समाचार सच, (अध्यात्म डेस्क)। हरतालिका पर्व पर तिवारी समुदाय के लोग आज रक्षाबंधन पर्व मनायेंगे। बहनें भाईयों के हाथ में राखी बांधेगी। बदले में भाई बहनों को सुरक्षा का वचन देंगे। तिवारी समुदायी के लोग उपाकर्म के बाद नई जनेऊ धारण करेंगे।
ज्ञात हो कि पर्वतीय ही नहीं अपितु मैदानी क्षेत्रों में भी सामवेदी तिवारी व त्रिपाठी समुदाय के लोग श्रावणी पूर्णमासी की जगह हरितालिका तृतीया को उपाकर्म कर जनेऊ बदलते हैं। इसी रोज वह राखी भी बांधते हैं। सामवेदी और कोसमनि शाखा के तिवारी आम लोगों के साथ रक्षाबंधन नहीं मनाते हैं। इसके पीछे कई मान्यताएं हैं। कहा जाता है कि ब्रह्मा की ओर से यज्ञोपवित बांटे जाते वक्त इस समुदाय के लोग नहीं पहुंच पाए थे। एक मान्यता यह भी है कि ये वर्ग गौतम ऋषि का अनुयायी है। एक बार गौतम ऋषि किसी विवाद में उलझ गए। इस वजह से हस्त नक्षत्र का समय निकल गया। बाद में हस्त नक्षत्र भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तृतीया यानी हरतालिका के दिन पड़ा। तभी से तिवारी समुदाय के लोग इसी दिन रक्षा बंधन मनाते आ रहे हैं।
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