एतेअभयं प्रयच्छति प्राणिनां प्राण जीविताम.

अर्थात: वासुकि, तक्षक, कालिया, मणिभद्रकः, ऐरावत, धृतराष्ट्र, कार्काेटक, धनंजय, ये सभी प्राणियों को अभयदान देते हैं।
इस बार नागपंचमी 25जुलाई, शनिवार को मनाई जायेगी। पूजा का शुभ मुहूर्त प्रातःकाल 05.43 मिनट 08.25 तक रहेगा। क्योंकि पंचमी तिथि 25जुलाई को दोपहर 12.04 मिनट तक ही रहेगी।

पूजा विधि: प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर घर के मुख्य दरवाजे के दोनों ओर गुंथे आटे से सर्प आकृति बना कर, घर के अंदर एक साफ चौकी पर सफेद कपडा़ बिछा कर नागदेवता की तस्वीर या स्वयं हस्तनिर्मित नाग प्रतिमा रख कर धूप दीप जलायें. इसके पश्चात नाग प्रतिमा को दूध से अभिषेक कर, उनके आगे पुष्प, पान, हल्दी, मिष्ठान्न व कच्चा नारियल अर्पित करें. पूजा किसी एक मंत्र से करें।

  1. ऊँ हं जूं सः श्री नागदेवताये नमोनमः
  2. ऊँ श्री भीलट देवायः नमः
  3. ऊँ भुजंगेशाय विध्महे सर्पराजाय धीमहि तन्नो नाग प्रचोदयात्
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नागपंचमी पर नागपूजा का धार्मिक व सामाजिक कारण तो है ही, ज्योतिषीय कारण भी हैं। विद्वान ज्योतिषी कुंडली में योगों के साथ साथ दोषों पर भी विचार करते हैं। जिनमें मुख्यतः कालसर्प दोष के निवारण हेतु नागपंचमी पर विशेष पूजा का विधान किया जाता है। ध्यान देने योग्य बात है कि सपेरे द्वारा पाले गये सर्प की पूजा शास्त्रसम्मत नहीं है।

अशोक वार्ष्णेय (अंकशास्त्री)

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