सूर्य शनि की युति देती है पितृदोष

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। पौराणिक मतानुसार शनि का जन्म सूर्य की पत्नी छाया से पाया गया है। इसके गुण-अवगुण पर ध्यान न देती हुई श्री लक्ष्मी जी ने इसे अपना दत्तक पुत्र भी बना लिया था। बाद में चाल-चलन तथा क्रूर स्वाभाव के कारण इसे परित्यक्त भी करना पड़ा। शनि देव अपनी दशा-अंतर्दशा में तपाकर शुद्ध सोना जैसा बनाकर समाज के सामने रख देता है और कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर देता है। मुख्य रूप से शनि 33 से 42 वर्ष की अवस्था में जातक के जीवन पर अपना विशेष प्रभाव प्रकट करता है।
शनि तो न्यायाकारक हैं। जातक यदि सद्जीवन व सद्कर्मों के प्रति आस्थावान रहे तो शनि ही उसे जीवन के सारे सुख भी उपलब्ध करवाता है। सूर्य को शनि का पि ता माना गया है, लेकिन जब न्याय-निर्णय की स्थिति होती है, तो शनि अपने पिता को भी दंडित करने से भी नहीं चूकता। अतः ज्येातिष में दोनों (सूर्य-शनि) को परस्पर शत्रु माना गया है और कहा जाता है कि ये दोनों कुंडली के जिस भाव में साथ-साथ होते हैं या एक-दूसरे पर दृष्टि होती है, तो उसे बिगाड़ देते हैं। ऐसे जातक के जीवन में तनाव, उच्चाटन, गृह-क्लेश, पितरदोष एवं पुत्र-पिता में खटपट बनी रहती है। उसे उस भाव से सम्बन्धित सुखों की सहज प्राप्ति नहीं हो पाती। ऐसी स्थिति में पितरदोष का निर्माण करता है और पितरदोष हों तो जातक के उन्नति के रास्ते, वंशवृद्धि रोक देता है एवं स्वाभाव में चिड़चिड़ापन बना रहता है। पत्नी व बच्चों से अनावश्यक वाद-विवाद एवं असमंजस्य की स्थिति बनी रहती है तथा जातक का अंतिम क्षणों में काम बिगाड़ देता है। जन्मपत्री में पितरदोष हों तो ग्रह एवं देवता भी काम नहीं करते हैं।
ज्योतिषत-शास्त्र में शनि को मकर एवं कुंभ राशि का अधिपति और पश्चिम दिशा का स्वामी माना गया है। शनि में आयु, शारीरिक बल, उदारता, प्रभुत्व, मोक्ष, ख्याति, नौकरी, वकालत आदि का आंकलन किया जाता है। किसी भी जातक के द्वारा खुद के मकान का निर्णय किये जाते वक्त शनि की भूमिका महत्वपूर्ण हेाती है।
अशुभ गोचर का प्रभाव – किसी भी ग्रह का जीवन पर पड़ने वाले शुभ-अशुभ प्रभाव का अनुमान कुछ खास घटनाओं से लगाया जा सकता है। उदाहरण के लिए सिकी जातक के मकान का कोई हिस्सा यदि अचानक गिर जाये, भौंहो के बाल झड़ने लगें, भैंस मर जाये, बार-बार वाहन दुर्घटनाएं हों, दिल संबंधी बीमारियां हों, चेहरा काला पड़ जाये, चाचा – ताऊ से संबंध बिगड़ने लगें, नौकर नहीं टिकें, बच्चों का पढ़ाई में मन न लगे, पति – पत्नी में तकरार रहे, नशे का आदी हो जाना, जूते बार-बार गुम जो जायें या जल्दी टूटें, नौकरी में तबादला, चार्जशीट, निलम्बन, बर्खास्तगी, व्यवसाय में अचानक घाटा, मुकद्दमेबाजी पैतृक सम्पत्ति का हाथ से निकलना, जादू – टोने का अधिक प्रभाव हो, तो समझना चाहिए कि आपकी राशि में शनि दोष आ गया है।
शनि – बाधा शांति के सरल उपाय – ऐसे में गृह शांति का एक उपाय है। शनि के अशुभ असर से आक्रांत जाकर जातक यदि नंगे पांव सिगनापुर (महाराष्ट्र) अथवा उत्तर प्रदेश में शनि के सिद्ध कोकिलावन में जाये तो राहत पा सकते हैं। मांस-मदिरा एवं पराई औरत से परहेज रखें।
शनिवार को आलू-बैंगन की सब्जी व पूरी सरसों के तेल में बनाकर इमरती व उड़द की दाल के बड़ों के साथ अंधविद्यालय, कव्वे एवं जरूरतमंद लोगों को खिलाने से शनि की शांति होगी।
अचूक उपाय – कितना भी शनि खराब हो, जन्मपत्री में कैसा भी पितरदोष हो तो सिद्ध अभिमंत्रित त्रिशक्ति लाकेट पहनें तथा काले उड़द के आटे की गोलियां मछली को खिलायें।

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