समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। यह सादगी, वैराग्य और प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक है। बेर मौसमी फल है, जो शिवजी के तपस्वी स्वरूप को दर्शाता है और दीर्घायु व सौभाग्य लाता है। इसके फायदे में पाचन क्रिया में सुधार, शरीर को ठंडक, खून की सफाई, और इम्यूनिटी बढ़ाना शामिल है, जो इसे स्वास्थ्य के लिए भी बहुत पौष्टिक बनाते हैं।
भगवान शिव को बेर चढ़ाने के प्रमुख कारण –
सरलता और सादगी
बेर एक साधारण फल है, जो यह दर्शाता है कि भगवान शिव को दिखावा नहीं, बल्कि प्रेम और सच्ची श्रद्धा प्रिय है।
तपस्वी स्वरूप का प्रतीक
बेर का पेड़ कांटेदार और कठोर परिस्थितियों में भी पनप सकता है, जो शिवजी की दृढ़ता, वैराग्य और तप को दर्शाता है।
दीर्घायु और सौभाग्य
योतिष शास्त्र के अनुसार, शिवरात्रि पर बेर चढ़ाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है, पापों का नाश होता है और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
मौसमी महत्व
फाल्गुन माह में बेर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होते हैं, इसलिए इन्हें ऋतु के अनुसार शिव को अर्पित किया जाता है।
आंतरिक विकास
यह मान्यता है कि बेर चढ़ाकर इंसान अपने आंतरिक वैर-भाव (दुश्मनी) को शिवजी पर अर्पित कर देता है।
बेर चढ़ाने और खाने के फायदे (धार्मिक और स्वास्थ्य):
स्वास्थ्य के लिए पौष्टिक
बेर में विटामिन सी, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर होते हैं, जो इम्यूनिटी बढ़ाते हैं।
दमा/सांस की समस्या में राहत
मान्यता के अनुसार, शिवरात्रि पर शिवलिंग पर चढ़ाया गया बेर खाने से दमा (।ेजीउं) और सांस से जुड़ी बीमारियों में आराम मिलता है।
पाचन क्रिया में सुधार
बेर का सेवन पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है।
खून साफ करना
बेर में बायोएक्टिव यौगिक होते हैं, जो हानिकारक टॉक्सिन्स को बाहर निकालकर खून को प्राकृतिक रूप से साफ करते हैं।
ऊर्जा का स्रोत
यह थकान को कम करता है और कमजोरी दूर करता है।
नोट: भगवान शिव को अर्पित किया गया बेर प्रसाद के रूप में ग्रहण करना ही सबसे उत्तम माना गया है।



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