समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। नशा एवं निषेधात्मक विचार मनुष्य की शक्ति को क्षीण करते है। मनुष्य बिगड़ता है या तो परिस्थितियों से या पूर्व संस्कारों से धन, मित्र, स्त्री और पृथ्वी ये बार- बार प्राप्त होते है, परंतु मनुष्य का शरीर 84 लाख योनियों में भ्रमण करने के पश्चात ही प्राप्त होता है। नशा नाश किये बिना नहीं नहीं छोड़ता व स्वास्थ्य, सम्मान, सम्पत्ति, शांति व संस्कृति को खा जाता शनि पीड़ादायक है तो राहू ऐश्वर्यशाली गृह माना गया। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जातक की जन्म कुंडली से यह पता चल जाता है कि वह मादक पदार्थों का सेवन करता है या नहीं। इससे उसे ठीक करने में भी मदद मिलती है। अच्छी दशा आने पर वह खुद अपना इलाज करता है और जीवन में सफल रहता है। फिल्म अभिनेता संजय दत्त, विख्यात फुटबाल खिलाड़ी डिएगो माराड़ोना और बॉक्सर विजेन्द्र कुछे ऐसे ही जातकों में शामिल हैं।
-खाने-पीने की वस्तुओं का संबंध चंद्रमा से है और राहू के नक्षत्र में दोनों की उपस्थिति दूसरे भाव के स्वामी की नीच राशि में मौजूदगी और खुद राहू का साथ बैठना जातक द्वारा मादक पदार्थों के सेवन का स्पष्ट संकेत करता है। अपनी नीच राशि वृश्चिक में चंद्रमा अक्सर जातक को मादक पदार्थों का सेवन कराता है। क्रूर ग्रह शनि, राह पीड़ित बुध व बृहस्पति की दृष्टि इसमें कुछ कमी करती है और जातक बदनाम होने से बच जाता है।
-नीच ग्रह लोगों को नशा कराते हैं। कन्या राशि में स्थित शुक्र ग्रह हो तो मादक पदार्थों के सेवन का प्रमुख कारण बनता है। प्रख्यात ज्योतिषियों के अनुसार मकर लग्न में नीच का बृहस्पति या पाप ग्रह शनि का बटना। जातक को अफीमची बनाता है द्वादश भाव के स्वामी या नीच राशि में बैठना भी जातक को नशेड़ी बनाता है।
-सूर्य यदि तुला में बैठा हो तो जातक शराब बनाने, बेचने व पीने वाला होता है।
-शनि नीच का हो तो जाल फरेब के साथ विश्वासघाती, अय्याश व नशेड़ी बनाता है।
-यदि राहू नीच का हो तो जातक शराबी, जुआरी, कोकीन, अफीम, हीरोइन आदि का मजा चखता है। ऐसे जातक पितृ दोष से पीड़ित होकर बर्बादी की ओर अग्रसर होते है तथा मां-बाप एवं पड़ोसियों का दिन का चैन और रात की नींद हराम कर देते हैं।
उपाय-
-अभिमंत्रित राहू का यंत्र स्वर्ण पत्र पर खुदवाकर मध्य में गोमेद जड़वाकर प्राण प्रतिष्ठा करके पूजा घर में रखें।
-राहू का एकाक्षी बीज मंत्र एवं राहू का तांत्रिक मंत्र का जाप करें।
-दहेज में बिजली का सामान नीले रंग के कपड़े, स्टील के बर्तन, हाथी एवं खिलौने न लें।
-मूली, कच्चे कोयले, जौ, अनाज का तुला दान करें। -झूठी गवाही न दें, गबन न करें, ससुराल से अच्छे संबंध रखें, परिवार से अलग न रहना व परिवार का मुखिया न बनना।
-पक्षियों को सतनजा सूर्याेदय के बाद डालें।
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